बेल्जियम की खूबसूरती में घुला सिख धर्म का गौरव, बलिदान से बसने तक का सफर। Sikhism in Belgium

Shikha Mishra | Nedrick News Ghaziabad Published: 18 Apr 2026, 06:00 AM | Updated: 18 Apr 2026, 06:00 AM

Sikhism in Belgium: आपने पहले विश्वयुद्ध के बारे में कई बार सुना होगा.. जब भारत के सैकड़ो सैनिकों को युद्ध के भेंट चढ़ना पड़ा.. लेकिन पश्चिमी उत्तर के उस देश में चर्चा कम होती है जो 4 सालो तक विश्व युद्द की आग में जला था। जहां 1 लाख से ज्यादा नागरिक मारे गए.. लेकिन दुश्मनो से भागने के बजाय न केवल यहां के वीर बहादुर लोगो ने उनका सामना किया और इसमें साथ दिया भारत के वीर सपूतो ने.. जी हां, हम बात कर रहे है बेल्जियम की.. जो आज खूबसूरती में किसी भी देश को टक्कर  दे सकता है.. एक लोकतांत्रिक देश है जिसने अपने मददगार सिख सिपाहिओं को बेल्जियम की धरती पर न केवल घर दिया बल्कि उन्हें जीवन जीने का रास्ता भी दिखाया। अपने इस लेख हम बेल्जियम में मौजूद सिख धर्म  के बारे में चर्चा करेंगे, साथ ही कैसे बेल्जियन सिखो की पहली पसंद बन गया।

बेल्जियम के बारे में विस्तार से जानकारी – Sikhism in Belgium

बेल्जियम (Belgium) नॉर्थवेस्टर्न यूरोप का एक देश है, जिसका आधिकारिक नाम किंगडम ऑफ़ बेल्जियम है। एक कोस्टल लोलैंड इलाके में बसा होने के कारण इस देश को लो कंट्रीज़ के नाम से भी बुलाया जाता है। 1830 तक बेल्जियम नीदरलैंड का गुलाम था। जिसके बाद वो एक आजाद देश बना और 1839 में उसे आधिकारिक पहचान मिली थी। उत्तर में नीदरलैंड्स, पूर्व में जर्मनी, दक्षिण-पूर्व में लक्ज़मबर्ग, दक्षिण में फ्रांस और पश्चिम में नॉर्थ सी से घिरा हुआ है..जहां उसकी सीमा यूनाइटेड किंग़डम से लगती है। बेल्जीयम (Belgium) का क्षेत्रफल 30,689 वर्ग किलोमीटर है, तो वहीं साल 2025 के आकड़ो के अनुसार बेल्जियम की आबादी 11,825,551 के आसपास है।

वहीं ब्रुसेल्स बेल्जियम (Belgium) की राजधानी है, जो कि सबसे बड़ा मेट्रोपॉलिटन इलाका भी है। बेल्जियम (Belgium) एक मज़बूत वैश्विक अर्थव्यवस्था है, जिसका आधार है खाद्य उत्पाद, मशीनरी, कच्चे हीरे, पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद, रसायन, कपड़े और सामान और वस्त्र का आयातक है तो वहीं इसके मुख्य निर्यात हैं, मोटर वाहन, खाद्य उत्पाद, लोहा और इस्पात, तराशे हीरे, वस्त्र, प्लास्टिक, पेट्रोलियम उत्पाद और अलोह धातुएं। जिसके कारण ये एक तेजी से विकसित होते देशों में शामिल है। बेल्जियम (Belgium) एक रोमन कैथोलिक देश है, जहां करीब 60 प्रतिशत लोग कैथेलिक है, लेकिन फिर भी ये एख लोकतांत्रिक देश है।

