Nagar Kirtan ban in New Zealand: नगर कीर्तन के खिलाफ प्रदर्शनों ने खड़े किए कानून-व्यवस्था पर सवाल

Shikha Mishra | Nedrick News Published: 05 जनवरी 2026, 05:37 PM Updated: 05 जनवरी 2026, 05:37 PM
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Nagar Kirtan ban in New Zealand: बीते साल 20 दिसंबर को न्यूजीलैंड की सड़को पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने न्यूजीलैंड की कानून व्यवस्था और प्रवासियों की अपनी धार्मिक संस्कृति को मानने की सुरक्षा पर ही सवाल खड़े दिये है। दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है, जिसके कारण कई जगह ये अटकलें लगाई जा रही है कि क्या न्यूजीलैंड में सिखों के किये जा रहे नगर कीर्तन को बैन कर दिया गया है, क्या न्यूजीलैंड में सिख विरोधी गतिविधिया तेज हो रही है, या फिर वाकई में इसके पीछे है कोई गहरी साजिश… तो चलिए आपको इस लेख में जानते है कि आखिर नगर कीर्तन के खिलाफ क्यों है वहां का स्थानीय समाज.. और क्यों लग रहे है सिखों के खिलाफ नारे..

जानें क्या है पूरा मामला?

दरअसल न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर में 20 दिसंबर को जब प्रकाश पर्व से पहले वार्षिक नागर कीर्तन की परेड की जा रही थी, तभी सामने से करीब 50 स्थानीय लोगो ने नजर कीर्तन के खिलाफ सामने आकर हाका प्रदर्शन किया, उन्होंने काले रंग की होर्डिंग ली हुई थी जिसमें लिखा था कि ये न्यूजीलैंड है भारत नहीं। ऑकलैंड की सड़को पर दो अलग अलग समुदाय दोनो तरफ से देखे जा सकते है। हैरानी की बात है कि सिख संगठन ने इस नगर कीर्तन के परमिशन पहले ही ली हुई थी, लेकिन फिर भी उनके धार्मिक जूलूस में बाधा डालने का काम किया गया, जब पुलिस को इसकी जानकारी मिली तो वो तुरंत मौके पर पहुंची।

सिख संगठन की मदद की और उपद्रव

बता दे कि असल में नगर कीर्तन और सिखों के खिलाफ नारे लगाने वाले लोग डेस्टिनी चर्च से जुड़े समूह “ट्रू पैट्रियट्स ऑफ न्यूजीलैंड” (True Patriots of New Zealand) के सदस्य है, उन लोगो ने परेड कर रहे सिखों पर खालिस्तानी होने का संगीन आरोप लगाया और वो नारे लगा रहे थे। कि खालिस्तानी झंडा न्यूजीलैंड में क्या रहा है। वो किसी भी खालिस्तानी समूह को न्यूजीलैंड में पांव नहीं जमाने देंगे।  हालांकि काउंसिल से पहले ही परमिशन लेने के कारण पुलिस ने सिख संगठन की मदद की और उपद्रव कर रहे प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया, जिसके बाद नगर कीर्तन की परेड फिर से शांति से आगे बढ़ी। लेकिन इन नारेबाजी के खिलाफ पुलिस ने कोई कार्यवाही भी नहीं की है।

न्यूजीलैंड में राजनीतिक हलचल

सिखो के नगर कीर्तन के खिलाफ इतने बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन को लेकर फ्री स्पीच यूनियन के कार्यकारी प्रमुख जिलीन हीथर ने आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह का विरोध करना असल में कोई काउंटर प्रोटेस्ट नहीं बल्कि सिखों के नागरिक, धार्मिक  अधिकारों की अवहेलना है।

वहीं हाका प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करने वाले ब्रायन टमकी नगर कीर्तन परेड कर रहे लोगो पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग सिख नहीं बल्कि खालिस्तानी संगठन को आगे बढ़ाने की चाल चल रहे है,  टमकी ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट करके कहा था कि नगर कीर्तन के नाम पर ऑकलैंड की सड़कों पर आतंकवादी खालिस्तान के झंडे लहराये जा रहे है, हम कोई सिख धर्म के खिलाफ नहीं है बल्कि खालिस्तानी आतंकियों के खिलाफ है, और खालिस्तानी की घिनौनी सोच को न्यूजीलैंड पर हावी होने नहीं देंगे। न्यूजीलैंड ने कब से खालिस्तानी आतंकियों को अपना झंडा लहराने और विदेशी आतंकी आंदोलन करने वाले लोगो को परेड के नाम पर आतंकी फैलाने की अनुमति दे दी है।

प्रदर्शन के खिलाफ तीखा हमला किया

वहीं सिख संगठन ने भी न्यूजीलैंड में इस प्रदर्शन के खिलाफ तीखा हमला किया, शिरोमणी अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि नगर कीर्तन को रोक कर हाका डांस करने का क्या मतलब है, ये तो सिखों के धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है। बता दें हांका एक माओरी डांस है। इस तरह से नगर कीर्तन में बांधा डालना असल में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए किया जा रहा है.. जिससे आपसी सौहार्द खराब होगा, इसलिए जरूरी है कि भारत सरकार इसमें हस्तक्षेप करें।

यानि कि जो अफवाह उड़ाई जा रही है कि न्यूजीलैंड में नगर कीर्तन बैन हो गया है, ये केवल कुछ लोगो की हरकतों का नतीजा है.. न्यूजीलैंड हर धर्म और हर जाति को विशेष मानता है, लेकिन वो किसी भी तरह की गलत हरकतों को बर्दाश्त नहीं करेंगा। मतलब साफ है कि न्यूजीलैंड में नगर कीर्तन बैन नहीं किये गए है। चर्च के सदस्यों की ये हरकत क्या ये बताने की कोशिश कर रहे है न्यूजीलैंड में सिखों के अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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