Purvanchal Expressway Scandal: कौन है आशुतोष सरकार? रोमांस वीडियो रिकॉर्ड कर बनाया ब्लैकमेल का जाल

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 10 दिसम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 10 दिसम्बर 2025, 05:30 AM
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Purvanchal Expressway Scandal: पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। एक कार के भीतर नवविवाहित दंपत्ति के रोमांस का वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुई बात अब एक बड़े ब्लैकमेलिंग रैकेट का शक पैदा कर रही है। जांच में सामने आया है कि एक्सप्रेसवे के एंटी ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) में तैनात असिस्टेंट मैनेजर आशुतोष सरकार पर यात्रियों की निजता का घोर दुरुपयोग करने के आरोप लगे हैं।

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कैसे सामने आया पूरा मामला? (Purvanchal Expressway Scandal)

कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो और शिकायत पत्र वायरल हुआ। इस शिकायत के साथ एक दंपत्ति ने सुल्तानपुर के डीएम, एसपी और यहां तक कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर कार रोककर निजी समय बिता रहे थे, तभी ATMS में तैनात अधिकारी आशुतोष सरकार ने सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद वह मौके पर पहुंचा, वीडियो दिखाया और धमकाकर 32 हजार रुपये वसूल लिए। पैसे नहीं देने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई।

शर्मिंदगी के कारण दंपत्ति तत्काल पुलिस के पास नहीं गए, लेकिन फिर हिम्मत कर शिकायत कर दी। इसके बाद जैसे ही मामला खुला, दो दिनों में पांच से छह और पीड़ित सामने आ गए। सभी ने आरोप लगाए कि एक्सप्रेसवे पर उनकी निगरानी कर निजी पलों की रिकॉर्डिंग कर उन्हें ब्लैकमेल किया गया।

कौन है आशुतोष सरकार?

आशुतोष सरकार हलियापुर टोल प्लाजा पर ATMS के असिस्टेंट मैनेजर के तौर पर तैनात था। वह सुपर वेव कम्युनिकेशन एंड इंफ्रा सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से पैकेज-3 में काम कर रहा था, जो NHAI से संबद्ध है। उसके पास मॉनिटरिंग की पूरी जिम्मेदारी थी  जैसे कि कौन-सा कैमरा क्या दिखा रहा है, किस एंगल से सड़क की निगरानी हो रही है, इन सबकी देखरेख वही करता था।

ATMS का काम सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और दुर्घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देना होता है। लेकिन इसी सिस्टम का दुरुपयोग कर निजी वीडियो रिकॉर्ड करना अब गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

टर्मिनेशन में ‘गड़बड़ी’?

मीडिया में मामला आने के बाद आशुतोष को नौकरी से निकालने का दावा कंपनी ने किया। लेकिन टर्मिनेशन लेटर पर 30 नवंबर 2025 की तारीख लिखी मिली। जबकि पीड़ितों ने 2 दिसंबर को शिकायत दी थी।

इसने कई सवाल खड़े किए क्या कंपनी पहले से आशुतोष की हरकतों से वाकिफ थी? क्या उसे बचाने की कोशिश की गई? क्या बड़ी गड़बड़ी दबाने के लिए पिछली तारीख डालकर उसे पहले ही निकाल दिया दिखाया गया? स्थानीय सूत्र भी यही कहते हैं कि कंपनी तब तक चुप रही जब तक मामला सार्वजनिक नहीं हो गया।

आरोपों से इनकार करता आशुतोष

मामला तूल पकड़ते देख अब आशुतोष सरकार भी सामने आ गया है। उसने कहा कि उसे फंसाया जा रहा है और उसके पास अपनी बेगुनाही के सबूत हैं। फिलहाल पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस CCTV सिस्टम तक किसकी पहुंच थी, कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं, इसकी भी जांच कर रही है।

पुलिस का साफ कहना है कि मामला अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ‘Right to Privacy’ यानी नागरिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन है।

चार टोल कर्मियों पर गिरी गाज

पूरा मामला सामने आने के बाद YEDA (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की है। टोल प्लाजा के चार कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने अलग-अलग समय पर वीडियो वायरल किए, दंपति को ब्लैकमेल किया और अवैध वसूली की।

बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में यातायात प्रबंधक शशांक शेखर, सिस्टम टेक्नीशियन आशुतोष तिवारी, सिस्टम इंजीनियर प्रमोद कुमार और एक अन्य कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है।

अधिकारियों ने मौके पर की जांच

मंगलवार रात अयोध्या के आईजी प्रवीण कुमार, सुल्तानपुर के एसपी कुंवर अनुपम सिंह और YEDA के अधिकारियों ने हलियापुर टोल प्लाजा पहुंचकर पूरी स्थिति की जांच की। अधिकारियों ने सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी कर्मचारी द्वारा तकनीकी उपकरणों का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अब आगे क्या?

पुलिस का मानना है कि यह काम अकेले किसी एक व्यक्ति का नहीं लगता। सीसीटीवी कमरे तक सीमित कुछ खास लोगों की पहुंच होती है, इसलिए जांच इस कोण से भी आगे बढ़ रही है कि क्या यह किसी संगठित समूह का काम था।

निजता से जुड़ा यह मामला एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है। जिन कैमरों का इस्तेमाल सड़क हादसों से बचाने के लिए होना चाहिए, वही अगर गलत हाथों में पड़ जाएं तो आम लोगों की जिंदगी नर्क बन सकती है यह मामला इसी खतरे का सबसे बड़ा उदाहरण है।

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