कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के चीते की गोली लगने से मौत: शरीर से निकले 5 छर्रे, केंद्र ने भेजी जांच टीम| Kuno cheetah cub death

Nandani | Nedrick News Madhya Pradesh Published: 28 अक्टूबर 2026, 09:56 PM Updated: 28 अक्टूबर 2026, 09:56 PM
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Kuno cheetah cub death: भारत में चीतों को फिर से बसाने की महत्वाकांक्षी परियोजना को उस वक्त बहुत बड़ा झटका लगा, जब मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के एक युवा नर चीते की बंदूक के छर्रे लगने से जान चली गई। मादा चीता ‘निर्वा’ के इस शावक (कोडनेम: केएनजी22) को बचाने के लिए डॉक्टरों ने ऑपरेशन तक किया और उसके शरीर से पांच पैलेट्स (गोली के छर्रे) बाहर निकाले, लेकिन गंभीर घावों के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। इस चौंकाने वाली घटना के सामने आते ही हड़कंप मच गया है और केंद्र सरकार ने फौरन एक उच्चस्तरीय जांच दल को ग्राउंड पर उतार दिया है।

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घायल हालत में मिला था चीता, ऑपरेशन के बाद तोड़ा दम| Kuno cheetah cub death

मध्य प्रदेश की प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन डॉ. समीता राजौरा के अनुसार, केएनजी22 को 25 अक्टूबर को श्योपुर टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन के कंपार्टमेंट नंबर 748 के पास गंभीर रूप से जख्मी हालत में देखा गया था। शुरुआती एक्स-रे में उसके शरीर के विभिन्न हिस्सों में कुछ बाहरी धातु के टुकड़े दिखाई दिए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चीते को फौरन जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय भेजा गया। वहां वेटरनरी सर्जरी और रेडियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने ऑपरेशन कर उसके जिस्म से बंदूक के पांच छर्रे निकाले। तमाम कोशिशों के बावजूद चीता जिंदगी की जंग हार गया।

शिकार या मवेशियों के बचाव में चली गोली? जांच में जुटी टीमें

डॉ. राजौरा ने बताया कि जिस इलाके में यह घटना घटी, वह पहले से ही काफी संवेदनशील रहा है और वहां अतीत में तेंदुओं के शिकार की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। अधिकारी अब इस बात की तफ्तीश कर रहे हैं कि क्या यह किसी पेशेवर शिकारी गिरोह की करतूत है या फिर किसी स्थानीय ग्रामीण ने अपने पालतू मवेशियों को बचाने के चक्कर में चीते पर फायर झोंक दिया।

इसके अलावा सबसे बड़ा सवाल निगरानी तंत्र पर खड़ा हो रहा है। हर चीते की 24 घंटे ट्रैकिंग के लिए एक मॉनिटरिंग टीम तैनात रहती है और चीते के गले में रेडियो कॉलर बंधा होता है। ऐसे में जांच इस बिंदु पर भी होगी कि मॉनिटरिंग टीम को गोली चलने की आवाज क्यों नहीं आई और क्या रेडियो कॉलर ट्रैकिंग में कोई बड़ी चूक हुई।

केंद्र की हाई-लेवल टीम रवाना, एक्टिविस्ट्स ने खड़े किए तीखे सवाल

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 28 अक्टूबर को एनटीसीए (NTCA) के आईजी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के अतिरिक्त निदेशक और क्षेत्रीय उपनिदेशक की एक उच्चस्तरीय टीम मौके पर भेजी है। मध्य प्रदेश सरकार ने भी वन और पुलिस महकमे की संयुक्त एसआईटी (SIT) बनाई है।

वहीं, मध्य प्रदेश के वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने वन विभाग की सुरक्षा प्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चीता रेडियो कॉलर पहने घूम रहा था, तो उसकी लोकेशन शिकारियों तक कैसे पहुंची और निगरानी टीम उस वक्त क्या कर रही थी? उन्होंने याद दिलाया कि 2025 और 2026 में इसी इलाके से तेंदुओं के अंगों की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह पकड़े गए थे, लेकिन विभाग ने उन घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया।

देश में अब 58 चीते बाकी

केएनजी22 की असमय मौत के बाद अब देश में चीतों की कुल संख्या घटकर 58 रह गई है। इनमें से 52 चीते कूनो नेशनल पार्क में, 4 गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में और 2 वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में मौजूद हैं। गौरतलब है कि भारत में चीतों की वापसी का यह ऐतिहासिक प्रोजेक्ट सितंबर 2022 में नामीबिया से 8 और फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाकर शुरू किया गया था।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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