कुत्ता-बिल्ली, हाथी-घोड़ा सबकी गिनती हो सकती है लेकिन OBC की क्यों नहीं? बिहार की सियासत में मचा बवाल

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 23 Jul 2021, 12:00 AM | Updated: 23 Jul 2021, 12:00 AM

एनडीए शासित बिहार में जारी सियासी कलह जारी है। नीतीश सरकार के नेता आपस में ही तमाम मुद्दों पर आये दिन उलझते दिख जाते हैं। पिछले दिनों राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनसंख्या नियंत्रण नीति को लेकर अपनी बात रखी, जिसके बाद बिहार की उप मुख्यमंत्री रेणु देवी ने नीतीश कुमार के बयान से एकदम उलट बयान दिया और जनसंख्या नियंत्रण पर उनकी बात को काट दिया। 

खबरों की मानें तो राज्य के एनडीए गठबंधन के अंदरखाने सबकुछ ठीक नहीं है। इसी बीच राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी राष्टीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने जातिगत जनगणना के मुद्दे को लेकर बीजेपी और केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है।

OBC की जनगणना क्यों नहीं कराना चाहती सरकार?

तेजस्वी यादव ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लगातार कई ट्विट करते हुए केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने अपने ट्विट में लिखा, ‘कुत्ता-बिल्ली, हाथी-घोड़ा, शेर-सियार, साइकिल-स्कूटर सबकी गिनती होती है। कौन किस धर्म का है, उस धर्म की संख्या कितनी है इसकी गिनती होती है लेकिन उस धर्म में निहित वंचित, उपेक्षित और पिछड़े समूहों की संख्या गिनने में क्या परेशानी है? उनकी जनगणना के लिए फॉर्म में महज एक कॉलम जोड़ना है।‘

उन्होंने अपने अलगे ट्विट में लिखा, ‘बिहार के दोनों सदनों में BJP जातीय जनगणना का समर्थन करती है लेकिन संसद में बिहार के ही कठपुतली मात्र पिछड़े वर्ग के राज्यमंत्री से जातीय जनगणना नहीं कराने का एलान कराती है। केंद्र सरकार OBC की जनगणना क्यों नहीं कराना चाहती? BJP को पिछड़े/अतिपिछड़े वर्गों से इतनी नफ़रत क्यों है?’

बीजेपी पिछड़े वर्गों के हिंदुओं को क्यों नहीं गिनना चाहती?

बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष ने अपने ट्विट में कहा, ‘जब तक पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या ज्ञात नहीं होगी तो उनके कल्यानार्थ योजनाएं कैसे बनेगी? उनकी शैक्षणिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बेहतरी कैसे होगी? उनकी संख्या के अनुपात में बजट कैसे आवंटित होगा? वो कौन लोग हैं जो नहीं चाहते कि देश के संसाधनों में से सबको बराबर का हिस्सा मिले?’

तेजस्वी यादव ने कहा, ‘जातीय जनगणना के लिए हमारे दल ने लंबी लड़ाई लड़ी है और लड़ते रहेंगे। यह देश के बहुसंख्यक यानि लगभग 65 फीसदी से अधिक वंचित, उपेक्षित, उपहासित, प्रताड़ित वर्गों के वर्तमान और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। बीजेपी सरकार पिछड़े वर्गों के हिंदुओं को क्यों नहीं गिनना चाहती? क्या वो हिंदू नहीं है?’

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