अब जेल की रोटी खाएंगें नवजोत? SC ने सिद्धू को क्यों सुनाई कारावास की सजा, जानिए क्या है 33 साल पुराना मामला?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 19 मई 2022, 05:30 AM Updated: 19 मई 2022, 05:30 AM
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क्रिकेटर से कॉमेडियन और राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) एक बार फिर बड़ी मुसीबत में फंस चुके हैं। ये मुसीबत आज की नहीं, 3 दशकों पुरानी है। जिसके लिए उन्हें अदालत की ओर से कारावास की सजा सुनाई गई है।

कोर्ट ने सुनाया फैसला

दरअसल, नवजोत सिंह सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट ने 1 साल की सजा सुनाई है। सिद्धू को ये सजा 33 साल पुराने रोड रेज के मामले में सुनाई गई है। पहले इस मामले की सुनवाई में सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट ने महज एक हजार के जुर्माने पर छोड़ दिया था। लेकिन रोड रेज में जिस बुजुर्ग की मौत हुई थी, उसके परिवार ने रिव्यू पिटीशन दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले पर सुनवाई करते हुए सिद्धू को अब 33 सालों बाद 1 साल सश्रम कारावास की सजा सुना दी है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट की तरफ से रोड रेज से जुड़े मामले पर फैसला आते ही सिद्धू का इस पर रिएक्शन सामने आया। ट्वीट कर उन्होंने कहा कि मैं अपने आप को कानून के सामने प्रस्तुत करुंगा।

जानें पूरा मामला…

बता दें कि ये मामला 1998 का है, जब नवजोत सिंह सिद्धू क्रिकेटर हुआ करते थे। 27 दिसंबर की शाम को नवजोत सिद्धू अपने दोस्त रूपिंदर सिंह संधू के साथ पटियाला के शेरावाले गेट की मार्केट में पहुंचे। इसी मार्केट में कार पार्किंग को लेकर उनकी 65 साल के बुजुर्ग गुरनाम सिंह से कहासुनी हो गई। बात इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि हाथापाई तक जा पहुंची। 

जिसके बाद सिद्धू ने गुरनाम सिंह को घुटना मारकर गिरा दिया। जिससे गुरनाम सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए, उसके बाद गुरनाम सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। लेकिन अस्पताल से मिली रिपोर्ट में आया कि गुरनाम सिंह की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई।

गुरनाम सिंह की मौत के बाद उसी दिन सिद्धू और उनके दोस्त रूपिंदर पर कोतवाली थाने में गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ। 1988 के मामले में सिद्धू पर दो केस पहला गैर इरादतन हत्या का और दूसरा रोड रेज का दर्ज हैं। 

हालांकि गैर इरादतन हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को 15 मई 2018 को बरी कर दिया था। लेकिन रोड रेज के केस में उन पर चोट पहुंचाने की धारा लगी थी, इस मामले में सिद्धू को बरी करते हुए तीन साल की सजा को 1000 रुपए के जुर्माने में बदल दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई थी। 

गौरतलब है कि 25 मार्च, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। बहरहाल आज 19 मई यानि गुरुवार को कोर्ट ने फैसला सुना दिया। 

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