Mainpuri Sita Devi: कहते हैं कलयुग में ईमानदारी दम तोड़ चुकी है जहां चारों तरफ बेईमानी का अंधेरा है। और इस कलयुगी दुनिया में ऐसी ईमानदारी, अमावस्या की रात में चाँद ढूँढने जैसा ही है। लेकिन अमावस्या की रात में चाँद जैसी चमक रखने वाले ईमानदार आज भी ज़िंदा हैं। ईमानदारी का एक दीया मैनपुरी में जला है। तो चलिए इस लेख के जरिए उस महिला के बारे में बताते है जिसके लिए करोड़ों की माया भी उसके ईमान से बड़ी नहीं थी।
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मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश मैनपुरी (Mainpuri) जिले के छोटे से गांव देवगंज की रहने वाली सीता देवी (Sita Devi) इन दिनों चर्चा में हैं। वजह है उनकी मिसाल पेश करने वाली ईमानदारी। जहाँ लोग रातों-रात अमीर बनने का सपना देखते हैं, वहीं सीता देवी के बैंक खाते में जब अचानक करीब 10 करोड़ रुपये आए, तो उन्होंने लालच को अपने पास फटकने भी नहीं दिया और एक रुपया तक निकालने से साफ़ मना कर दिया। सीता देवी ने परिवार वालों से भी कह दिया कि जब तक सच्चाई पता नहीं चलती, तब तक इस पैसे को हाथ नहीं लगाया जाएगा। आज के समय में जहां छोटी रकम के लिए लोग गलत रास्ता अपना लेते हैं, वहां सीता देवी का यह कदम लोगों के लिए मिसाल बन गया।
कैसे हुआ पूरा मामला?
24 मार्च को सीता देवी (Sita Devi) अपने बेटे के साथ बैंक ऑफ इंडिया की सुल्तानगंज शाखा में बैलेंस चेक करने पहुंचीं। जब उन्होंने एटीएम से बैलेंस देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनकी आँखों के सामने 9,99,49,588 की विशाल राशि चमक रही थी। पहले तो उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने तसल्ली के लिए दोबारा बैलेंस चेक किया। फिर भी वही रकम दिखी। इसके बाद उन्होंने इसका वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो में उन्होंने साफ कहा कि उन्हें यह पैसा नहीं चाहिए और जिसका भी है, वह वापस ले जाए।
वीडियो हुआ वायरल, पहुंचा RBI तक
सीता देवी (Sita Devi) का वीडियो तेजी से वायरल हो गया और मामला रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) तक पहुंच गया। इसके बाद बैंक को जांच के निर्देश दिए गए। बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी गांव पहुंचे और खाते की पूरी जांच की। जांच में पता चला कि यह बैंक के सिस्टम में आई एक तकनीकी खराबी (Technical Glitch) थी। असल में खाते में ऐसी कोई बड़ी रकम नहीं आई थी, और न ही कोई संदिग्ध लेन-देन हुआ था। बल्कि सॉफ्टवेयर एरर की वजह से बैलेंस गलत दिखाई दे रहा था। बैंक अधिकारियों ने मामले को सुलझा लिया और सीता देवी के खाते को फिर से सामान्य कर दिया।
आखिर क्यों दिख रहे थे 10 करोड़?
बैंक अधिकारी अग्रणी जिला प्रबंधक रामचंद्र साहा द्वारा मुताबिक बताया जा रहा है कि यह कोई रहस्यमयी ट्रांजैक्शन नहीं बल्कि एक तकनीकी गड़बड़ी थी। दरअसल, सीता देवी (Sita Devi) ने पहले भैंस खरीदने के लिए बैंक से कर्ज लिया था। उसी लोन अकाउंट पर ‘लियन’ (Lien) की तकनीकी एंट्री होने के कारण सिस्टम में इतनी बड़ी रकम दिखने लगी थी। हकीकत यह थी कि उनके खाते में असल जमा राशि मात्र 61,512 ही थी।
ईमानदारी की हो रही तारीफ
इस पूरे मामले में सबसे खास बात सीता देवी (Sita Devi) की ईमानदारी रही। उन्होंने चाहतीं तो पैसे निकालने की कोशिश कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। आज सोशल मीडिया पर लोग उनकी खूब तारीफ कर रहे हैं और उन्हें एक सच्ची व ईमानदार महिला की मिसाल बता रहे हैं। आज के दौर में जहाँ लोग रातों-रात अमीर बनने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं, वहाँ सीता देवी की यह ईमानदारी हमें याद दिलाती है कि किरदार से बड़ी कोई दौलत नहीं होती। उनकी यह कहानी न केवल मैनपुरी बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है।





























