Tamil Nadu BJP Candidate List: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की कैंडिडेट लिस्ट ने सियासी हलचल तेज कर दी है। पार्टी ने 27 उम्मीदवारों की सूची जारी की, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि राज्य में बीजेपी का बड़ा चेहरा माने जाने वाले के. अन्नामलाई का नाम इसमें शामिल नहीं है।
इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या पार्टी ने अन्नामलाई को साइडलाइन कर दिया है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति काम कर रही है।
लिस्ट में बड़े चेहरे, फिर भी अन्नामलाई गायब | Tamil Nadu BJP Candidate List
बीजेपी ने अपनी सूची में कई बड़े नामों पर दांव खेला है। इनमें तमिलिसाई सुंदरराजन, एल. मुरुगन, वनाथी श्रीनिवासन और नैनार नागेंद्रन जैसे चेहरे शामिल हैं। इतने बड़े नेताओं को मैदान में उतारने के बावजूद अन्नामलाई का नाम न होना कई सवाल खड़े कर रहा है, खासकर तब जब उन्हें राज्य में बीजेपी का सबसे प्रभावी चेहरा माना जाता है।
अन्नामलाई ने दी बधाई, लेकिन सवाल बरकरार
लिस्ट जारी होने के बाद अन्नामलाई ने सोशल मीडिया पर सभी उम्मीदवारों को बधाई दी और कहा कि वह चुनाव प्रचार में पूरी ताकत से जुटेंगे। हालांकि उनके इस बयान के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि आखिर वह खुद चुनाव क्यों नहीं लड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह फैसला सिर्फ सामान्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई परतें हो सकती हैं।
क्या है अन्नामलाई की ताकत?
के. अन्नामलाई को तमिलनाडु में बीजेपी को मजबूत करने का बड़ा श्रेय दिया जाता है। वह पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे हैं और नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर राजनीति में आए। जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है और वह भीड़ जुटाने में माहिर नेता हैं। इसके अलावा उन्हें पीएम मोदी और अमित शाह के करीबी नेताओं में गिना जाता है। अन्नामलाई की खासियत यह भी है कि वह डीएमके और एआईएडीएमके दोनों के खिलाफ खुलकर आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं।
टिकट न मिलने के पीछे क्या है वजह?
बीजेपी के इस फैसले को रणनीतिक बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी नहीं चाहती कि उसकी सहयोगी AIADMK के साथ कोई तनाव बढ़े। दरअसल, अन्नामलाई और AIADMK के बीच पहले से ही रिश्ते ज्यादा सहज नहीं रहे हैं। यहां तक कि अन्नामलाई गठबंधन के खिलाफ भी नजर आए थे। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि सहयोगी दल के दबाव में यह फैसला लिया गया।
सीट शेयरिंग और अंदरूनी खींचतान
तमिलनाडु में NDA के सीट शेयरिंग फॉर्मूले के तहत बीजेपी को 27 सीटें मिली हैं, लेकिन पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘कमल’ पर कुल 33 उम्मीदवार मैदान में होंगे। बताया जा रहा है कि अन्नामलाई को जिन सीटों कोयंबटूर नॉर्थ या सिंगानल्लूर से चुनाव लड़ना था, वे सीटें AIADMK के हिस्से में चली गईं। इससे उनका चुनाव लड़ना मुश्किल हो गया।
सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई खुद राज्य की राजनीति में सक्रिय रहना चाहते हैं, जबकि पार्टी के कुछ नेता उन्हें केंद्र की राजनीति में भेजने के पक्ष में हैं। इस मुद्दे को लेकर भी अंदरखाने मतभेद रहे हैं।
स्टार प्रचारक की भूमिका में अन्नामलाई
अन्नामलाई ने खुद स्पष्ट किया है कि उनका टिकट “काटा” नहीं गया है। उन्हें तमिलनाडु के साथ-साथ केरल और पुडुचेरी में भी स्टार प्रचारक बनाया गया है। वह फिलहाल पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं और चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले हैं।
29 अप्रैल को वोटिंग, नजरें अब नतीजों पर
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए 29 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में बीजेपी की रणनीति और अन्नामलाई की भूमिका पर सबकी नजर बनी हुई है।





























