MP Bhojshala: क्या धर्म इंसानियत से बड़ा हो सकता है? मज़हब का मक़सद इंसान को इंसान बनाना था, लेकिन आज का इंसान धर्म की रक्षा में इंसानियत ही भूल बैठा है। ईश्वर या अल्लाह ने कभी किसी की आस्था को ठेस पहुँचाकर इबादत करने की सीख नहीं दी। फिर मंदिर-मस्जिद के इस दंगल में हम एक-दूसरे के जज़्बात क्यों कुचल रहे हैं? अदालतें कागज़ी सबूतों और इतिहास के पन्नों को देखकर फैसला दे देती हैं, मगर सवाल यह है कि उसके बाद समाज में पनपने वाली नफ़रत और हिंसा की ज़िम्मेदारी किसकी? इसका इंसाफ कौन करेगा?
इस संवेदनशील सवाल के बीच, मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के धार जिले में स्थित भोजशाला (Bhojshala) को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर आज, 15 मई 2026 को हाई कोर्ट का एक बड़ा फैसला आया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को माता वाग्देवी का मंदिर माना है।
कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेज, साहित्य और एएसआई (ASI) की सर्वे रिपोर्ट यह साबित करते हैं कि भोजशाला का निर्माण परमार वंश के राजा भोज के समय हुआ था और यह जगह उस दौर में संस्कृत सीखने और शिक्षा का प्रमुख केंद्र थी। अदालत ने यह भी माना कि यहां हिंदू पूजा की परंपरा कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। यानी सदियों से यहां पूजा-अर्चना लगातार होती रही है।
क्या है पूरा विवाद
दरअसल भोजशाला (Bhojshala) को लेकर कई सालों से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद चल रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर और संस्कृत पाठशाला मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। अब तक यहां एक तय व्यवस्था लागू थी। इसके तहत हिंदू समुदाय मंगलवार को पूजा करता था, जबकि मुस्लिम समुदाय शुक्रवार को नमाज अदा करता था। हाई कोर्ट के इस फैसले को कई लोग अयोध्या मामले (Ayodhya Verdict) के बाद धार्मिक और ऐतिहासिक मामलों में एक बड़ा फैसला मान रहे हैं।
ASI की रिपोर्ट को माना अहम आधार
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि Archaeological Survey of India यानी ASI की सर्वे रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय को ध्यान से देखने के बाद यह निर्णय लिया गया है। अदालत ने ASI को इस ऐतिहासिक स्थल की सुरक्षा और संरक्षण जारी रखने का निर्देश भी दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है कि वह प्राचीन स्मारकों, मंदिरों और ऐतिहासिक महत्व वाले धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
मुस्लिम पक्ष को अलग जमीन मांगने की सलाह
फैसले में कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से कहा कि अगर वे नमाज जारी रखना चाहते हैं तो वे सरकार से धार जिले में अलग जमीन की मांग कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार इस मांग पर विचार कर सकती है।
सरस्वती प्रतिमा को वापस लाने की भी चर्चा
इसके साथ ही कोर्ट ने अपने आदेश में उस मांग का भी जिक्र किया जिसमें लंदन के संग्रहालय में रखी देवी सरस्वती की मूर्ति को वापस भारत लाकर भोजशाला (Bhojshala) में स्थापित करने की बात कही गई है। अदालत ने केंद्र सरकार को इस विषय पर आवश्यक कदम उठाने और प्रयास करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने साक्ष्यों और कानून के तराजू पर तौलकर अपना फैसला सुना दिया है। कानूनी रास्ते हमेशा खुले रहते हैं और इसके खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील का विकल्प भी मौजूद है। लेकिन सबसे बड़ा इम्तिहान अब हमारे समाज का है। जीत और हार के इस माहौल में यह याद रखना बेहद ज़रूरी है कि कोई भी फैसला आपसी भाईचारे, शांति और इंसानियत से बड़ा नहीं हो सकता। कानून का सम्मान करना और समाज में शांति बनाए रखना हम सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।



























