Jind Human Skeleton: तालाब में निकले नरकंकाल! 8 फीट लंबी हड्डियाँ और रहस्यमयी चीजें देख दहले लोग

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 23 जून 2025, 05:30 AM Updated: 23 जून 2025, 05:30 AM
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Jind Human Skeleton: हरियाणा के जींद जिले के जुलाना के देवरड़ गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब मनरेगा के तहत तालाब की खुदाई कर रहे मजदूरों को तालाब में नर कंकाल और प्राचीन मटके मिले। यह घटना इलाके में सनसनी का कारण बन गई और पुलिस तथा प्रशासन को तत्परता से कार्रवाई करनी पड़ी। तालाब की खुदाई का काम सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से चल रहा था, लेकिन जब मजदूरों को मानव कंकाल मिले, तो काम को रोक दिया गया और तुरंत जांच शुरू कर दी गई।

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खुदाई के दौरान मिलीं नर कंकाल- Jind Human Skeleton

गांव के तालाब में खुदाई के दौरान मजदूरों को अचानक कुछ मटके दिखाई दिए। जब उन्होंने गहराई में खोदा, तो वहां मानव कंकाल भी मिले। अब तक तालाब से लगभग 12 नर कंकाल मिल चुके हैं। इन कंकालों की लंबाई सामान्य से अधिक बताई जा रही है और उनके जबड़े भी काफी बड़े हैं। अनुमान के मुताबिक, कंकालों की लंबाई लगभग 8 फीट तक हो सकती है। कंकालों की हालत को देखकर यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये सालों पुराने हैं और संभवतः प्राचीन समय के हो सकते हैं।

तालाब की जगह पहले था कब्रिस्तान

देवरड़ गांव के निवासी राममेहर ने इस घटना को लेकर जानकारी दी कि आजादी से पहले इस गांव के तालाब की जगह कब्रिस्तान हुआ करता था। गांव के बुजुर्गों के अनुसार, तालाब बनने से पहले यहां मुस्लिम समाज के लोग रहते थे और यही जगह कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल होती थी। बाद में यह जगह बंजर हो गई और यहां पर तालाब का निर्माण किया गया। अब इस स्थान पर तालाब की खुदाई के दौरान मिले कंकालों को पुराने कब्रिस्तान में दफनाए गए लोगों के कंकाल माना जा रहा है।

खुदाई का काम रोका गया

जुलाना के बीडीपीओ प्रतीक जांगड़ा ने बताया कि मनरेगा स्कीम के तहत तालाब की खुदाई की जा रही थी। जब खुदाई के दौरान नर कंकाल मिले, तो काम को रोक दिया गया और प्रशासनिक टीम मौके पर जाकर जांच कर रही है। इसके बाद ही काम फिर से शुरू किया जाएगा। इस घटना से इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और लोग इस रहस्यमय घटनाक्रम को लेकर हैरान हैं।

नर कंकाल के साथ मिले प्राचीन मटके

तालाब में खुदाई के दौरान कंकालों के अलावा कुछ पुराने और टूटे-फूटे मटके भी मिले हैं। इन मटकों को देखकर यह माना जा सकता है कि यह जगह प्राचीन काल में किसी महत्वपूर्ण गतिविधि का केंद्र रही होगी। मजदूरों ने इन मटकों और कंकालों को एक स्थान पर जमा कर दिया है। कंकालों के साथ-साथ एक नर कंकाल की लंबाई लगभग 7 से 8 फीट बताई जा रही है, और इसके साथ जो जबड़ा मिला है, वह आम आदमी के जबड़े से काफी बड़ा है।

पौराणिक महत्व वाला गांव

देवरड़ गांव का पौराणिक महत्व भी है। जुलाना क्षेत्र में स्थित श्याम जी का मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कौरवों और पांडवों के कुल गुरु द्रोणाचार्य ने इस गांव में तपस्या की थी। इस कारण से गांव का प्रारंभिक नाम ‘द्रोणागढ़’ पड़ा था, जिसे बाद में ‘देवरड़’ कर दिया गया। गांव का इतिहास लगभग 700 साल पुराना है और इस दौरान गांव के पास एक तालाब भी था, जो आज भी मौजूद है, हालांकि समय के साथ यह तालाब अब कुंड में बदल गया है।

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