Noida Violence Alert: नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर भड़की हिंसा के बाद अब प्रशासन ‘फुल एक्शन मोड’ में है। औद्योगिक क्षेत्रों में हुई भारी तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 300 से अधिक उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। इस पूरी साजिश के पीछे व्हाट्सएप (WhatsApp) ग्रुप्स की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिसकी गहन जांच शुरू कर दी गई है। शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात है और उपद्रवियों के खिलाफ 7 अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं।
और पढ़ें: बिहार को मिलेगा थोपा हुआ मुख्यमंत्री? अगले कुछ घंटों में होगा Bihar New CM का ऐलान!
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि नोएडा में सोमवार को मजदूरों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया और पूरे शहर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
दरअसल, इस बवाल की मुख्य वजह Noida के होजरी कॉम्प्लेक्स (Phase-2) स्थित मदरसन (Motherson) और स्टॉन्च इलेक्ट्रॉनिक्स (Staunch Electronics) जैसी कंपनियों के बाहर वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन था। श्रमिक वेतन में केवल 250 से 300 की मामूली वृद्धि से नाराज थे। कल सुबह जब बड़ी संख्या में श्रमिक मदरसन कंपनी के बाहर जुटे, तो वहां पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प हुई।
इसी दौरान लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई की कुछ वीडियो क्लिप्स और अफवाहें व्हाट्सएप ग्रुपों पर फैल गईं। इस घटना ने मजदूरों के गुस्से में घी का काम किया। इसी के विरोध में सोमवार सुबह बड़ी संख्या में श्रमिक डंडे, पत्थर और लोहे की रॉड लेकर सड़कों पर उतर आए, जिसके बाद नोएडा के सेक्टर-63, फेज-2 और सेक्टर-60 जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भारी तोड़फोड़ और आगजनी शुरू हो गई।
कई इलाकों में भारी बवाल
प्रदर्शनकारियों ने Noida के फेज-1, फेज-2 और फेज-3 औद्योगिक क्षेत्रों में जमकर उपद्रव किया। विशेषकर सेक्टर 63 (फेज-3) में तोड़फोड़ सबसे हिंसक रही। उपद्रवियों ने 500 से ज्यादा औद्योगिक इकाइयों (Industrial Units) को निशाना बनाया और 20 से ज्यादा वाहनों को आग के हवाले कर दिया, जिनमें प्राइवेट कंपनियों की बसें और पुलिस की गाड़ियाँ भी शामिल थीं।
इतना ही नहीं, उपद्रवियों ने NH-9 (पुराना NH-24) और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे जैसे अहम रास्तों को पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे दिल्ली, गाजियाबाद और परी चौक जाने वाले हजारों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
करीब 9 घंटे तक ठप रहा शहर
सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक हालात बेकाबू रहे। यानी करीब 9 घंटे तक पूरा Noida जैसे ‘बंधक’ बना रहा। ऑफिस जाने वाले लोगों और यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई। सुरक्षा के लिहाज से कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को समय से पहले घर भेज दिया या वर्क फ्रॉम होम (WFH) की सलाह दी।
कई लोग घायल, भारी आर्थिक नुकसान
इस भीषण हिंसा में 10 पुलिसकर्मियों समेत करीब 30 लोग घायल हुए हैं। औद्योगिक संगठनों के मुताबिक, इस एक दिन के बवाल से शहर को करीब 3,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। पुलिस अब तक 300 से ज्यादा उपद्रवियों को हिरासत में ले चुकी है। अब सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, मोबाइल वीडियो और फोटो के जरिए बाकी दंगाइयों की पहचान की जा रही है ताकि उन पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
किन-किन जगहों पर हुआ नुकसान?
