गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा पर SC का सुनवाई से इनकार, कहा- जांच कर रही सरकार

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 03 फ़रवरी 2021, 05:30 AM Updated: 03 फ़रवरी 2021, 05:30 AM
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देश में इन दिनों किसान आंदोलन का मुद्दा गरमाया हुआ है। विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर है। बीते गणतंत्र दिवस को किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकाला था, जिसमें हिंसा और तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। कुछ उपद्रवी तत्वों ने ऐतिहासिक लाल किले पर झंडा भी फहराया था।

हालांकि, किसान नेताओं ने आंदोलन के दौरान हिंसा फैलाने वालों पर कार्रवाई की मांग की थी।गणतंत्र दिवस के दिन राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसपर देश के सर्वोच्च न्यायालय ने आज बुधवार को सुनवाई (Supreme Court on Red Fort Violence) से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया कि इस मामले में उनके हस्तक्षेप की जरुरत नहीं है, क्योंकि जांच चल रही है।

हमारे हस्तक्षेप की जरुरत नहीं

चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि मामले में अभी हमारे हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है, हम याचिका पर सुनवाई नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, जांच का नतीजा एक तरफा निकलेगा ऐसा सोचना सही नहीं है। चीफ जस्टिस की ओर से कहा गया कि सरकार जांच कर रही है। हमने पीएम का बयान भी सुना है तो आप सरकार के पास रिप्रेंजनटेशन दें। इस मामले पर प्रतिक्रिया देने के बाद उन्होंने याचिकाकर्ताओं को याचिका वापस लेने की मंजूरी दी।

लाल किले पर झंडा लगाने वाले की नहीं हुई है गिरफ्तारी

बता दें, गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में हिंसा हुई थी। जिसमें 394 पुलिसकर्मी घायल हुए थे और 30 पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचा था। लाल किले पर धार्मिक झंडा लगाने वाले दीप सिद्धू को किसानों ने बीजेपी का कार्यकर्ता बताया था। पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत बीजेपी के कई बड़े नेताओं के साथ उसकी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। लेकिन इस घटना के बाद से वह फरार बताया जा रहा है। अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

गौरतलब है कि दिल्ली के बॉर्डरों पर किसान पिछले 70 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं और मोदी सरकार से कृषि कानूनों को वापस करने की मांग कर रहे हैं। खबरों के मुताबिक अभी तक 150 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है। बताया जा रहा है कि कई राज्यों में किसान आंदोलन के मामले को लेकर महापंचायत हो रहे हैं। जिसके बाद और भी ज्यादा संख्या में किसानों के जुड़ने की संभावना है।

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