Zelenskyy India Visit 2025: पुतिन के बाद अब ज़ेलेंस्की? दिल्ली में हो सकता है यूक्रेन के राष्ट्रपति का दौरा

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 08 दिसम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 08 दिसम्बर 2025, 05:30 AM
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Zelenskyy India Visit 2025: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सफल दिल्ली दौरे के बाद भारत ने विदेश नीति में अपनी अगली सधी हुई चाल खेलने की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत अब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर ज़ेलेंस्की को दिल्ली में आमंत्रित करने की योजना बना रहा है। कूटनीतिक हलकों में इसे भारत की नीति का बैलेंसिंग एक्ट कहा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह दौरा जनवरी 2026 में हो सकता है, हालांकि अभी तक तारीख तय नहीं हुई है।

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भारत-यूक्रेन संपर्क: पुतिन दौरे से पहले शुरू हुई तैयारी (Zelenskyy India Visit 2025)

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारत कई हफ्तों से यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के संपर्क में है। दिलचस्प बात यह है कि यह पहल पुतिन के दिल्ली दौरे से पहले ही शुरू हो चुकी थी। भारतीय और यूक्रेनी अधिकारियों के बीच लगातार बातचीत चल रही है ताकि दौरा सफल और संतुलित रूप से संपन्न हो सके।

इस कदम के पीछे भारत की विदेश नीति साफ दिखती है देश यूक्रेन-रूस युद्ध के दोनों पक्षों के साथ जुड़े रहने की कोशिश में जुटा है। यही कारण है कि जुलाई 2024 में पीएम मोदी ने मॉस्को जाकर पुतिन से मुलाकात की, और सिर्फ एक महीने बाद ही उन्होंने यूक्रेन का दौरा किया।

दौरे का समय और दायरा: कई कारकों पर निर्भर

ज़ेलेंस्की के संभावित दौरे का समय और स्वरूप कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगा। सबसे अहम है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना का विकास और युद्ध के मैदान की स्थिति। इसके अलावा, यूक्रेन की घरेलू राजनीति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ज़ेलेंस्की की सरकार फिलहाल एक बड़े भ्रष्टाचार घोटाले में फंसी हुई है, जिससे दबाव बढ़ा हुआ है। इतिहास में यह ध्यान देने योग्य है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति अब तक केवल तीन बार भारत आए हैं 1992, 2002 और 2012। ऐसे में ज़ेलेंस्की का दौरा एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटना माना जा रहा है।

पुतिन यात्रा और यूरोप का दबाव

पुतिन की भारत यात्रा पर यूरोप की कड़ी नजर रही थी। कई यूरोपीय देशों ने भारत से मॉस्को पर दबाव डालने का आग्रह किया ताकि युद्ध खत्म हो। भारत ने लगातार स्पष्ट किया कि बातचीत और कूटनीति ही समाधान का रास्ता हैं। पीएम मोदी ने पुतिन से कहा कि भारत तटस्थ नहीं है, बल्कि शांति के पक्ष में है। यही दृष्टिकोण अब ज़ेलेंस्की के दौरे में भी लागू होने की संभावना है।

मोदी-जेलेंस्की संपर्क और भारत की नीति

फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से भारत लगातार दोनों पक्षों के संपर्क में रहा है। पीएम मोदी और ज़ेलेंस्की के बीच कम से कम आठ बार फोन पर बातचीत हुई और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर चार बार आमने-सामने मुलाकात हुई। अगस्त 2024 में यूक्रेन दौरे पर पीएम मोदी ने स्पष्ट किया, “हम युद्ध से दूर हैं, लेकिन न्यूट्रल नहीं। हम शांति के पक्ष में हैं। हम बुद्ध और गांधी की धरती से शांति का संदेश लेकर आए हैं।”

अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक प्रभाव

यूक्रेन-रूस युद्ध का भारत पर सीधा असर भी पड़ा है। रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी पेनाल्टी टैरिफ लगा दिया है। इसके बावजूद भारत अपने बैलेंसिंग एक्ट में लगे हुए हैं, जिससे देश की वैश्विक छवि मजबूत हो रही है।

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