Raghav Chadha Slams Telecom Companies: देश में मोबाइल यूजर्स से जुड़े एक अहम मुद्दे को राज्यसभा में जोर-शोर से उठाया गया। आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद Raghav Chadha ने टेलीकॉम कंपनियों की उन नीतियों पर सवाल खड़े किए, जिनका सीधा असर आम ग्राहकों की जेब और सुविधा दोनों पर पड़ता है। मामला है डेली डेटा एक्सपायर सिस्टम और 28 दिन वाले रिचार्ज प्लान्स का।
डेली डेटा एक्सपायर: यूजर्स के नुकसान का सौदा? (Raghav Chadha Slams Telecom Companies)
राघव चड्ढा ने बताया कि आजकल ज्यादातर टेलीकॉम कंपनियां अपने प्लान्स में रोजाना 1.5GB, 2GB या 3GB डेटा देती हैं। यह डेटा हर 24 घंटे में रीसेट हो जाता है। समस्या तब होती है जब यूजर पूरा डेटा इस्तेमाल नहीं कर पाता। बचा हुआ डेटा मिडनाइट के बाद अपने आप खत्म हो जाता है। यानी जिस डेटा के लिए पैसे दिए गए, उसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी उन्होंने यही बात रखी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी ने 2GB में से सिर्फ 1.5GB ही इस्तेमाल किया, तो बाकी 0.5GB बिना किसी रिफंड या रोलओवर के खत्म हो जाता है। उनके मुताबिक, यह मौजूदा सिस्टम की सबसे बड़ी कमी है।
Telecom companies offer Recharge Plans with ‘𝐃𝐚𝐢𝐥𝐲 𝐃𝐚𝐭𝐚 𝐋𝐢𝐦𝐢𝐭𝐬’ like 1.5GB, 2GB or 3GB per day, resetting every 24 hours. Any Unused Data EXPIRES at midnight, despite being fully paid for.
𝐘𝐨𝐮 𝐚𝐫𝐞 𝐛𝐢𝐥𝐥𝐞𝐝 𝐟𝐨𝐫 𝟐𝐆𝐁. 𝐘𝐨𝐮 𝐮𝐬𝐞 𝟏.𝟓𝐆𝐁. 𝐓𝐡𝐞… pic.twitter.com/sWiJbKj2AV
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) March 23, 2026
क्या हो सकते हैं बेहतर विकल्प?
- डेटा रोलओवर की सुविधा
चड्ढा का कहना है कि बचा हुआ डेटा अगले दिन में जुड़ना चाहिए। इससे यूजर्स को यह मजबूरी नहीं रहेगी कि वे हर दिन पूरा डेटा खत्म करें। - अगले रिचार्ज में एडजस्टमेंट
अगर कोई यूजर बार-बार डेटा पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है, तो उस बची हुई वैल्यू को अगले रिचार्ज में डिस्काउंट के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। - डेटा ट्रांसफर का अधिकार
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बचा हुआ डेटा यूजर की डिजिटल संपत्ति माना जाए। यूजर चाहें तो इसे अपने दोस्तों या परिवार को ट्रांसफर कर सकें।
28 दिन वाले प्लान को बताया ‘लूट’
राघव चड्ढा ने 28 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान्स पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि इन प्लान्स के कारण ग्राहकों को साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त खर्च बढ़ता है। उन्होंने मांग की कि सभी टेलीकॉम कंपनियां 30 या 31 दिन की वैधता वाले प्लान्स को लागू करें और 28 दिन वाले सिस्टम को खत्म किया जाए।
राघव चड्डा तो मानो कसम खा चुके हैं कि मिडिल क्लास वालों की ज़िंदगी बदल के ही रहेंगे…
मान लीजिए महीने की शुरुआत में आपने 20 लीटर पेट्रोल भरवाया और महीने के अंत तक सिर्फ 15 लीटर ही इस्तेमाल हुआ।
तो क्या पेट्रोल पंप वाला आकर बोलेगा, “5 लीटर वापस करो, इसकी वैलिडिटी खत्म हो गई”?… pic.twitter.com/TrnWplHPzT
— Shashi Kant Gangwar (@imskg2303) March 28, 2026
सरकार और रेगुलेटर का क्या रुख?
केंद्रीय संचार मंत्री Jyotiraditya Scindia ने इस मामले पर कहा कि Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने पहले ही नियम तय किए हैं। TRAI के अनुसार, हर टेलीकॉम ऑपरेटर को अपने प्लान्स में कम से कम एक 30 दिन की वैलिडिटी वाला विकल्प देना जरूरी है। 2022 के टैरिफ आदेश में यह साफ किया गया था कि ग्राहकों को 28 दिन वाले प्लान्स के अलावा सही विकल्प मिलना चाहिए।
इनकमिंग कॉल और नंबर वैलिडिटी पर भी सुझाव
चड्ढा ने यह भी कहा कि आखिरी रिचार्ज के बाद कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल और SMS चालू रहने चाहिए। साथ ही, किसी नंबर को बंद करने से पहले तीन साल का ग्रेस पीरियड दिया जाना चाहिए। हालांकि मौजूदा नियमों के मुताबिक, 90 दिनों तक इस्तेमाल न होने पर भी प्रीपेड नंबर तुरंत बंद नहीं किया जाता।
टेलीकॉम कंपनियों को कितनी छूट?
सिंधिया ने स्पष्ट किया कि टेलीकॉम सेक्टर फिलहाल “टैरिफ फॉरबियरेंस” के तहत काम कर रहा है। इसका मतलब है कि कंपनियों को अपने प्लान्स, कीमत और शर्तें तय करने की आजादी है। हालांकि, Telecom Regulatory Authority of India इस बात पर नजर रखता है कि कहीं कंपनियां अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल तो नहीं कर रहीं।



























