हिंदी साहित्य में ‘जातिवाद के विष’ को जनता के सामने लाने वाली इकलौती दलित लेखिका
लिख रही है औरतें वे लिख रही है प्रेम, विरह वे लिख रही है अधिकार, विरोध वे लिखती है तुम्हारा दोगलापन कि कैसे-कैसे निकल आता है वक्त-बेवक्त तुम्हारे भीतर का जाति व्यवस्था और पितृसत्ता वाला समाज.. Rajni Disodia full Details in Hindi: आज हमारे देश की लड़कियां कहाँ पीछे है? हर चीज़ में दुनिया से...
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