छोटे कद के कारण लोग उड़ाते थे मजाक, ऐसे बदला लोगों का नजरिया, जानिए पंजाब के पठानकोट के दिलप्रीत सिंह की कहानी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 05 नवम्बर 2024, 05:30 AM Updated: 28 दिसम्बर 2025, 09:04 AM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

Delivery Boy Dilpreet Singh Success story: पंजाब (Punjab) के पठानकोट में संत आश्रम गुरुद्वारा (Pathankot Sant Ashram Gurudwara) की प्रबंधन समिति ने 19 वर्षीय दिलप्रीत सिंह को सेवादार नियुक्त किया है। दिलप्रीत, जो मात्र तीन फुट पांच इंच लंबे हैं और कभी अपनी कम हाइट के कारण मज़ाक का विषय थे, अब लोग उन्हें सम्मानपूर्वक ‘छोटे प्रधान जी’ या ‘सरदार जी’ कहकर बुलाते हैं। अपने कठिन हालातों से लड़कर दिलप्रीत ने न केवल समाज में अपने लिए सम्मान अर्जित किया है, बल्कि अपने जैसे लोगों के लिए एक अनूठी मिसाल भी कायम की है।

और पढ़ें: पंजाब में सिख समुदाय के लोगों ने मुसलमानों के लिए बनाई मस्जिद, भाईचारे की बना मिसाल

गुरुद्वारे में सेवा की शुरुआत

दिलप्रीत सिंह ने संत आश्रम गुरुद्वारा से अपनी सेवा शुरू की, जहाँ वे हर रोज़ रात 8 बजे तक काम करते हैं। गुरुद्वारा में उनकी ज़िम्मेदारियों में प्रसाद, लंगर की व्यवस्था और अन्य सेवाओं का प्रबंधन शामिल है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, वे हर रोज़ रात 8 बजे तक गुरुद्वारा में सेवा करते हैं और उसके बाद रात 11 बजे तक डिलीवरी बॉय के तौर पर काम करते हैं। उनकी मेहनत और लगन समाज में प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनके समर्पण ने साबित कर दिया है कि सीमित शारीरिक क्षमताएँ भी किसी के समर्पण और साहस को कम नहीं कर सकतीं।

Delivery Boy Dilpreet Singh Success story
source: google

‘छोटे प्रधान जी’ की पहचान- Delivery Boy Dilpreet Singh Success story

छोटे कद के कारण दिलप्रीत को अक्सर लोगों के ताने और मज़ाक सुनने पड़ते थे। लेकिन समय के साथ उनकी लगन और मेहनत ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। आज लोग उन्हें प्यार और सम्मान से ‘छोटे प्रधान जी’ या ‘सरदार जी’ कहकर बुलाते हैं। उन्हें यह सम्मान उनके ईमानदार प्रयासों और गुरुद्वारे में उनकी सेवाओं के कारण मिला है।

दोहरी मेहनत: डिलीवरी बॉय के रूप में कार्य

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में दिलपरित बताते हैं कि उन्होंने लॉकडाउन में 12वीं की पढ़ाई पूरी की। लॉकडाउन के बाद उन्होंने 100 रुपये प्रतिदिन पर दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम किया। वो कहते हैं, ‘मैं सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक काम करता था। फिर मैंने एक कपड़े की दुकान पर काम किया, दुकान का मालिक म्युनिसिपल कमिश्नर था और वो मुझे अपने साथ सड़कें ठीक करने के लिए ले जाता था जिसके लिए मुझे 1500 रुपये महीने मिलते थे लेकिन ये आजीविका के लिए काफी नहीं था। इसके बाद मैंने आगे बढ़ने का फैसला किया, मैं एक जौहरी के पास गया और दिन में दो बार गुरुद्वारे में माथा टेकता था। फिर एक दिन कुछ लोगों को मेरे बारे में पता चला और उन्होंने मुझे समझाया और कहा कि तुम हमारे सिख भाई हो, तुम ये बेकार का काम नहीं करोगे, तुम्हें गुरुद्वारे में काम करना चाहिए।’

Delivery Boy Dilpreet Singh Success story
source: google

वहीं, गुरुवार संत कमेटी के लोग भी दिलप्रीत के काम से काफी खुश हैं, उनका कहना है कि दिलप्रीत पूरे मन से और बड़ी मेहनत से काम करता है।

समाज के लिए प्रेरणा

दिलप्रीत सिंह की कहानी (Delivery Boy Dilpreet Singh Success story) सिर्फ़ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह समर्पण, सेवा और साहस की कहानी है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, व्यक्ति अपनी हिम्मत और मेहनत से हर चुनौती को पार कर सकता है। गुरुद्वारे में उनकी सेवा और उनके अन्य कार्यों ने उन्हें समाज में एक आदर्श व्यक्तित्व बना दिया है।

और पढ़ें: Gurdwara Sahib in Pakistan: जर्जर हाल में है भारत-पाक सीमा स्थित ये पवित्र गुरुद्वारा, कभी गुरु नानक देव आए थे यहां

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds