Satyapal Malik Corruption Case: सत्यपाल मलिक की मौत के बाद बढ़ा विवाद, 300 करोड़ रिश्वत मामले में क्या होगा आगे?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 07 Aug 2025, 12:00 AM | Updated: 07 Aug 2025, 12:00 AM

Satyapal Malik Corruption Case: जम्मू-कश्मीर के पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक की अचानक हुई मौत ने न सिर्फ उनके परिवार को झकझोर दिया, बल्कि उनके खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामले को भी फिर से चर्चा में ला दिया है। सत्यपाल मलिक पर आरोप था कि जब वह जम्मू-कश्मीर के गवर्नर थे, तो उन्होंने किरू हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से जुड़ी गड़बड़ी के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत ली।

सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है, और मलिक समेत सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। हालांकि, अब जब मलिक का निधन हो चुका है, तो सवाल उठते हैं कि इस केस का क्या होगा? क्या उनके खिलाफ चल रही जांच पूरी हो पाएगी, या अब सब कुछ ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

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क्या था पूरा मामला? (Satyapal Malik Corruption Case)

सत्यपाल मलिक जब जम्मू और कश्मीर के गवर्नर थे, तब 2200 करोड़ रुपये के किरू हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से जुड़ी एक विवादास्पद स्थिति सामने आई। आरोप था कि इस प्रोजेक्ट के ठेके के लिए रिश्वत का लेन-देन किया जा रहा था। विशेष रूप से, एक ई-टेंडरिंग प्रक्रिया को नजरअंदाज करके पटेल इंजीनियरिंग को ठेका दे दिया गया था, जबकि प्रक्रिया के अनुसार यह ठेका किसी अन्य कंपनी को जाना चाहिए था।

सत्यपाल मलिक ने खुद ही इस मामले की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाई थी और दावा किया था कि उन्होंने इस मामले में 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश ठुकरा दी थी। इस भ्रष्टाचार की शिकायत सीबीआई को दी गई, और जांच शुरू की गई। हालांकि, सत्यपाल मलिक का दावा था कि उनका तबादला होने के बाद, सरकार ने टेंडर को फिर से मंजूरी दे दी।

सत्यपाल मलिक की भूमिका: एक व्हिसलब्लोअर या कुछ और?

मलिक का दावा था कि उन्हें दो फाइलों के पास करने के लिए रिश्वत की पेशकश की गई। एक फाइल रिलायंस समूह से जुड़ी हुई थी, और दूसरी आरएसएस के एक पदाधिकारी से संबंधित थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने इन दोनों प्रस्तावों को ठुकरा दिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखी।

मलिक का कहना था कि किरू जलविद्युत परियोजना में गड़बड़ियां थीं, और उन्होंने ही टेंडर रद्द कर दिया। उन्होंने खुलासा किया कि इस परियोजना को लेकर सिविल वर्क के ठेके में ई-टेंडरिंग के नियमों का पालन नहीं किया गया और निर्णय का पालन करने के बजाय, ठेका पटेल इंजीनियरिंग को दे दिया गया।

जब सत्यपाल मलिक ने इस मामले को लेकर आवाज उठाई, तो वे एक व्हिसलब्लोअर के रूप में सामने आए, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, सीबीआई ने उन्हीं को आरोपी बना दिया। क्या मलिक सच में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे थे, या वे भी उस सिस्टम का हिस्सा थे जिसे उन्होंने उजागर किया था? यह सवाल अब तक बना हुआ है।

मामले में CBI की जांच और कार्रवाई

सत्यपाल मलिक द्वारा मामले का खुलासा करने के बाद, सीबीआई ने 2019 में जांच शुरू की। इसके बाद, 2022 में मामले में एफआईआर दर्ज की गई। 2024 में सीबीआई ने सत्यपाल मलिक और उनके सहयोगियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में यह आरोप लगाए गए कि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं थीं और कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया था।

सीबीआई की जांच में यह सामने आया कि मलिक और उनके सहयोगियों ने नियमों को तोड़ा और प्रक्रियाओं में गड़बड़ियां कीं। हालांकि, जब मलिक का निधन हुआ, तो उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई अपने अंतिम चरण में थी।

सत्यपाल मलिक का दावा और उनकी अंतिम पोस्ट

2025 में मलिक का स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद, उन्हें दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ICU में भर्ती होने के दौरान उन्होंने एक भावुक पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने ही भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष किया, लेकिन अब उन्हीं पर आरोप लगाए जा रहे थे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनके खिलाफ यह सब राजनीतिक साजिश के तहत हो रहा था।

मलिक ने बताया कि उन्हें रिश्वत देने की पेशकश हुई थी, और उन्होंने इसे ठुकरा दिया। उनका यह भी कहना था कि उनके टेंडर रद्द करने के निर्णय ने कुछ लोगों को परेशान कर दिया, और उन्हीं के खिलाफ आरोप लगा दिए गए।

क्या होगा अब?

सत्यपाल मलिक के निधन के बाद अब यह सवाल उठता है कि उनके खिलाफ चल रही सीबीआई जांच का क्या होगा। भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत, किसी आरोपी की मृत्यु होने पर उसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रुक जाती है। इसका मतलब है कि मलिक के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस अब बंद हो जाएगा।

लेकिन, मलिक के अलावा जिन अन्य आरोपियों के नाम चार्जशीट में शामिल हैं, उनके खिलाफ जांच जारी रहेगी। इसमें सीवीपीपीपीएल के अधिकारी, पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड के अधिकारियों और मलिक के सहयोगी शामिल हैं। यह स्पष्ट है कि सत्यपाल मलिक के खिलाफ अब व्यक्तिगत जिम्मेदारी का कोई सवाल नहीं रहेगा, लेकिन उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे और उनके खिलाफ पेश की गई आरोपों की जांच को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता।

व्हिसलब्लोअर के रूप में उनका योगदान

आपको बता दें, सत्यपाल मलिक को व्हिसलब्लोअर के तौर पर पहचान मिली, जिन्होंने सत्ता और भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत दिखाई। उन्होंने ना केवल रिश्वत की पेशकश को नकारा, बल्कि भ्रष्टाचार के आरोपों को उजागर किया। हालांकि, यह भी देखा गया कि जब उनके अपने खिलाफ आरोप लगाए गए, तो उन पर राजनीतिक षड्यंत्र के आरोप लगाए गए।

उनकी मृत्यु के बाद, अब यह सवाल उठता है कि क्या उन्होंने सचमुच भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी, या वे उसी सिस्टम का हिस्सा थे जो उन्होंने उजागर किया। मलिक का निधन इस मामले में कई अधूरे सवाल छोड़ गया, जिनका उत्तर शायद अब कभी नहीं मिलेगा।

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