डॉ भीमराव अंबेडकर क्यों मानते थे कि भारत में ‘लोकतंत्र छलावा’ है ?
“जिनके पेट भरे होते है वह चुनाव के बारे में सोचते है” हमारे देश के व्यक्तियों को भौतिक साधन जैसे रोटी, कपड़ा, मकान की ज्यादा जरूरत है, उन्हें चुनाव से फर्क नहीं पड़ता. पेट भरा हो तो सब अच्छा लगता है. इससे अलग हिन्दू धर्म में वर्ण व्यवस्था है, जिसमे एक समूह बड़े समूह के...
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