Organic black wheat farming: बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले को हमेशा खेती-किसानी में पिछड़े जिलों में गिना जाता रहा है, लेकिन हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं। जिले के किसान अब नई सोच के साथ खेती कर रहे हैं और परंपरागत फसलों के बजाय जैविक खेती और उच्च लाभ वाली फसलें अपनाने लगे हैं। इसी बदलाव की मिसाल हैं बाधा गांव के हरी शंकर सिंह, जिन्होंने काले गेहूं की खेती कर अपने परिवार के लिए नई कमाई का रास्ता तैयार किया है।
हरी शंकर सिंह ने बताया कि उनका मानना है कि काले गेहूं की खेती में कम लागत लगती है और यह सीधे घर से बाजार में बेचने के लिए उपलब्ध हो जाता है। “हमने जैविक खेती को इसलिए चुना क्योंकि इसमें न सिर्फ मुनाफा है, बल्कि हमारी मिट्टी भी स्वस्थ रहती है। अब हमारी उपज अच्छी हो रही है और आर्थिक रूप से भी फायदा हो रहा है,” उन्होंने बताया।
10 साल से कर रहे जैविक खेती (Organic black wheat farming)
हरी शंकर सिंह सन 2015 से खेती कर रहे हैं और इस दौरान उन्होंने पूरी तरह जैविक खेती अपनाई है। वे अपने खेतों में खुद से खाद बनाते हैं और किसी भी प्रकार का रासायनिक खाद या कीटनाशक का प्रयोग नहीं करते। उनका कहना है कि इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
अभी हरी शंकर अपने लगभग एक हेक्टेयर खेत में काले गेहूं की खेती कर रहे हैं। जैविक खाद का उपयोग करने से फसल की उपज भी अच्छी है और बाजार में इसे 70 से 90 रुपये प्रति किलो के भाव में बेचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह फसल लगभग 135 दिन में तैयार हो जाती है और काली मिट्टी होने के कारण इसमें दो बार पानी देना पड़ता है।
प्रेरणा और खेती का बदलाव
हरी शंकर सिंह ने लोकल मीडिया को बताया कि उनकी जैविक खेती की प्रेरणा सुभाष पाल (महाराष्ट्र) से मिली। सुभाष पाल के अनुभव और खेती के तरीके देखकर उन्होंने भी रासायनिक खाद छोड़कर जैविक खेती अपनाई। इसके बाद वे लगातार जैविक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं और आसपास के किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हम समय-समय पर अपनी खेती को बदलते रहते हैं। अगर किसी फसल से अच्छा मुनाफा और बेहतर उपज मिलती है तो हम उसी पर ध्यान केंद्रित करते हैं। काले गेहूं ने हमें यह दिखाया कि सही सोच और मेहनत से कम लागत में भी लाभ कमाया जा सकता है।”
जैविक खेती का महत्व
चित्रकूट जिले में हरी शंकर सिंह जैसे किसान जैविक खेती को अपनाकर न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को भी बचा रहे हैं। उनका यह कदम अन्य किसानों के लिए भी उदाहरण बन गया है। कम लागत में अच्छी फसल और बढ़ा हुआ मुनाफा किसानों की सोच में बदलाव ला रहा है।
हरी शंकर सिंह का कहना है कि आने वाले वर्षों में वे अपने अनुभव के आधार पर और नई फसलें अपनाने पर ध्यान देंगे और किसानों को जैविक खेती के लाभ के बारे में जागरूक करते रहेंगे।
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