'एक हफ्ते के लिए किसानों के आंदोलन बनें हिस्सा, नहीं तो….' पंजाब की पंचायत का अजीब फरमान

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 30 जनवरी 2021, 12:00 AM 🔄 Updated: 30 जनवरी 2021, 12:00 AM
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नए कृषि कानून के विरोध में जारी किसानों के आंदोलन एक बार फिर से खड़ा होने लगा है। 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद जहां किसानों का आंदोलन कमजोर पड़ने लगा था, लेकिन अब एक बार फिर से इस आंदोलन तेज होने लगा है। गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा के बाद बड़ी संख्या में किसान वापस लौट गए थे। फिर गुरुवार रात को गाजीपुर बॉर्डर पर काफी हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जिसके बाद दोबारा से किसान इस आंदोलन से वापस लौटने लगे है।

विर्क खुर्द ग्राम पंचायत का फरमान

किसानों का अभी भी यही कहना है कि केंद्र द्वारा लाए गए नए कृषि कानून को जब तक वापस नहीं लिया जाता, तब तक वो पीछे नहीं हटेंगे। किसानों को कई संगठनों, खाप पंचायत और ग्राम पंचायत का भी इस आंदोलन में साथ मिल रहा है। पंजाब के बठिंडा की विर्क खुर्द ग्राम पंचायत भी किसानों के समर्थन में एक अजीब फरमान जारी किया। पंचायत ने एकजुटता दिखाने के लिए हर परिवार से एक सदस्य को दिल्ली बॉर्डर पर हो रहे आंदोलन में शामिल होने को कहा।

विर्क खुर्द पंचायत के इस फरमान में कहा गया कि एक हफ्ते के लिए दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन का हिस्सा हर परिवार से कम से कम सदस्य को बनना होगा। पंचायत के सरपंच मनजीत कौर ने कहा कि ऐसा नहीं करने वाले पर 1500 रुपये का फाइन लगेगा और जो फाइन नहीं देगा उसका समाज में बहिष्कार किया जाएगा।

किसान आंदोलन का अब तक का पूरा हाल

गौरतलब है कि नवंबर में किसानों ने अपने इस आंदोलन को शुरू किया था। किसानों का ये आंदोलन नए कृषि कानून के विरोध में हैं। वो इसे ‘काले कानून’ बताते हुए वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन विवाद का कोई हल नहीं निकला।

गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों ने अपने आंदोलन को तेज करते हुए दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकाली। लेकिन इस रैली के दौरान दिल्ली में जगह-जगह पर हिंसक घटनाएं हो गई। जहां किसानों ने रैली शांतिपूर्ण तरीके से निकालने का फैसला लिया था, वहीं इस घटना के बाद कई किसान नेता बुरी तरह से फंस गए। कई किसान नेताओं के खिलाफ केस दर्ज हुआ।

वहीं इसके बाद किसानों का आंदोलन भी कमजोर पड़ने लगा। कुछ संगठनों ने आंदोलन वापस लेने का फैसला लिया और बड़ी संख्या में किसान अपने घरों को लौटने लगे। लेकिन गाजीपुर बॉर्डर पर गुरुवार रात को हुए घटनाक्रम के बाद एक बार फिर से किसानों के आंदोलन को धार मिली। वहीं आंदोलन राजनीतिक होता जा रहा है। विपक्षी पार्टियां खुलकर किसानों के समर्थन में आ गई है।

आज किसान 26 जनवरी को हुई घटना को लेकर महात्मा गांधी की पुण्यतिथि को ‘सद्भावना दिवस’ के रूप में मना रहे हैं। आज किसान उपवास रख रहे हैं। इसके अलावा शुक्रवार को यूपी के मुजफ्फरनगर में किसानों की महापंचायत हुई थी, जिसमें ये फैसला लिया गया कि मुजफ्फरनगर और पश्चिमी यूपी समेत अन्यू जिलों के किसान दिल्ली कूच करेंगे। देखने वाली बात होगी कि किसानों का ये आंदोलन आगे क्या मोड़ लेगा…?

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