Ind vs Pak Tension: 1971 और 2025 में अंतर, सीमा पर सीजफायर के बाद क्यों उठ रहे हैं सवाल?

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 12 मई 2025, 12:00 AM 🔄 Updated: 12 मई 2025, 12:00 AM
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Ind vs Pak Tension: कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते का स्वागत किया है। उनका मानना है कि शांति का रास्ता ही इस समय भारत के लिए सबसे उपयुक्त है। थरूर ने कहा कि 1971 के युद्ध और वर्तमान समय की परिस्थितियों में बड़ा अंतर है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था, तब इंदिरा गांधी ने उपमहाद्वीप का नक्शा बदल दिया था, लेकिन वह लड़ाई नैतिक थी, क्योंकि बांग्लादेश को मुक्त कराना एक स्पष्ट और महत्त्वपूर्ण लक्ष्य था।

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1971 का युद्ध और आज की स्थिति में अंतर- Ind vs Pak Tension

शशि थरूर ने कहा कि 1971 में भारत ने बांग्लादेश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए युद्ध लड़ा था, और उस समय का संघर्ष नैतिक और आवश्यक था। उन्होंने कहा कि 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच जारी संघर्ष एक स्पष्ट लक्ष्य के बिना था। पाकिस्तान पर लगातार हमले करते रहना कोई उद्देश्य नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक युद्ध के ठोस कारण नहीं होते, तब तक इसे जारी नहीं रखना चाहिए।

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उनका यह भी कहना था कि भारत के लोग शांति के हकदार हैं। उन्होंने पुलवामा और कश्मीर में हुए आतंकी हमलों का हवाला देते हुए कहा कि हमारे लोग बहुत कुछ सह चुके हैं। शशि थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार आतंकवादियों को सबक सिखाने में कामयाब रही है, लेकिन अब इस संघर्ष को बढ़ाने का कोई उद्देश्य नहीं है।

आतंकवादियों को पकड़ने की सरकार की कोशिश जारी

थरूर ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि भारत सरकार पहलगाम आतंकवादी हमले में शामिल आतंकवादियों को पकड़ने के प्रयासों को जारी रखेगी। यह हमला 26 निर्दोष भारतीयों की जान ले चुका था, और थरूर का मानना है कि आतंकवादियों को पकड़ने के लिए समय और मेहनत लगेगी, लेकिन यह काम होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी को भी निर्दोष भारतीय नागरिकों की हत्या करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम पूरे देश को लंबे समय तक युद्ध के जोखिम में डालें।

1971 की जीत एक महान उपलब्धि

शशि थरूर ने 1971 की जीत को एक महान उपलब्धि बताया, जिसे भारतीयों के रूप में गर्व के साथ याद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने उस समय उपमहाद्वीप का नक्शा फिर से लिखा था और बांग्लादेश को स्वतंत्रता दिलाई थी। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि 2025 में पाकिस्तान की स्थिति और शक्ति पूरी तरह से बदल चुकी है। पाकिस्तान के पास आज ऐसे हथियार और सैन्य उपकरण हैं जो युद्ध की स्थितियों को बेहद जटिल बना सकते हैं।

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पाकिस्तान पर सिर्फ गोले दागते रहना कोई स्पष्ट उद्देश्य नहीं

थरूर ने कहा कि बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में भारत ने लोगों को स्वतंत्रता दिलाने के लिए नैतिक लड़ाई लड़ी थी, लेकिन आज पाकिस्तान पर केवल गोलाबारी करना कोई स्पष्ट उद्देश्य नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने 7 मई को पाकिस्तान के खिलाफ कोई संघर्ष शुरू करने के रूप में नहीं देखा था। अगर पाकिस्तान ने बातचीत के लिए आगे कदम नहीं बढ़ाया होता, तो भारत भी इस दिशा में नहीं बढ़ता।

कांग्रेस की इंदिरा गांधी को याद करने की प्रतिक्रिया

कांग्रेस के नेताओं ने युद्ध विराम की खबर आने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तस्वीरें साझा की थीं, जिन्होंने 1971 के युद्ध में भारत को जीत दिलाई थी। इस पोस्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद के सैन्य कदमों की आलोचना के रूप में देखा गया। बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने जवाब देते हुए पूछा कि क्या कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह याद नहीं हैं, और यह सवाल भी उठाया कि 26/11 के आतंकवादी हमलों के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार ने क्या कार्रवाई की थी।

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