Taxila history: जब आप तक्षशिला का नाम सुनते है तो सबसे पहले आपके जेहन में क्या आता है। एक विश्वविद्यालय, जहां बौद्ध भिक्षुओं के भांति सैकड़ो छात्र है, जो शिक्षा ग्रहण करने के लिए तक्षशिला पढ़ने आये है। तक्षशिला, जो कभी दुनिया के सबसे पुराने विशाल विश्वविद्यालयों में से एक हुआ करता था, जहां महान कूटनीतिज्ञ और सिकंदर महान को अपनी चालाकी से भारत के अंदरूनी हिस्से में आने से रोकने वाले चाणक्य और महान गुरु पाणिणी से जुड़ा है.. लेकिन आज तक्षशिला को लेकर भारत में चर्चा कम होती है.. वजह साफ है उसका पाकिस्तान में चला जाना।
जी हां, भारत की एक महान धरोहर इस वक्त पाकिस्तान के हिस्से में है.. लेकिन जब आप तक्षशिला का इतिहास जानते है तो आपको एहसास होगा कि भारत की भूमि पर वाकई में कितने महान, ज्ञानी, और शास्त्र शस्त्र में पारंगत लोग हुए जो इसी तक्षशिला की ही देन थे, अपने इस लेख में हम पंजाब पाकिस्तान के तक्षशिला का इतिहास और उसके जुड़ी जरूरी बातें जानेंगे, जिसके कारण तक्षशिला को तबाह करने की बड़ी साजिश रची गई थी। क्या है तक्षशिला का इतिहास,… और उसके तबाह होने तक का इतिहास।
क्या है तक्षशिला का इतिहास – Taxila history
जब आप वेदों में सबसे पुराने वेद ऋग्वेद को पढेंगे तो उसमें एक स्थान का जिक्र किया गया है, ये स्थान है गंधार.. जिसका दूसरी बार जिक्र वाल्मिकी रामायण में मिलता है.. जब श्रीराम के भाई भरत ने अपने नाना केकयराज अश्वपति की सहायता की थी और गन्धर्वो के देश (गान्धार), जो कि सिंधू नदी के दोनो किनारों पर बसा हुआ राज्य था, को युद्ध में हरा कर विजय प्राप्त की और भरत ने दोनो तरफ अपने दोनो बेटो तक्ष औऱ पुष्कल को राजधानी बसाने के लिए दे दिया था, तब तक्ष ने तक्षशिला और पुष्कल ने पुष्करावती नाम की दो राजधानी बसाई थी।
तक्षशिला विश्वविद्यालय का निर्माण – Taxila history
तक्षशिला सिन्धु के पूर्वी तट पर थी… हालांकि जब सिकंदर ने तक्षशिला पर आक्रमण किया था तब तक्षशिला एक काफी बड़ा और संपन्न नगर था, जो कि काफी अच्छी विधियों से शासित की गई थी, घनी आबादीवाला शहर था और उपजाऊ भूमि से भरपूर था। हालांकि लगातार हमलो और युद्धों के कारण तक्षशिला का स्वरूप बदलता रहा, लेकिन करीब 1000 ईसा पूर्व जब तक्षशिला विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ तब उसी प्रसिद्धि काफी बढ़ रही। तक्षशिला जैन और बौद्ध धर्म के वैदिक शिक्षा और आयुर्वेद शिक्षा का मुख्य केंद्र था।
इसी के साथ यहां तब धनुर्वेद, हस्तविद्या, त्रयी, व्याकरण, दर्शनशास्त्र, ज्योतिष, गणना, गणित, संख्यानक, वाणिज्य, संगीत, नृत्य और चित्रकला के साथ साथ सर्पविद्या, तंत्रशास्त्र की भी शिक्षा दी जाती थी। हालांकि जब कई महान शासको जैसे कि अजातशत्रु, बिम्बिसार, वसुबंध ने यहा शिक्षा हासिल की तो ये पूरी तरह से बौद्ध विश्वविद्यालय हो गया था। तक्षशिला की खोज की शुरुआत तो 1912 से पहले ही जनरल कनिंघम ने शुरू की थी, लेकिन तब उन्हें कुछ हासिल नही हुआ था, मगर 1912 के बाद सर जॉन मार्शल ने इसकी खोज को तेज कर दिया, उन्होंने अलग अलग स्थानों पर खोज की… और तब उन्हें पहली बार असली तक्षशिला मिली।
