'मुसोलिनी और हिटलर को चुनौती दे रहे नीतीश कुमार…' सरकार के फैसले पर सियासत तेज

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 03 फ़रवरी 2021, 05:30 AM Updated: 03 फ़रवरी 2021, 05:30 AM
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किसान आंदोलन को लेकर देश में सियासत चरम पर है। विपक्षी पार्टियां केंद्र सरकार पर हमलावर है और साथ ही मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग भी कर रही है। इन कानूनों को लेकर देश के कई राज्यों में भी हलचले तेज है। हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में जीत हासिल कर एनडीए गठबंधन ने सरकार बनाई है। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) बिहार के सीएम बने हैं, लेकिन बिहार की स्थिति अभी भी ज्यों की त्यों बनी हुई है।

समय बदला, सत्ता बदली, कार्यकाल बदला लेकिन सत्ताधारी नेताओं की कथित तौर पर मंशा नहीं बदली। पिछले दिनों बिहार सरकार ने सोशल मीडिया पर नेताओं और सरकारी कर्मियों के खिलाफ पोस्ट को लेकर आदेश जारी किया था। अब एक बार फिर से नीतीश कुमार की सरकार ने एक ऐसा आदेश जारी किया, जिसे लेकर प्रदेश की सियासत में हलचल मची हुई है।

सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने पर….सरकारी नौकरी नहीं

दरअसल, पिछले दिनों बिहार पुलिस महानिदेशक की ओर से आदेश जारी किया गया कि अगर कोई व्यक्ति सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होकर किसी आपराधिक घटना को अंजाम देता है तो उसे सरकारी नौकरी या ठेके नहीं दिए जाएंगे। इस मामले को लेकर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में हलचले काफी तेज हो गई है।

बिहार पुलिस की ओर से जारी उस चिट्ठी में लिखा गया है कि ‘अगर कोई व्यक्ति किसी विधि-व्यवस्था की स्थिति, विरोध प्रदर्शन, सड़क जाम इत्यादि मामलों में संलिप्त होकर किसी आपराधिक कृत्य में शामिल होता है और उसे इस कार्य के लिए पुलिस द्वारा आरोप पात्रित किया जाता है तो उनके संबंध में चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन में विशिष्ट एवं स्पष्ट रूप से प्रविष्टि की जाए। ऐसे व्यक्तियों को गंभीर परिणामों के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि उन्हें सरकारी नौकरी/सरकारी ठेके आदि नहीं मिल पाएंगे।‘

40सीट के मुख्यमंत्री कितने डर रहे है?

इस मामले को लेकर आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने भी नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पर हमला बोला है। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए कहा, ‘मुसोलिनी और हिटलर को चुनौती दे रहे नीतीश कुमार कहते है अगर किसी ने सत्ता व्यवस्था के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन कर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग किया तो आपको नौकरी नहीं मिलेगी। मतलब नौकरी भी नहीं देंगे और विरोध भी प्रकट नहीं करने देंगे बेचारे 40सीट के मुख्यमंत्री कितने डर रहे है?’

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