Mohd Deepak Shop controversy: हाल ही में उत्तराखंड के कोटद्वार से विवादित मामला सामने आया हैं। दरअसल, वीडियो में दिखने वाली सैकड़ों लोगो की ये भीड़ मात्र एक शख्स के खिलाफ खड़ी है… पुलिस है, प्रशासन है, लेकिन कानून व्यवस्था गई तेल लेने, क्योंकि ये भीड़ सैकड़ों वर्सेस एक है। मगर फिर भी इस एक की हुंकार के आगे पानी भरते नजर आ रहे है.. एक शेर की तरह दहाड़ने वाले इस शख्स का नाम दीपक है। जो कि पेशे से एक जिम ट्रेनर है। उसका जिम पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार में मौजूद है।
दुकान को ही शिकार बनाने का सोचा
लेकिन ये मुद्दा असल में दीपक से जुड़ा तो था ही नही… ये मुद्दा था एक कपड़े की दुकान का.. जिसका नाम था बाबा जो कि पिछले 30 सालों से इसी जगह पर इसी नाम से चल रही थी लेकिन तभी कुछ तथाकथिक हिंदूवांदियो के अंदर फिर से हिंदू मुस्लिम करने का कीड़ा काटने लगा था.. सोचा किसे शिकार बनाये..बस फिर क्या था बाबा नाम की इस दुकान को ही शिकार बनाने का सोचा कम से कम हाइलाइट में रहने के लिए मिल ही जायेगा।
बाबा रेडीमेड कपड़ो की दुकान है जिसके मालिक का नाम है वसीम सलमानी.. अचानक बजरंग दल वालों को बाबा नाम से परेशानी हो गई, क्योंकि उसकी दुकान के बगल में बजरंगबली का मंदिर है, जिसका नाम है बाबा सिद्ध बली.. 26 जनवरी के दिन का एक वीडियो सामने आया। जिसके बजरंग दल के कुछ लोग सलमानी की दुकान में घुस आये और सलमानी से कहा कि या तो वो दुकान का नाम बदल लें या फिर खुद को सनातनी बना लें, क्योंकि बाबा शब्द पर तो इन सो कोल्ड हिंदूवादियों का कॉपीराइट जो है।
बजरंगदल वालों को तो बस मुद्दा चाहिए
वसीम ने काफी समझाया कि पिछले 30 सालो से यहीं नाम है। लेकिन बजरंगदल वालों को तो बस मुद्दा चाहिए था हिंदू मुस्लिम करने का.. तो वो क्यों पीछे हटते.. ये बहस चल रही ही रही थी कि दीपक नाम का एक शख्स वहां पहुंच गया, जिसने नाम न बदलने को लेकर बहस शुरु कर दी, बहस करते करते आरोपी युवक दीपक से उसका नाम पूछते है। और दीपक के जवाब ने सबको हैरान कर दिया था दीपक ने कहा मोहम्मद दीपक बस फिर क्या था। बजरंग दल वालो को तो मौका मिल गया किसी को बलि का बकरा बनाने का तो ले दे कर दीपक के ही खिलाफ नारेबाजी शुरु कर दी अब जानते है कि दीपक क्या सोचते है और मौहम्मद दीपक की अपनी क्या कहानी है।
बजरंग दल वालो ने बाबा नाम को बदलने को कहा
मोहम्मद दीपक जिनका असली नाम दीपक कुमार कश्यप है, और पेशे से एक जिम ट्रेनर है। बजरंग दल वालो ने बाबा नाम को बदलने को कहा लेकिन तब इन लोगों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि इस बार उनका सामना किसी कमजोर नहीं हुआ है। जो उनके सामने है वो अकेले सब पर भारी है। एक कहावत है खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे..बस जब दीपक पर जोर नहीं चला तो उसके खिलाफ ऐसे ऐसे नारे लगाये..जो केवल इस बात का प्रमाण है। कि इन कुछ लोगो ने धार्मिक सौहार्द को बर्बाद करने के लिए, और मुसलमानों के खिलाफ इनकी मानसिकता कितनी विकृत है कि उन्हें अब नाम से भी परेशानी होने लगी।
