क्या Azaan के लिए जरूरी है लाउडस्पीकर? जानें क्या कहते हैं इसको लेकर नियम और कानून…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 23 अप्रैल 2022, 05:30 AM Updated: 23 अप्रैल 2022, 05:30 AM
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देश में इस वक्त बड़ी बहस का एक मुद्दा बना हुआ है लाउडस्पीकर। पिछले कुछ समय से लाउडस्पीकर से होने वाली अजान का विरोध बढ़ रहा है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है, जब लाउडस्पीकर से अजान के विवाद ने तूल पकड़ा हो। पहले भी ऐसा हुआ है। लेकिन पिछले कुछ समय से इसके विरोध में स्वर तेज हो गए। देश में लाउडस्पीकर से होने वाली अजान पर रोक लगने की मांग उठ रही है। 

इस पूरे विवाद के बीच एक सवाल उठता है कि मस्जिद में अजान लाउडस्पीकर से ही क्यों होती है? क्या अजान के लिए लाउडस्पीकर जरूरी है? 

लाउडस्पीकर जरूरी है या नहीं?

अजान का मतलब है होता है पुकारना। नमाज के लिए जोर-जोर से बुलाने को अजान कहा जाता है। इतिहास की बात करें तो जब धर्म बने तब लाउडस्पीकर नहीं होते थे। पहले के वक्त में इमाम तेज आवाज से अजान पढ़ते, जिससे आसपास रह रहे लोगों को पता चल जाता कि नमाज का वक्त हो गया है और  मस्जिद में आ जाते। आज के समय ऐसा कई जगहों पर होता है, जहां लाउडस्पीकर नहीं है। इसके अलावा कई देश ऐसे भी हैं, जहां मस्जिदों में लाउडस्पीकर नहीं होते, वहां पर तेज आवाज में अजान पढ़ी जाती है। 

इस्लाम धर्म के हिसाब से देखें तो अजान के लिए मस्जिदों में लाउडस्पीकर की जरूरत नहीं होती। अजान तो नमाज के लिए लोगों को बुलाने का एक तरीका है। इसलिए अजान लाउडस्पीकर से हो या फिर नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। धर्म का इससे कोई लेना-देना नहीं है। 

…तो क्यों बजाए जाते हैं लाउडस्पीकर?

लाउडस्पीकर से अजान पर अलग-अलग तर्क बातें कही जाती हैं। पहले मस्जिदों में इमाम को तेज आवाज में अजान देने पड़ती थीं, जिसमें काफी मेहनत लगती। इसके बाद अजान के लिए धीरे-धीरे लाउडस्पीकर चलन में आ गया और हर मस्जिद में इसका इस्तेमाल किया जाने लगा। इससे इमाम को भी ज्यादा परेशानी नहीं होती और ज्यादा लोगों तक आवाज भी पहुंच जाती है। 

क्या है लाउडस्पीकर को लेकर नियम?

नियम बताते हैं कि पब्लिक प्लेस में लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने से पहले प्रशासन से लिखित मंजूरी लेना जरूरी होता है। रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने की इजाजत नहीं होती। हालांकि बंद स्थानों पर जैसे ऑडिटोरियम, कम्यूनिटी हॉल, कॉन्फ्रेंस हॉल और बैंक्वेट हॉल पर इसे बजाया जा सकता है। हालांकि अगर राज्य सरकार चाहें तो कुछ खास मौकों पर इसमें छूट दे सकते हैं। वो समय बढ़ा भी सकते हैं। लेकिन ऐसा सिर्फ साल में 15 दिन ही किया जा सकता है। 

अब क्यों हो रहा लाउडस्पीकर से अजान पर बवाल?

अजान को लेकर इस बार विवाद महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा हो रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे की ओर से मांग उठी है कि लाउडस्पीकर से बजने वाली अजान को बंद कराया जाए। इसके लिए उन्होंने अल्टीमेटम भी दिया है। राज ठाकरे ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मस्जिदों में लाउडस्पीकर बंद नहीं हुए तो तो हम स्पीकर पर हनुमान चालीसा बजाएंगे। महाराष्ट्र से शुरू हुए इस विवाद की आंच देश के अन्य शहरों में भी पहुंच रही है। कई शहरों में हिंदू संगठनों की ओर से तेज आवाज में हनुमान चालीसा का पाठ भी शुरू किया गया। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी की ओर से निर्देश दिए गए कि धार्मिक स्थलों में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसकी आवाज केवल परिसर तक ही सीमित की जाएं। 

अब जब लाउडस्पीकर को लेकर इतनी बहस देशभर में छिड़ी हुई है, तो ऐसे में इसको लेकर नियम जानना भी जरूरी होता है। क्या है लाउडस्पीकर बजाने को लेकर नियम? आइए इसके बारे में भी जान लेते हैं…

विवाद बढ़ता बढ़ता अब सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है। पूरे मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका भी दाखिल की गई है। ये पीटिशन हिंदू महासभा की ओर से दाखिल की गई याचिका में मांग की गई कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट स्वत: संज्ञान लें। मांग की गई है कि लाउडस्पीकर से मस्जिदों में होने वाली अजान पर बैन लगाया जाए। 

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