Vantara Jamnagar Controversy: सरकारी चिड़ियाघरों से जानवरों को अंबानी को सौंपना “कॉन्फ़िडेंशियल इन्फॉर्मेशन” है, एक RTI ने खोल दी मोदी सरकार की पोल!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 23 जून 2025, 05:30 AM Updated: 23 जून 2025, 05:30 AM
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Vantara Jamnagar Controversy: RTI (सूचना का अधिकार) कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला ने जब वंतारा जामनगर पर आरटीआई फाइल कर जानकारी हासिल करने की कोशिश की, तो उन्हें जो जवाब मिला, वह हैरान करने वाला था। केंद्रीय सरकार ने बताया कि अंबानी के बेटे अनंत अंबानी के प्राइवेट चिड़ियाघर को देश के सरकारी चिड़ियाघरों से वन्यप्राणी सौंपे गए हैं, लेकिन यह जानकारी “कॉन्फ़िडेंशियल” है, इसलिए उसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। इस खुलासे ने कई सवाल खड़े किए हैं, खासकर वन्यप्राणी संरक्षण और उनकी तस्करी को लेकर। कुणाल शुक्ला ने आरटीआई के जरिए इस मामले को उजागर किया है, जो अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।

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वनतारा परियोजना: क्या है इसका उद्देश्य? (Vantara Jamnagar Controversy)

वनतारा शब्द ‘वन’ और ‘तारा’ के संयोजन से बना है, जिसका अर्थ है “जंगल का तारा”। यह परियोजना रिलायंस ग्रुप द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति में प्रकृति को मां का दर्जा देने और उसके भीतर रहने वाले जीवों की रक्षा करना है। वनतारा परियोजना के तहत रिलायंस जामनगर रिफाइनरी परिसर में करीब 3000 एकड़ में फैला ग्रीन बेल्ट है, जहां दुनिया भर के वन्यजीवों का इलाज और पुनर्वास किया जाता है। इस परियोजना के अंतर्गत घायल और शोषित जानवरों को बचाया जाता है और उन्हें फिर से जंगल में छोड़ने का प्रयास किया जाता है।

अंबानी के प्राइवेट चिड़ियाघर पर सवाल

कुणाल शुक्ला का दावा है कि अंबानी के बेटे के निजी चिड़ियाघर में भारत के सरकारी चिड़ियाघरों से बड़ी संख्या में वन्यप्राणी भेजे गए। इन प्रजातियों में बाघ, शेर, हाथी, और अन्य दुर्लभ प्रजातियां शामिल हैं। शुक्ला का कहना है कि यह सब बिना किसी पारदर्शिता के हुआ और इसे छिपाने की कोशिश की गई। छत्तीसगढ़ में यह काम गुपचुप तरीके से हुआ था, लेकिन जब असम में यह मामला लीक हुआ, तो जनता ने विरोध करना शुरू कर दिया। शुक्ला ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर अकेले लड़ रहे हैं और यह लड़ाई उन्होंने देश के लिए शुरू की है।

वनतारा का विवाद

हाल ही में जर्मन मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि वंतारा प्रोजेक्ट ने अवैध वन्यजीव तस्करी को बढ़ावा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, वंतारा में 39,000 से ज्यादा वन्यप्राणी रखे गए हैं, जिनमें से कई जानवरों की तस्करी उनके प्राकृतिक आवास से की गई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वंतारा में शेर, तेंदुआ, हाथी और कई अन्य दुर्लभ प्रजातियों को लाकर रखा गया है, जिनमें से कई को विभिन्न देशों से अवैध तरीके से भेजा गया था। हालांकि, वंतारा ने इन आरोपों को “बिलकुल निराधार” और “भ्रामक” करार दिया है। उन्होंने कहा कि उनके पास सभी जानवरों का कानूनी प्रमाण पत्र और CITES (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora) की अनुमति है, जो यह प्रमाणित करते हैं कि सभी जानवर वैध तरीके से लाए गए हैं।

क्या है असम और अन्य देशों का विरोध?

असम में जब यह मामला लीक हुआ, तो वहां के नागरिकों ने सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया। विशेष रूप से, दक्षिण अफ्रीका और वेनेजुएला जैसे देशों में भी इस मामले को लेकर चिंता जताई गई है। कई पशु अधिकारों की संस्थाओं ने वंतारा के खिलाफ जांच की मांग की है, यह आरोप लगाते हुए कि वंतारा ने अवैध रूप से वन्यप्राणियों की तस्करी को बढ़ावा दिया है।

कुणाल शुक्ला का संघर्ष

कुणाल शुक्ला का कहना है कि वह इस मामले में अकेले संघर्ष कर रहे हैं और उनका उद्देश्य केवल अंबानी के निजी चिड़ियाघर की गंदगी को उजागर करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भारत में वन्यप्राणियों की तस्करी पर कड़ी रोक लगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी लड़ाई देश की प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए है, और वह अनंत अंबानी के इस कृत्य को बेनकाब करने की पूरी कोशिश करेंगे।

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