सौहार्द बिगाड़ने का काम तो मुसलमान करते
दीपक मुल्ला भाग गया दीपक कटुआ भाग गया दीपक मुल्ले के है साथ में..चूड़ी पहन ले हाथ में जैसे अपमानित शब्दों का सरेआम इस्तेमाल किया जा रहा है.. मुसलमानों के खिलाफ चलने वाली आंधी को हवा दी जा रही है… और फिर ये तथाकथित हिंदूवादी आरोप लगाते है कि सौहार्द बिगाड़ने का काम तो मुसलमान करते है। समझने वाली बात ये है कि बाबा शब्द पर इन बजरंगदल वालों का कॉपीराइट कब से हो गया। दीपक ने तो केवल इंसानियत के तौर एक बुजुर्ग का साथ दिया था, जिनका सालो की पहचान को डुबाने की कोशिश कर रहे थे ये तथाकथित हिंदूदल वाले लेकिन ये लोग उल्टा दीपक के ही पीछे पड़ गए। दीपक का साथ देने वालो को चूड़िया पहनने की सीख दे रहे है।
हिंदू मुसलमान करने वाले लोग
मतलब क्या है.. चूड़िया इन लोगो को कमजोरी की निशानी लगती है। अगर ये चूड़िया वाले हाथ उन्हें इस दुनिया में लाने की गलती नहीं करते तो शायद इन्हें कभी मौका ही नहीं मिलता कि चूड़ियों को कमजोरी की निशानी समझे.. औरते आज फाइटर प्लेन चला रही है। लेकिन इन जैसे विकृत सोच वालों के लिए आज भी औरते चूड़िया पहनने वाली कमजोर है। इन लोगों के ये नारे केवल हिंदू मुसलमान करने वाले ही नहीं है बल्कि ये हर उस औरत के खिलाफ है जो चूड़िया पहनती है। ये केवल इस बात का प्रमाण है कि इन लोगो की किसी के धर्म, जाति या समुदाय से मतलब नहीं है, उन्हें केवल सुर्खियों में रहना है।
पुलिस वाले इस मामले को शांत भी कराना चाहते
चाहे उसके लिए उन्हें किसी को भी निशाना बनाना पड़े। और इन सब में सबसे हैरान करने वाली भूमिका तो पुलिस वालो की रही..जिनसे ये चंद लोग संभल ही नहीं रहे थे, इन्हें संभालने के लिए सीएम की सुरक्षा में लगाये गए पुलिस कर्मियों को बुलाना पड़ा था। अब सवाल ये है कि क्या वाकई में ये पुलिस वाले इस मामले को शांत भी कराना चाहते थे या नहीं वहीं इतना हंगामा करने के बाद भी अभी तक करीब एक हफ्ता बीत गया है लेकिन पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की है, उल्टा जब दीपक ने खतरा होने का हवाला देकर मदद मांगी तो इसे आपसी मामला बता कर रफा कफा करवाने की कोशिश की गई।
ये विवाद आज राष्ट्रीय मुद्दा बना हुआ है लेकिन वहां के डिप्टी एसपी चंद्रमोहन सेमवाल, एसपी सर्वेश पवार, डीआईजी करण सिंह नामगियाल जैसे बड़े पदों पर बैठे लोगो से भी ये कुछ दंबग लोग संभाले नहीं जा रहे है.. न तो उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है और न ही कोई कार्यवाई आखिर किस दवाब में है ये लोग किसकी शय पर ये चंद लोग कानून को अपनी जूतो की नोक पर रख कर सरेआम माहौल खराब कर रहे है, लेकिन पुलिस ने उनकी नाक में नकेल कसने के बजाय आजाद छोड़ रखा हुआ है। वहीं अगर उन्मादी अगर मुसलमान होते तो क्या होता इनके घर परिवार सब तबाह हो गये होते।





























