Gyanesh Kumar CEC controversy: भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दायर कर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग ने साफ कहा है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े तमाम फैसले किसी एक व्यक्ति की मर्जी से नहीं, बल्कि पूरे आयोग की आम सहमति से लिए गए थे। यह हलफनामा उन याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि बाकी दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने स्तर पर फैसले ले लिए।
‘अखबार की रिपोर्ट पर टिकी है याचिका, आयोग में सब कुछ तय नियमों से हुआ’| Gyanesh Kumar CEC controversy
उप चुनाव आयुक्त भानु प्रकाश येतुरू के जरिए दाखिल इस हलफनामे में आयोग ने स्पष्ट किया कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के तीनों एसआईआर आदेश सर्वसम्मत थे। इन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी ने मिलकर मंजूरी दी थी।
आयोग ने दलील दी कि यह पूरी याचिका एक अखबार की खबर पर आधारित है और याचिकाकर्ता ने तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि तक नहीं की, इसलिए यह सुनवाई योग्य ही नहीं है। चुनाव आयोग ने आंतरिक कामकाज का ब्योरा देते हुए बताया कि फाइलों पर दर्ज टिप्पणियां, सवाल या नोट अंतिम फैसले नहीं होते। फाइल पहले एक आयुक्त, फिर दूसरे और आखिर में सीईसी के पास जाती है। आयोग ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 के तहत सभी फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से लेने का प्रावधान है, जिसका पूरी तरह पालन हुआ है।
फॉर्म 6 में बदलाव के आरोपों पर दी सफाई
हलफनामे में आयोग ने इस बात का भी खंडन किया कि एसआईआर के आदेशों के जरिए फॉर्म 6 में कोई गैरकानूनी फेरबदल किया गया। आयोग ने साफ किया कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत फॉर्म में बदलाव का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है। आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर के तहत मांगा जाने वाला घोषणा-पत्र महज एक अलग दस्तावेज है, जो आवेदकों को पिछली गहन सूचियों से जोड़ने (मैपिंग) के लिए तैयार किया गया था। हालांकि, आयोग ने यह जरूर माना कि ऑनलाइन पोर्टल पर इसे जिस तरह पेश किया गया था, उससे कुछ लोगों को यह गलतफहमी हो सकती है कि फॉर्म 6 ही बदल दिया गया है।
मतदाताओं को राहत: घर-घर जाएंगे बीएलओ, सुनवाई के लिए भटकने की जरूरत नहीं
आम मतदाताओं को राहत देते हुए आयोग ने बताया कि जिन लोगों के नाम पुरानी सूचियों से सीधे मैच नहीं हो रहे हैं, उन्हें व्यक्तिगत रूप से दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) खुद घर जाकर दस्तावेज लेंगे और उन्हें ECINet पोर्टल पर अपलोड करेंगे। बहुत असाधारण मामलों में ही सुनवाई होगी और वह भी ऑनलाइन माध्यम से की जाएगी।
हटाने की मांग पर संवैधानिक हवाला, आज सुनवाई
ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग पर आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324(5) का हवाला दिया। आयोग ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह महाभियोग जैसी संवैधानिक प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है, ऐसे में उन्हें काम करने से रोकने की याचिका टिकने लायक नहीं है।
यह पूरा मामला राकेश कुमार सिंह, वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और बाद में राहुल गांधी व मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी नेताओं की याचिकाओं से जुड़ा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस पूरे मामले पर अहम सुनवाई कर रही है। अदालत ने पहले ही ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा था कि वह कानूनी पहलुओं की पूरी जांच करेगी।













