उपद्रवियों ने कई बड़ी कंपनियों और सर्विस सेंटरों को निशाना बनाया। Motherson Group की यूनिट, Dixon Technologies जैसी बड़ी कंपनियों के गेट और खिड़कियों को भारी नुकसान पहुँचाया गया। सेक्टर-63 में मारुति और नेक्सा सर्विस सेंटर, विपुल मोटर्स सर्विस सेंटर में पर सबसे भीषण हमला हुआ था। वहाँ 35 से अधिक गाड़ियों के शीशे तोड़ना और आधा दर्जन गाड़ियों को फूंक दिया। वहीं Noida सेक्टर-62/63 के पास स्थित संचार कंपनियों की इमारतों पर भी पथराव हुआ था।
बता दें कि इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा बीएनएसएस की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू की गई है, जिसके तहत भीड़ इकट्ठा होने पर पाबंदी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दंगाइयों की पहचान कर रही है। कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है।
एक्शन में पुलिस और प्रशासन
हालात काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। फिलहाल, नोएडा में भारी पुलिस बल तैनात है, जिसमें पीएसी और आसपास के जिलों की फोर्स भी शामिल है। डीएम मेधा रूपम और पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। साथ ही Noida Entrepreneurs Association ने मंगलवार को औद्योगिक इकाइयों को बंद रखने का फैसला लिया है।
मजदूरों की मांगें और सरकार का फैसला
नोएडा (Noida) में भड़के इस आक्रोश के पीछे श्रमिकों की लंबी समय से लंबित मांगें थीं। मजदूरों की मुख्य मांग न्यूनतम वेतन को 20,000 से 25,000 (कुशल श्रेणी के लिए) तक बढ़ाने की है, क्योंकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में वेतन दरें काफी अधिक हैं। इसके अलावा श्रमिक ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, ईएसआई (ESI) और पीएफ (PF) की समय पर कटौती, हर महीने की 7 से 10 तारीख तक सैलरी, सप्ताह में एक अनिवार्य छुट्टी और काम के दौरान सुरक्षित माहौल की मांग कर रहे हैं। बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने वेतन में लगभग 21% की वृद्धि की घोषणा की है, जिसके तहत अकुशल मजदूरों का वेतन अब 13,690 और कुशल श्रमिकों का वेतन 16,868 कर दिया गया है।
पहले से थी चेतावनी
श्रमिक संगठनों ने प्रशासन और औद्योगिक इकाइयों को पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम वेतन में वृद्धि की घोषणा तो कर दी थी, लेकिन आरोप है कि श्रमिकों तक यह जानकारी समय पर नहीं पहुँचाई गई। जानकारी के अभाव और वेतन विसंगति को लेकर फैला भ्रम ही सोमवार को उग्र प्रदर्शन और हिंसा की मुख्य वजह बना।
दूसरे शहरों में भी दिखा असर
Noida से शुरू हुई इस चिंगारी का असर दिल्ली-एनसीआर के अन्य औद्योगिक शहरों में भी देखने को मिला। पलवल में प्रदर्शनकारियों ने हाईवे जाम कर दिया, वहीं फरीदाबाद और भिवाड़ी में भी श्रमिकों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। इस व्यापक आंदोलन ने पूरे क्षेत्र की औद्योगिक गतिविधियों को प्रभावित किया है।
बवाल के बाद क्या बदला?
भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन को झुकना पड़ा। सरकार ने Noida और गाजियाबाद Ghaziabad के औद्योगिक श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन में 21% की बढ़ोतरी का ऐतिहासिक ऐलान किया है। नई दरों के लागू होने के बाद अब अकुशल मजदूरों का मासिक वेतन 13,690 और कुशल श्रमिकों का वेतन 16,868 हो जाएगा। यह फैसला 1 अप्रैल से प्रभावी माना जाएगा, जिससे लाखों मजदूरों को सीधा लाभ मिलेगा।
कुल मिलाकर Noida की यह घटना स्पष्ट करती है कि यदि प्रशासन और श्रमिकों के बीच समय रहते उचित संवाद (Communication) न हो, तो हालात कितनी जल्दी बेकाबू और हिंसक हो सकते हैं। एक छोटी सी अफवाह और मामूली वेतन विसंगति ने पूरे शहर को बंधक बना दिया। अब सबकी नजर इस पर है कि 21% वेतन वृद्धि के ऐलान के बाद स्थिति कितनी जल्दी सामान्य होती है और औद्योगिक शांति फिर से बहाल हो पाती है।




























