Pitrpaksh 2025: भूलकर भी न खरीदें ये नई चीजें, पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए रखें ध्यान

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 09 सितम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 09 सितम्बर 2025, 05:30 AM
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Pitru Paksha: हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष (Pitru Paksha) वह समय है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनका श्राद्ध करते हैं। इस दौरान कुछ नियमों का पालन करना बेहद ज़रूरी माना जाता है, जिसमें खरीदारी से जुड़े कुछ नियम भी शामिल हैं। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान कुछ चीज़ें खरीदने से पूर्वज नाराज़ हो सकते हैं और पितृ दोष लग सकता है। तो चलिए आपको इस लेख में विस्तार से बताते हैं कि पितृ पक्ष के समय किन वास्तु को नहीं खरीदे।

पितृपक्ष में इन चीजों की खरीदारी से बचें

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। 16 दिनों की यह अवधि हमारे पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित होती है। इन दिनों में किए गए हर काम का सीधा संबंध हमारे पूर्वजों से होता है। इसलिए इस दौरान कुछ चीज़ें खरीदने से बचना चाहिए जैसे…

  • लोहे का सामान – इस दौरान लोहे या लोहे से बनी किसी भी चीज को खरीदना अशुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में आ सकती है।
  • नए कपड़े और गहने –  पितृपक्ष में नए कपड़े या सोने-चांदी के गहने खरीदने से भी मना किया जाता है।
  • वाहन और प्रॉपर्टी – नया वाहन, जमीन या मकान खरीदना भी इस दौरान शुभ नहीं माना जाता है।
  • जूते-चप्पल – इस अवधि में जूते-चप्पल की खरीदारी भी वर्जित है।
  • शादी से जुड़ा सामान – पितृपक्ष में किसी भी तरह के मांगलिक कार्य के लिए सामान नहीं खरीदना चाहिए।
  • इलेक्ट्रॉनिक सामान – फ्रिज, टीवी, वॉशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण खरीदने से भी बचना चाहिए।

क्या खरीदना शुभ है?

पितृपक्ष में आप श्राद्ध और पूजा-पाठ से जुड़ी चीजें खरीद सकते हैं, जैसे जौ, काले तिल, कुशा, चावल, धूप-दीप, धार्मिक पुस्तकें आदि। इन सब चीजो से पितृ सब खुश होते है साथ ही आप इन्हें पूजा में भी प्रयोग कर सकते है. इसके अलवा आपको बता दें, काले तिल का प्रयोग तर्पण लेने के लिए भी किय जाता है. जो की पितृ पूजा के समय होता है.

जानें पितृ दोष क्या होता हैं?

भारतीय ज्योतिष के अनुसार, पितृ दोष एक ऐसी स्थिति है जो किसी व्यक्ति की कुंडली में तब उत्पन्न होती है जब उसके पूर्वजों की आत्मा को पूर्ण रूप से शांति नहीं मिली हो। ऐसा माना जाता है कि यह दोष पूर्वजों के अधूरे कर्मों, परिवार में उनके प्रति अनादर या तर्पण व श्राद्ध ठीक से न किए जाने के कारण उत्पन्न होता है। इस वजह से कई बार व्यक्ति को आर्थिक पारिवारिक, स्वास्थ्य संबंधी, संतान संबंधी समस्या आती है।

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