Sikh History and Predictions: सिख धर्म एक ऐसा धर्म है जो एक तरफ जातिगत भेदभाव, मूर्ति पूजा को सिरे से खारिज करता है, तो वहीं सिख धर्म में पुर्नजन्म लेने की अवधारणा भी नहीं मानी जाती है। सिख धर्म मानता है कि आपका यहीं जन्म सबसे सार्थक है, अगला जन्म किसने देखा है.. आपको अपने कर्म पर भरोसा करना चाहिए औऱ केवल गुरु सेवा और सतकर्म करते हुए जीवन जीना चाहिए। श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अनुसार आत्मा अकाल पुरख का अंश है और मरने के बाद आत्मा का दुबारा जन्म नहीं होता बल्कि वो अकाल पुरख में समा जाती है.. जो व्यक्ति संसारिक मोह माया और अंहकार में जीता है, वो ही पुनर्जन्म के चक्र में फंस जाता है, जो कि केवल एक मन की अवस्था मात्र है।
यानि की बात साफ है कि अगर कोई व्यक्ति मन से पवित्र है, जिसने सतकर्म किये है वो जीवन मरण के चक्कर में नहीं फसेगा..तो क्या आप ये सोच सकते है कि सिखों के गुरू कभी पुनर्जन्म ले सकते है.. जिन्होंने आध्यात्म के जरिए अकाल पुरख को पाया.. शायद नही.. लेकिन क्या आप ये जानते है कि सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी ने इस बात की भविष्यवाणी खुद की है कि वो फिर से पुर्नजन्म लेकर आयेंगे। अपने इस लेख में हम जानेंगे कि कब होगा गरु साहिब का अवतरण.. और कैसे वो सिख धर्म को बनायेंगे दुनिया का सबसे मजबूत धर्म।
गुरु साहिब ने 19 साल की उम्र में पहला युद्ध लड़ा
सिखों के दसवें गुरु गुरू गोविंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 में नौवें गुरु तेग बहादुर जी के यहां पटना में जन्मे थे। पटना में जन्में होने के कारण पांच अकाल तख्त में एक तख्त पटना साहिब में भी मौजूद है। गुरु साहिब ने मात्र 9 साल की उम्र में गुरु की उपाधि ली थी, क्योंकि उनके पिता का मुगल शासक औरंगजेब ने कत्ल करवा दिया था। गुरु साहिब ने 19 साल की उम्र में पहला युद्ध लड़ा था। वो आध्यात्म के साथ युद्ध कला में भी कुशल थे। लेकिन धर्म की रक्षा के लिए वो आजीवन मुगलो के खिलाफ युद्ध लड़ते रहे थे, लेकिन जब भी वो अपने दरबार में होते तो वो संगत को अलग अलग तरह के ज्ञान देते थे।
गुरु साहिब के ज्ञान का संग्रहण 100 साखी में मौजूद है। गुरु साहिब ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को सिखो का 11वा गुरु घोषित कर दिया था, और ये भी घोषणा की कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के बाद कोई भी मानव रूप में गुरु नहीं होगा.. लेकिन 100 साखी में गुरु साहिब ने खुद बताया है कि वो सिखों के 12 गुरु के रूप में धरती पर अवतरण लेंगे.. और उनके आने के बाद से खालसा राज स्थापित होगा.,जो 14 हजार सालों तक रहेगा।
कब आयेंगे गुरु साहिब
गुरु साहिब एक बार भाई मनी सिंह समेत कई संगतों को गुरु शिक्षा दे रहे थे, तब भाई मनी सिंह ने उनसे पूछा था अगर उनकी संगत को उनके फिर से दर्शन करने की इच्छा हुई..तो फिर वो गुरू साहिब से कब मिलेंगे.. जिस पर पहली बार गुरु साहिब ने सबसे बड़ा रहस्य उजागर करने हुए बताया कि जब धरती अकाल से पूरी तरह से त्रस्त हो जायेगी.. चारो तरफ धर्म का विनाश हो चुका होगा..जब मानवता पूरी तरह से समाप्त होने के कगार पर होगी.. तब वो अमृतसर की पवित्र धरती पर अपने 12 वे अवतार के रूप में जन्मेंगे।
हालांकि उस वक्त गुरु साहिब को पहचानना आसान नहीं होगा.. गुरु साहिब का वापिस अवतरण होने का एक ही मुख्य कारण होगा.. वो उन 500 गुप्त सिखों के साथ मिलकर खालसा धर्म को फिर से स्थापित करेंगे, ये 500 सिख आज भी गुप्त रूप से पहाड़ो में रहते है, जो बेहद आध्यत्मिक और शक्तिशाली है औऱ गुरु साहिब के 12वें अवतरण का इंतजार कर रहे है। गुरु साहिब ने सौ साखी में बताया है कि सच्चा सिख वहीं होगा जो 6 विकारों से खुद को अलग कर लेगा, तभी गुरु जी के दर्शन संभव होगा। जो सिख सौ साखी में लिखे नियमो के अनुसार रहेगा. महाप्रलय में भी गुरु साहिब उन्ही सिखों के साथ होंगे।
जब होगा खालसा का शासन
गुरु साहिब ने बताया कि एक वक्त ऐसा आयेगा, जब रूस और चीन दोनो मिलकर भारत पर हमला करेंगे, जिसमें काफी जान माल की हानी होगी। ऐसे समय में सबसे मजबूती से खड़ी होने वाली सेना सिखो की खालसा सेना ही होगी.. जिसके करीब 2.5 लाख सैनिक शहीद हो जायेंगे, लेकिन फिर भी अपनी बहादुरी और हौंसले से खालसा सेना रूस औऱ चीन को हरा देंगे।
औऱ फिर भारत में खालसा राज स्थापित होगा.. ये राज करीब 14 हजार सालों तक रहेगा। ये राज स्थापित करने वाले शासल का नाम होगा दीलिप सिंह.. जो उस वक्त बचे भारतीय को अमृत चखने के लिए प्रेरित करेगा.. औऱ सभी अमृत चख कर खालसा के ही अनुयायी हो जायेंगे। उस वक्त नांदेड़ साहिब में दबा हुआ खजाना सामने आयेगा जिससे कोई भी खालसा कभी भूखा नहीं रहेगा.. कोई गरीब नही रहेगा। गुरु साहिब के सौ साखी में कही गई बातें प्रमाण है कि संसार में खालसा राज स्थापित होगा..गुरु साहिब फिर से लौटेंगे, और तब चारो तरफ खालसा की ही धूम होगी।






