कहां है तक्षशिला – Taxila history
तक्षशिला पंजाब के रावलपिंडी जिले में मौदूद भीर के टीलो में मौजूद है, जो कि तक्षशिला का पहला हिस्सा है। ये पंजाब पाकिस्तान में मौजूद है। इसके बाद इसका दूसरा हिस्सा सिरकप के खंडहरो से और तीसरा सिरसुख में प्राप्त हुआ। तक्षशिला जिसका अर्थ होता है “कटे हुए पत्थर का शहर” या “तक्षक चट्टान”… 1980 में इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहरो में शामिल कर दिया है। तक्षशिला में मिले अवशेष नवपाषाण युग के माने जाते है क्योंकि इसकी डेटिंग 3360 ईसा पूर्व तक की मिली है।
वहीं हड़प्पा सभ्यता के भी अवशेष प्राप्त है, यानि की पंजाब का हडप्पा सभ्यता से नाता तक्षशिला से भी जुड़ा है। ये भी कहा गया कि तक्षशिला की संपन्नता देखकर विदेशी आक्रमण उस पर होते रहते थे और तक्षशिला पर 6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व में फारसी अचमेनिद साम्राज्य का शासन था.. सिकंदर के समय के इतिहासकार कहते है कि तक्षशिला को “समृद्ध और शासित” शहर हुआ करता था।
कहा जाता है कि महान गुरु और अर्थशास्त्री चाणक्य भी तक्षशिला के छात्र रहे थे और तब वो कौटिल्य के नाम से पहचाने जाते थे। उन्हें अर्थशास्त्र का ज्ञान तक्षशिला में ही हुआ था। जिसके बाद उन्होंने यहीं पढाना शुरु कर दिया था.. और आचार्य बन गए थे, वहीं संस्कृत व्याकरण के जनक और भाषाविज्ञान का पिता कहलाने वाले महर्षि पाणिनि भी तक्षशिला से संबंध रखते है। उनकी लिखी किताब में 8 अध्याय और 4000 सूत्र है। यानि की तक्षशिला के ज्ञान के सागर से कितने महान शख्सियत डूब कर निकले थे।
क्यों तबाह हुआ तक्षशिला – Taxila history
तक्षशिला कई सदियों तक महान शिक्षा का वैश्विक केंद्र रहा, लेकिन 470 ईसवी में इस इलाके में ह्यूनो ने लगातार कई बड़े हमले किये… बौद्ध भिक्षुओ की हत्या की गई, शहर के शहर तबाह कर दिये गए, लूट लिये गए.. ये तबाही इतनी बड़ी और भयानक की थी तक्षशिला को फिर से पहले ही तरह नहीं किया जा सका। वहीं एक तरफ तक्षशिला तबाह हुआ तो वहीं दूसरी तरफ उसकी जगह नालंदा विश्वविद्यालय ने ले ली… जिससे शासको का ध्यान तक्षशिला से हटता चला गया, वो आर्थिक रूप से भी चरमरा गया।
धीरे धीरे तक्षशिला नालंदा के आगे कमजोर और फीका हो गया। हालांकि आज भी ये दुनियाभर के पर्य़टको की पाकिस्तान में घूमने वाली पहली पसंद है, जिसे देखने हर साल करीब 10 हजार लोग आते है। अगर हमले न होते तो तक्षशिला के आगे कभी कोई खड़ा नहीं हो सकता था, जो ज्ञान का पूरा खजाना था।





























