गुरुद्वारा मणिकर्ण साहिब की क्या है मान्यता, टूरिस्ट के बीच क्यों है पॉपुलर, ये है वजह…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 24 जुलाई 2022, 05:30 AM Updated: 24 जुलाई 2022, 05:30 AM
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गुरुद्वारा श्री गुरु नानक देव मणिकरण साहिब के बारें में आज हम आपको बताएंगे। इस गुरु्द्वारे की बड़ी मान्यता है। यहां लोग दूर-दराज से घूमने और मत्था टेकने आते है। मनाली की ठंडी वादियों के बीच मणिकरण के हॉट स्प्रिंग यानी की गर्म कुंड की भी खूब चर्चाएं है। आइए बताते है कि इन सभी की क्या मान्यता है और ये किस लिए चर्चित है। 

मणिकर्ण जिसे दो धर्मों का एक तीर्थ स्थल माना जाता है, आइए शुरुआत करते है।

श्री गुरु नानक देव मणिकरण साहिब सिखों के पवित्र तीर्थ स्थानों में से एक है। मणिकरण साहिब हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में 1760 मीटर की ऊंचाई पर पार्वती नदी के किनारे पर स्थित है। यहां का पानी बर्फीली ठंड में भी खौलते रहता है। मान्यता है कि इस पानी में जो भी डुबकी लगा लेता है उसके जोड़ों का दर्द हमेशा के लिए पूरी तरह से ठीक हो जाता है। इसके अलावा अगर कुछ दिन तक इस पानी में नहाया जाए तो सभी बीमारियां दूर हो जाती है। ये भी माना जाता है कि यही वो पहली जगह थी जहां गुरु नानक देव जी ने ध्यान लगाया था। इसके साथ ही बड़े-बड़े चमत्कार किए थे। वहीं इस गुरुद्वारे में एकसाथ लगभग 4000 लोग रूक सकते है। 

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इस जगह का नाम मणिकर्ण कैसे पड़ा

आइए बताते है कि अब इस जगह का नाम मणिकर्ण कैसे पड़ा। कहा जाता है कि शेषनाग ने भगवान शिव के क्रोध से बचने के लिये यहां एक मणि फेंकी थी, जिस वजह से ये चमत्‍कार हुआ था। ऐसे होने के पीछे का किस्सा ये बताया जाता है कि 11 हजार सालों पहले भगवान शिव और माता पार्वती ने यहां तपस्‍या की थी। ऐसे में मां पार्वती जब नहा रही थीं, तब उनके कानों की बाली में से एक नग पानी में गिरा गया था। फिर भगवान शिव ने अपने गणों से इस मणि को ढूंढने को कहा लेकिन वह नहीं मिल सका। जिसके बाद भगवान शिव बेहद नाराज हुए औह उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी। आंख खोलने से नैनादेवी नामक शक्ति पैदा हुई। नैना देवी ने शिव को बताया कि उनकी मणि शेषनाग के पास है। शेषनाग ने मणि को देवताओं की प्रार्थना करने पर वापस कर दिया, लेकिन वे इतने नाराज हुए कि उन्‍होंने जोर की फुंकार भरी जिससे इस जगह पर उबलती पानी की धारा फूटने लगी और तभी से इस जगह का नाम मणिकर्ण पड़ा। 

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एक मान्यता ये भी प्रसिद्ध है

वहीं एक और मान्यता ये भी है कि जब भगवान शिव और उनकी पत्नी पार्वती घाटी में घूम रहे थे तो देवी पार्वती की एक बाली गिर पड़ी। इस बाली को शेषनाग ने ले लिया। शेषनाग ने देवी पार्वती की बाली लौटाने से इंकार कर दिया। जिसके बाद शेषनाग ने शिव से अनुरोध किया कि जब शिव तांडव करेंगे तभी उन्हें बाली लौटाएंगे। जिसके बाद शिव के तांडव करने के बाद शेषनाग ने बाली को पानी के अंदर से निकाला और शिव को दे दिया। यही वजह है कि मणिकरण के पानी में गहने डालकर कुछ भी मांगने की प्रथा कायम है।

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खौलते पानी की क्या है मान्यता

यहां का पानी 86 से 96 डिग्री टेम्परेचर पर खौलता रहता है। गुरूद्वारे में जो लंगर बनता है वह भी इसी खौलते पानी से तैयार किया जाता है। कई श्रद्धालु इस पानी को पीते हैं और इसमें डुबकी लगा लगा कर अपनी बीमारी को ठीक करते हैं। माना जाता है कि यहां पर नहाने से मोक्ष की प्राप्‍ती होती हैं। 

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गर्म कुंड के पानी की एक मान्यता ये भी

वहीं यहां कि एक और मान्यता ये भी है कि तीसरे उदासी के दौरान सिख धर्म के गुरु गुरु नानक जी इस जगह पर अपने शिष्य मर्दाना के साथ आये थे। मर्दाना को भूख लगी लेकिन खाने के लिए कुछ नहीं था। जिसके बाद गुरु नानक ने लंगर के लिए खाना इकट्ठा करने के लिए मर्दाना को भेजा। ऐसे में कई लोगों ने रोटी बनाने के लिए आटा दान दिया। अब समस्या ये थी कि खाना पकाने के लिए आग जलाने की कोई व्यवस्था नहीं थी। इसलिए गुरु नानक ने मर्दाना को एक पत्थर उठाने के लिए कहा और ऐसा करते ही एक गर्म पानी का झरना निकल आया। हालांकि निराश मर्दाना ने रोटियो को पानी के झरने में डाल दिया। इसके बाद गुरु नानक जी के कहने पर मर्दाना ने परमात्मा से अरदास की और बोला अगर उसकी रोटी वापस पानी पर तैर आई तो वो एक रोटी परमात्मा को दान दे देगा। बस इसी के तुरंत बाद सभी रोटियां पकी हुई पानी पर तैरने लगी। ये देखकर गुरु नानक जी ने कहा कि अगर कोई भी शख्स परमात्मा के नाम पर दान करता है तो उसका डूबा हुआ सामान वापस तैरने लग जाता है।

गर्म कुंड में चावल भी पक जाते है

कूल्लू के मणिकरण में ये जगह काफी पॉपुलर इसलिए भी है क्योंकि यहां की खूब मान्यताएं है। यहां के गर्म पानी से लेकर पानी में गहने डालने तक की मान्यताएं इतनी पॉपुलर है कि लोग यहां इसे पूरा करने एक ना एक बार जरूर आते है। इसके अलावा एक मान्यता ये भी है कि अगर हम इस पानी में चावल डालते है तो वो भी पक जाते है। वहीं यहां का पानी क्यों गर्म रहता है ये एक रहस्य बना हुआ है। तो आपको ये खबर कैसी लगी और इस पर आपकी क्या राय है। हमें कमेंट कर जरुर बताये। साथ ही ये भी बताएं की आप यहां घूमने गए है या नहीं, और क्या ये मान्यताएं आपने भी पूरी की है?

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