शिक्षा के क्षेत्र में सीएम केजरीवाल का क्रांतिकारी फैसला, अब दिल्ली का होगा अपना अलग शिक्षा बोर्ड

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 06 मार्च 2021, 05:30 AM Updated: 06 मार्च 2021, 05:30 AM
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दिल्ली की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार आने का बाद दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले सरकारी स्कूलों की कायाकल्प ही बदल गई है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों की सुविधाएं और शिक्षा व्यवस्था की बराबरी करना अन्य राज्य सरकारों के लिए बड़ी चुनौती है।

दिल्ली सरकार हर साल अपने बजट का 25 फीसदी शिक्षा के क्षेत्र में खर्च करती है। जो भारत के किसी भी राज्य द्वारा शिक्षा पर लगाए जाने वाला सबसे बड़ा बजट है। इसी बीच दिल्ली सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक ऐलान किया है। सीएम अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (Delhi Board of School Education) के गठन को मंजूरी दे दी है।

अन्य राज्यों से अलग होगा यह शिक्षा बोर्ड

सीएम केजरीवाल ने कहा, ‘दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन’ (Delhi Board of School Education) की स्थापना दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे क्रांतिकारी परिवर्तन को नई ऊंचाइयों की तरफ लेकर जाएगा। उन्होंने कहा, आज हमने दिल्ली की कैबिनेट में दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन के गठन को मंजूरी दे दी है। 

उन्होंने कहा, ‘ये बोर्ड 3 लक्ष्य पूरे करेगा। हमें ऐसे बच्चे तैयार करने हैं जो कट्टर देशभक्त हों, जो आने वाले समय में हर क्षेत्र में देश की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाने के लिए तैयार हों। हमारे बच्चे अच्छे इंसान बनें और ये बोर्ड बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए तैयार करेगा।‘ सीएम ने कहा, इसके बाद दिल्ली का अब अपना अलग शिक्षा बोर्ड होगा। और ये बाकी राज्यों के शिक्षा बोर्ड से अलग होगा।

दिल्ली बोर्ड ऑफ एजुकेशन के तीन बड़े लक्ष्य

सीएम ने कहा, पूरे देश ने देखा है दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में किस कदर क्रांतिकारी परिवर्तन आई हैं। स्कूलों में शिक्षा में सुधार किया गया है, बच्चों के रिजल्ट 98 फीसदी तक आ रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि ये अंतरराष्ट्रीय स्तर का बोर्ड बनाया जा रहा है। इंटरनेशनल प्रैक्टिस को हम स्कूलों और बोर्ड में लेकर आएंगे। 

उन्होंने कहा, इस साल 20-25 सरकारी स्कूलों को इस बोर्ड में शामिल किया जाएगा। हमें उम्मीद है कि 4-5 साल में स्वेच्छा से सारे सरकारी, निजी स्कूल बोर्ड में शामिल हो जाएंगे।

उन्होंने दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन के 3 बड़े लक्ष्यों को लेकर स्थिति स्पष्ट की। सीएम ने कहा बोर्ड के 3 लक्ष्य…पहला देश की जिम्मेदारी उठाने के लिए विद्यार्थी तैयार हों, दूसरा किसी भी धर्म, जाति और अमीर-गरीब का फर्क भूल अच्छे इंसान बने और तीसरा बच्चों को रोजगार मांगने के लिए नहीं रोजगार देने के लिए तैयार किया जाएगा।

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