भाजपा ने पांच राज्यों के चुनावों में खर्च किए 344 करोड़ रुपये, 2017 से 58 फ़ीसदी अधिक

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फकीरों की पार्टी भाजपा ने पांच राज्यों के चुनावों में ख़र्च किए सबसे अधिक पैसे

मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, स्किल इंडिया, सरकारी योजनाएं , विभिन्न चुनाव के प्रचार-प्रसार और खास कर देश भर के पेट्रोल पंप पर आपको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हस्ते हुए तस्वीर जरूर याद होगी। देश की जनता को यह भी याद होगा जब प्रधानमंत्री ने खुद को फ़क़ीर और भाजपा को फकीरों की पार्टी बताया था। लेकिन भाजपा का आप दोहरा चरित्र इससे समझ सकते है कि निर्वाचन आयोग को हाल ही में दी गई चुनावी ख़र्च की जानकारी में भाजपा ने बताया है कि उसने इस साल पांच राज्यों (उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड) में हुए चुनावों में 344.27 करोड़ रुपये ख़र्च किए, जबकि पांच साल पहले इन्हीं राज्यों में पार्टी ने 218.26 करोड़ रुपये खर्च किए थे। हालांकि, कांग्रेस ने भी 2017 की तुलना में इस बार इन राज्यों में 80 फीसदी अधिक 194.80 करोड़ रुपये ख़र्च किए है। देश की जनता भी अब सोच में पङ गई होगी की भाजपा और देश की सबसे पूरानी पार्टी कांग्रेस की ये कौन सी फकीरी है भाई। राजनीति दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश रसजनीतिक पार्टियों के लिए सबसे महंगा राज्य बन गया है। भाजपा ने 344.27 करोड़ रुपये में से लगभग 221 करोड़ रुपये जो की सबसे ज्यादा है, उत्तर प्रदेश चुनाव में ही खर्च किए हैं।

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भाजपा ने विज्ञापनों पर खर्च किए 713.20 करोड़ रुपये

बता दें कि राजनीतिक पार्टियों को विधानसभा चुनावों के 75 दिनों और लोकसभा चुनावों के 90 दिनों के भीतर चुनाव आयोग को अपना चुनावी खर्च बताना होता है। 2020 की ‘दी वायर’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक नरेंद्र मोदी सरकार ने खुद को बढ़ावा देने के लिए अखबारों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और होर्डिंग्स आदि में विज्ञापनों के माध्यम से करदाताओं के लगभग 713.20 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इसका सबसे बड़ा प्रूफ है की, अपने आप को चौकीदार बताने वाले नरेंद्र मोदी की तस्वीरें पब्लिसिटी के लिए हर मीडिया चैनलों, विज्ञापनों या रास्ते पर लगा मिलेगा। यहां एक सवाल तो जनता के मन में भी आता होगा कि इस चौकीदार, फ़क़ीर इंसान की पार्टी के पास आखिर इतना पैसा आया कहां से ? इस करोड़ों रुपये की पब्लिसिटी के लिए पैसे किसकी जेब से आ रहे है? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी 2019 लोकसभा चुनाव से पहले ये सवाल भाजपा और मोदी सरकार से पूछी थी। जवाब तो सरकार ने उस समय भी नहीं दिया था और अभी भी नहीं देगी। आपको 2014 में प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया वो भाषण भी याद होगा जिसमे उन्होंने 15-20 लाख रुपये हर भारतीय के बैंक खातों में देने का वादा किया था, पर वो वादा तो गरीब जनता के लिए नहीं पूरा हो सका, लेकिन देश के अमीरों के लिए यह वादा मोदी सरकार ने जरूर पूरा किया। आप इसका इससे अनुमान लगा सकते है कि देश के अंबानी और अडानी का नाम अब दुनिया के अमीरों में शुमार हो गया है।

चुनावी खर्च होते हैं भ्रष्टाचार की जड़

विशेषज्ञों के अनुसार जो इतने बड़े बड़े चुनावी खर्च होते हैं वो भ्रष्टाचार की जड़ है। जब ये चुनावी खर्च भ्रष्टाचार की जड़ है तो भाजपा इस पेड़ की सबसे बड़ी टहनी बन चुकी है। क्यूंकि 2014 के बाद से भाजपा एवं मोदी सरकार दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्र की सबसे आमिर पार्टी बन चुकी है। दूसरी तरफ भाजपा के नाम ही चुनाव तथा प्रचार प्रसार में सबसे ज्यादा पैसे खर्च करने का तमगा भी लगा हुआ है। देश की जनता को इससे जरूर समझ जाना चाहिए की हमारे चौकीदार किसकी पूंजी के रखवाले हैं।

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