प्रेमानंद जी के सत्संग : सैनिकों को देखकर महाराज जी क्यों हुए प्रसन्न और क्यों कहा आपकी जय हो

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 02 Jan 2024, 12:00 AM | Updated: 02 Jan 2024, 12:00 AM

श्री प्रेमानंद महाराज जी जो खुद को राधा रानी का परम भक्त मानते हैं और सुबह 2 बजे उठकर वृंदावन की परिक्रमा करते हैं साथ ही बांके बिहारी जी, राधा वल्लब जी के भी दर्शन करते हैं. महाराज जी राधा रानी के नाम का सत्संग भी करते है और इन सत्संग में कई सारे अच्छी बातें भी बताते हैं. इसी के साथ महाराज जी लोगों से भी मिलते हैं महाराज जी इनका मार्गदर्शन करते हैं साथ ही उन्हें सही दिशा में चलने का मार्ग बताते हैं. वहीं इस बीच महाराज जी मिलने कई सारे सैनिक आये और इन सैनिकों को देखकर महाराज जी बहुत प्रसन्न हुए.

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सैनिकों को देखकर महाराज जी हुए प्रसन्न 

श्री प्रेमानंद महाराज जी मिलने आये सैनिकों को देखकर महाराज जी ने कहा कि हमें बहुत ही अच्छा लगता है जब हम अपने भारतीय सैनिकों को देखते हैं तब हमारी छाती गर्व से चौड़ी हो जाती है हम अपने राष्ट्र के सैनिकों को एक संत मानते हैं क्योंकि जहाँ हम 5 मिनट खड़े नहीं हो सकते वहां इनकी ड्यूटी लगती है और ये देश सेवा के लिए प्राण समर्पित किए हैं.

महाराज जी ने इन सैनिकों की तारीफ की और कहा कि आप लोग देश के लिए काम करते हैं और कई मीलों घरों से दूर रहकर देश सेवा करते हैं आप सभी  सैनिकों की जय हो  खूब नाम जप करो और राष्ट्र सेवा और समाज सेवा में रहो आपका स्वागत है.

मथुरा जेल अधीक्षक ने पूछा महाराज जी से सवाल

इससे पहले मथुरा जेल अधीक्षक महाराज जी से मिलने आये थे और उन्होंने सवाल किया कि जिस जेल के वो अधीक्षक हैं वहां पर 1600 कैदी हैं. वहीं इनमे से कई कैदी ऐसे हैं जो कई सालों से जेल में बंद हैं. जेल में बंद कैदी के अपने परिवार वालों से न मिल पाते हैं न ही बातें कर पाते हैं और इस वजह से जेल में बंद कैदी का परिवार तिल-तिल मरता रहता है तो वहीं  जेल में बंद कैदी सुसाइड जैसे कदम उठा लेते हैं. अधीक्षक ने भी कहा कि हमने आपकी प्रेरणा से राधे-राधे का जाप कराना शुरू किया है जिसकी वजह से काफी परिवर्तन आया है और अब आप इन कैदियों को कुछ सन्देश दीजिये.

वहीं महाराज जी ने कहा कि ऐसा भी हो सकता है कि वो निर्दोष हो और उन्होंने वो अपराध नहीं किया हो लेकिन इस समय जिस अपराध के लिए उन्हें सजा मिली है ये वो पाप जो जो वो भोग रहे हैं. इसी के साथ महाराज ने कहा कि आत्महत्या वो उपाय नहीं है जिससे हम मुक्त हो जाए ये वो पाप है जिसका आपको दंड भोगना पड़ेगा. वहीँ महाराज ने भी ये कहा कैदियों को ये सोचना चाहिए कि जेल की सजा मिली तो क्या हुआ हम नाम जप करें और देखना सब आसान हो जायेगा. इसी के साथ महाराज जी ने कहा उन्हें ये सुनकर अच्छा लगा की कैदी भी नाम जप करते हैं.

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