Sikhism in Australia: ऑस्ट्रेलिया में सिखों का ऐतिहासिक सफर, 1800 के दशक की शुरुआत में हुआ था आगमन

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 04 Feb 2025, 12:00 AM | Updated: 04 Feb 2025, 12:00 AM

Sikhism in Australia: ऑस्ट्रेलिया में सिखों का आगमन 1800 के दशक की शुरुआत में हुआ था, जब भारतीयों को ब्रिटिश नाविक कैप्टन कुक के जहाज़ के हिस्से के रूप में लाया गया। सबसे पहले दर्ज सिख, दबी सिंह, 1844 में ब्रिसबेन में रह रहे थे। 1880 के दशक के बाद पुरुषों के बड़े समूह ऑस्ट्रेलिया आने लगे, जिनमें अधिकतर पंजाबी किसान, व्यापारी और मज़दूर शामिल थे।

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सिखों ने शुरुआत में गन्ना बागानों, ऊँट परिवहन, सड़क निर्माण और कृषि में काम किया। कई सिखों ने ऊँट चालकों (अफ़गानों) के रूप में ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तानी इलाकों में परिवहन और आपूर्ति में सहायता की। उत्तर पश्चिमी पंजाब के कई मुसलमान भी ऊँट चालकों के रूप में कार्यरत थे।

ब्रिटिश शासन और सिखों का प्रवास- Sikhism in Australia

भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ब्रिटिश उपनिवेश थे, जिससे सिखों को अन्य ब्रिटिश देशों में जाने की स्वतंत्रता थी। 1880 के बाद, सैकड़ों सिख पंजाब के दोआबा क्षेत्र से ऑस्ट्रेलिया आने लगे। उनकी आमदनी से वे पंजाब में ज़मीन खरीदते, मकान बनवाते और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ाते थे।

Sikhism in Australia
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सिखों की बसावट और कार्यक्षेत्र

sikhiwiki द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, प्रारंभिक सिख प्रवासियों ने उत्तरी क्वींसलैंड (केर्न्स, एथर्टन) और न्यू साउथ वेल्स (ग्राफ्टन, बैलिना) के गन्ना बागानों में काम किया। कुछ ने केले के बागानों, फेरीवाले और कृषि श्रमिकों के रूप में भी कार्य किया। वे पूरे ऑस्ट्रेलिया में फैले और विभिन्न नौकरियों में शामिल हुए।

सिखों के प्रमुख कार्यक्षेत्र:

  • गन्ना और केले की खेती (न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड)
  • ऊँट परिवहन (मध्य और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया)
  • फेरीवाले और व्यापारी (विक्टोरिया, दक्षिण और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया)
  • कृषि मजदूर और निर्माण कार्य

सिख धर्म और सांस्कृतिक पहचान

ऑस्ट्रेलिया में सिख धर्म का विस्तार हुआ, और 1978 में पहला गुरुद्वारा सिडनी में बना। वूलगूल्गा, जो न्यू साउथ वेल्स में स्थित है, सिख प्रवास का सबसे बड़ा केंद्र बन गया। यहाँ दो प्रमुख गुरुद्वारे हैं:

Sikhism in Australia gurudwara Australia
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  1. सिख मंदिर वूलगूल्गा (ऑस्ट्रेलिया का पहला गुरुद्वारा)
  2. गुरु नानक गुरुद्वारा (‘पहाड़ी पर मंदिर’)

व्हाइट ऑस्ट्रेलिया नीति और संघर्ष

1901 से 1973 तक लागू व्हाइट ऑस्ट्रेलिया नीति के कारण भारतीयों के आप्रवासन पर प्रतिबंध था। हालाँकि, जो लोग 1900 से पहले आए थे, उन्हें डिक्टेशन टेस्ट से छूट (CEDT) दी गई थी, जिससे वे देश में रह सकते थे।

कई सिखों ने इस नीति के दौरान कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उन्होंने अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान बनाए रखी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, सिखों को ऑस्ट्रेलिया में बसने की अधिक स्वतंत्रता मिली।

ऑस्ट्रेलिया में सिखों की बढ़ती जनसंख्या

  • 2006 में ऑस्ट्रेलिया में सिखों की संख्या 26,000 थी, जो 2016 तक बढ़कर 125,000 हो गई।
  • 2023 में, ऑस्ट्रेलिया में सिखों की संख्या 2,10,000 से अधिक हो गई, जो कुल आबादी का 8% है।
  • सिख धर्म ऑस्ट्रेलिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला धार्मिक समूह है।

सिखों के योगदान और मान्यता

  • विक्टोरिया राज्य में गुरु नानक जयंती बड़े पैमाने पर मनाई जाती है।
  • सिखों ने ऑस्ट्रेलियाई समाज में खुद को सफलतापूर्वक स्थापित किया है, विशेष रूप से कृषि, व्यापार और शिक्षा क्षेत्रों में।
  • सिख समुदाय ने ब्लूबेरी और केले की खेती में अग्रणी भूमिका निभाई है।
  • ऑस्ट्रेलिया में कई सिख व्यापार, आईटी और स्वास्थ्य सेवा में उच्च पदों पर हैं।

ऑस्ट्रेलिया में सिख समुदाय का इतिहास संघर्ष, मेहनत और समर्पण की कहानी है। 1800 के दशक में आए सिखों ने कृषि, व्यापार और परिवहन के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज, वे ऑस्ट्रेलिया की सामाजिक और आर्थिक संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं और आने वाले वर्षों में उनकी उपस्थिति और अधिक मजबूत होने की संभावना है। सिखों का योगदान ऑस्ट्रेलिया में न केवल व्यापार और कृषि तक सीमित है, बल्कि उन्होंने राजनीति, रक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बनाई है।

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