कौन है आनंद मोहन, जिसकी रिहाई के लिए नीतीश को कानून तक बदलना पड़ा?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 25 Apr 2023, 12:00 AM | Updated: 25 Apr 2023, 12:00 AM

आनंद मोहन विवाद – उत्तरप्रदेश में सपा से खाली हुआ रास्ता अब बिहार में अपना गढ़ बनवा रहा है. जी हां, कुछ ऐसी ही खबर बिहार से सामने आई जहाँ बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने वोट की राजनीति के चक्कर में एक मर्डरर को जेल से रिहा करने के लिए जेल कानून में ही संसोधन करवा दिया. दरअसल बिहार के बाहुबली और पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता नीतीश कुमार सरकार ने साफ कर दिया है. सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है जिसमे जेल से रिहाई के नियमों में ही बदलाव कर दिया गया है. और इस छूट का सीधा फायदा डीएम जी कृष्णैया मर्डर केस में सजा काट रहे आनंद मोहन को मिलेगा.

आनंद मोहन अब जेल से रिहा हो सकते हैं. बिहार के गृह विभाग की ओर से जारी एक अधिसूचना में 10 अप्रैल को कहा गया है कि बिहार कारा हस्तक 2012 के नियम – 481 (i) (क) में संशोधन किया जा रहा है. बिहार सरकार ने बिहार कारा हस्तक 2012 नियम- 481 (i) (क) में वर्णित वाक्यांश ‘या काम पर तैनात सरकारी सेवक की हत्या’ को खत्म किया जा रहा है.

क्या है सरकारी सेवक की हत्या पर कानून

बिहार में कानून के शब्दों में संशोधन किया गया है. अब तक एक सरकारी सेवक की हत्या अलग से इस अधिनियम में शामिल था. अधिसूचना के बाद से अब ड्यूटी पर तैनात सरकारी सेवक की हत्या अपवाद नहीं बल्कि साधारण हत्या है.

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आनंद मोहन विवाद

बिहार के सहरसा जिले का जन्मा  आनंद मोहन साल 1974 में जेपी आन्दोलन से राजनीति में कदम रखता है. और इंदिरा सरकार में इमरजेंसी के दौरान वो दो साल के लिए जेल में भी रहता है.  1980 में उसने समाजवादी क्रांति सेना की स्थापना की. इसके बाद हत्या, लूट, अपहरण के कई मामलों में उसका नाम शामिल होता चला गया. और फिर 1990 में आनंद मोहन की राजनीति में एंट्री हुई.

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आनंद मोहन, गोपालगंज के ज़िलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के दोषी है और उम्रक़ैद की सज़ा काट रहा है. फिलहाल आनंद मोहन परोल पर बाहर है और आज ही उसे सहरसा जेल वापस जाना है. हालांकि, इस बीच बिहार सरकार ने अपने एक क़ानून में बदलाव किया है, जिसके बाद आनंद मोहन की रिहाई का रास्‍ता साफ हो गया है.

खुद की बनायीं पार्टी और पत्नी सांसद

आनंद मोहन ने जब राजनीति में उतरने का फैसला किया, तो उत्‍तरी बिहार में वह बाहुबली के रूप में जाना जाता था. ऐसे में उसे जनता दल ने माहिषी विधानसभा सीट से मैदान में उतारा और वो जीत भी गया. इसके बाद आनंद मोहन ने 1993 में अपनी खुद की ‘बिहार पीपुल्स पार्टी’ बना ली और बाद में समता पार्टी से हाथ मिला लिया.

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1994 में आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद भी राजनीति के अखाड़े में कूद पड़ीं और वैशाली लोकसभा सीट से उपचुनाव जीत लिया. 1996 में आनंद मोहन ने शिवहर लोकसभा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और रसूख के दम पर जेल में रहते हुए जीत हासिल की. ऐसे ही 1999 में आनंद मोहन ने एक बार फिर सीट से जीत हासिल कर अपना दमखम दिखाया.

फिलहाल डीएम हत्याकांड में जेल में है बंद

  • आनंद मोहन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अस्वीकार किया जा चुका है.
  • आनंद मोहन एक जमाने में उत्तरी बिहार के कोसी क्षेत्र के बाहुबली कहलाते थे.
  • राजनीति में उनकी एंट्री 1990 में हुई। तब पहली बार सहरसा से MLA बने थे.
  • पप्पू यादव से हिंसक टकराव की घटनाएं देश भर में सुर्खिया बनीं थी.
  • 1994 में उनकी वाइफ लवली आनंद ने भी वैशाली लोकसभा का उपचुनाव जीतकर राजनीति में एंट्री की थी.
  • आनंद मोहन ने जेल से ही 1996 का लोकसभा चुनाव समता पार्टी के टिकट पर लड़ा और जीत हासिल की थी.
  • 2 बार सांसद रहे आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद भी एक बार सांसद रह चुकी हैं.

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“ऐसे हुई थी डीएम कृष्णैया की हत्या”

साल 1994 में बिहार पीपल्स पार्टी के नेता और गैंगस्टर छोटन शुक्ला को पुलिस ने मुठभेड़ में मार दिया. उसकी शवयात्रा में हजारों लोग शामिल हुए. इस भीड़ का नेतृत्व आनंद मोहन (आनंद मोहन विवाद) कर रहे थे. इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैय्या पहुंचे थे. इसी दौरान दौरान भीड़ बेकाबू हो गई और डीएम को सरेआम गोली मार दी गई. आनंद मोहन पर भीड़ को भड़काने का आरोप लगा और दोषी साबित होने के बाद फांसी की सजा सुनाई गई. बताया जाता है कि आनंद मोहन ने ही डीएम जी. कृष्णैय्या को उनकी गाड़ी से निकाला और भीड़ के हवाले कर दिया था.

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