Pongal 2021: 4 दिनों तक मनाया जाता है पोंगल का पर्व, जानिए इसकी विधि और इसे मनाने से जुड़ी पौराणिक कथा

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 14 जनवरी 2021, 12:00 AM 🔄 Updated: 14 जनवरी 2021, 12:00 AM
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दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक पोंगल को काफी धूमधाम से तमिलनाडु में मनाया जाता है. ये त्योहार किसानों का माना जाता है। इस अवसर पर फसल की पूजा की जाती है, चार दिनों तक मनाया जाने वाला ये इस साल 14 जनवरी से शुरू हो रहा है। जहां उत्तर भारत में लोहड़ी और मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है, तो वहीं दक्षिण भारत में इन त्योहारों को ‘पोंगल’ के तौर पर मनाया जाता है। इसके साथ ही तमिल में नववर्ष की भी शुरुआत हो जाती है।

क्यों मनाया जाता है पोंगल का त्यौहार

पोंगल का त्यौहार लोहड़ी के जैसे ही होता है, लेकिन बस इन दोनों को मनाने के तरीके का अलग-अलग होता है। पोंगल के त्योहार भी फसल से संबंधित पर्व होता है। इस त्योहार को धान कटाई के के बाद मनाया जाता है, जिससे दक्षिण भारतीय लोग अपनी खुशी को प्रकट करते हुए भगवान से प्राथना करते हैं कि आगामी फसल अच्छी ही रहे। इस त्योहार के मौके पर सूर्य, इन्द्र देव, बारिश, धूप और खेतिहर मवेशियों की पूजा की जाती है, क्योंकि इन सभी के चलते ही अच्छी फसल प्राप्त होती है।

4 दिनों तक मनाया जाता है ये त्यौहार

पोंगल का त्योहार चार दिनों तक मनाया जाता है। इस त्योहार के पहले दिन घर की सफाई होती है और सभी कूड़े को इकट्ठा कर जलाया जाता है। इसके बाद दूसरे दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके साथ ही मां से सुखी जीवन की कामना की जाती है। वहीं, तीसरे दिन पशुधन खासतौर पर बैल और गाय की पूजा होती है, जबकि चौथे दिन काली मां की पूजा की जाती है।

जरूर बनाई जाती है रोंगली

जिस तरह से दिवाली के त्योहार पर घर की साज सजावट की जाती है, ठीक वैसे ही पोंगल पर भी घर को अच्छे से सजाया जाता है। इसके साथ ही रंगाई-पुताई की जाती है। इस अवसर पर रंगोली भी जरूर बनाई जाती है। इसके अलावा नए कपड़े और बर्तन भी खरीदे जाते हैं। इस त्योहार में पशुओं की पूजा की जाती है। इस दौरान बैलों और गायों के सींगों को रंगा जाता है। इस दिन खीर भी जरूर बनाई जाती है, जिसे सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। वहीं, कई लोग सूर्य देव को चावल, घी, दूध, और शकर का भी भोग लगाते हैं।

पोंगल मनाने से जुड़ी पौराणिक कथा

पोंगल मनाने से जुड़ी पौराणिक कथा के मुताबिक जब शिव जी अपनी सवारी बैल वसव को धरती पर जाकर एक संदेश देने के लिए कहा, इस दौरान भगवान शिव ने वसव से कहा कि वो धरती पर जाकर लोगों से कहे कि वो रोजाना स्नान करें और स्नान से पहले तेल जरूर लगाएं, लेकिन वसव ने इस संदेश को उल्टा दे दिया। जिसके चलते भगवान शिव बहुत नाराज हुए और उन्होंने गुस्से में आकर वसव को हमेशा के लिए धरती पर भेजते हुए आदेश दिया कि वो फसल उगाने में लोगों की मदद करें। ये ही कारण है कि लोग पोंगल के दिन अपनी बैल की पूजा करने के दौरान उस पर तेल लाकर उसको अच्छे से सजाते हैं। इसके अलावा इस पर्व के दिन गाय की भी खासतौर पर पूजा की जाती है।

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