सिक्खिज्म इन बेल्जियम – Sikhism in Belgium

ये तो आप सभी जानते होंगे कि पहले और दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटेन का गुलाम होने के कारण भारत के सैकड़ो लोगो को ब्रिटिश इंडियन सेना में भेजा गया था.. जो कि ब्रिटेन की तरफ से लड़े थे, लेकिन क्या आप ये जानते है कि बेल्जियम (Belgium) ही वो पहला देश था जो पश्चिमी क्षेत्रों में युद्ध का मैदान बना था। 1914 में जर्मनी ने बेल्जियम (Belgium)पर हमला किया था जिसे करीब 1 लाख लोग मारे गए थे, लेकिन बेल्जियम (Belgium) की छोटी सी सेना ज्यादा दिनो कर जर्मन सेना का सामना नहीं कर पाई जो पड़ोसी देशो से मदद मांगी.. और तब एंट्री हुई ब्रिटिश सेना की.. जिसमें अनगिनत सिख शामिल थे।

युद्ध के दौरान काफी जानमाल का नुकसान – Sikhism in Belgium

सिखों की सबसे बड़ी भूमिका रही यप्रेस की पहली लड़ाई में.. हालांकि युद्ध के दौरान काफी जानमाल का नुकसान हुआ था, और करीब 4 सालो तक बेल्जियम (Belgium) जर्मनी के कब्जे में ही था.. लेकिन युद्ध विराम के बाद बेल्जियम से जर्मन वापिस चले गए। कापी भारतीय सैनिक वापिस अपने देश लौट आये तो वहीं कुछ सिख वहां ही रूक गए। और यहां आकर खेती बाड़ी और बागान लगा कर व्यापार करने लगे थे, लेकिन आधिकारिक तौर पर पहली बार सिखों के प्रवास के निशान 1972 में मिलने है, जब पहली बार शरणार्थी के तौर पर 8 सिखों को निजी नागरिकों के तौर पर बेल्जियम (Belgium) लाया गया था, जिन्हें युगांडा के तानाशाह इदी अमीन की तानाशाही से बचाकर लाया गया था, क्योंकि उसने सभी भारतीयो को देश से निकाल जाने का हुक्म सुनाया था। जिसमें युगांडा के दूतावात में काम करने वाले जरनैल सिंह अहलूवालिया भी शामिल थे।

90 के दशक में सिखो ने झेली परेशानी

हालांकि 1985 में सुखदेव सिंह जलवेहरा जब बेल्जियम आने का फैसला किया तब सिखों के लिए बेल्जियम के रास्ते खुल गए। ज्यादातर पुरुष ही थे, सिख एक ही स्थान पर एक साथ रहते औऱ आपस मे मिलजुल कर काम किया करते थे। बेल्जियम (Belgium) में खेती बाड़ी और छोटे छोटे व्यापार को करके जीवन जीना आसान था इसलिए गरीब और कमजोर सिख किसान बेल्जियम (Belgium) का रूख करने लगे। धीरे धीरे बेल्जियम (Belgium) में सिखो की संख्या भी बढ़ने लगी। हालांकि 90 के दशक में वहां सिखो को काफी परेशानियां भी झेलनी पड़ी, लेकिन सिखों ने अपनी लड़ाई जारी रखी।

आज के समय में बेल्जियम में करीब 10 हजार सिख रहते है, जिसमें सिंट-ट्रुइडेन (लिम्बर्ग) सिखों का एक मुख्य केंद्र है, जहां करीब 3 हजार सिख रहते है। लीज में 2,000 और ब्रसेल्स में 2,000 से ज्यादा सिख रहते है। वहीं यहां गुरुद्वारों की बात करें तो बेल्जियम में करीब 7 से 8 गुरुद्वारे है, जिसमें सबसे पहला गुरुदवारा गुरुद्वारा संगत साहिब है, जिसकी स्थापना 1993 में की गई थी। सिख आज भी खेती बाड़ी, और बागवानी के व्यापार को करते है लेकिन साथ ही वो बेल्जियम के खई सेक्टर में अहम भूमिका निभा रहे है। बीते कुछ सालों से वहां के सिख खुद के लिए आधिकारिक धर्मिक पहचान की मांग कर रहे है। हालांकि सिखों का योगदान बेल्जियम को हरा भरा रखने में काफी अहम रहा है। जो सिखों की मेहनत और लगन की ही देन है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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