मेरी नजर में बूचर था KPS Gill, जबरदस्ती गाने के लिए किया मजबूर- सिंगर Jasbir Jassi ने 'सुपरकॉप' पर लगाए आरोप!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 07 मई 2022, 05:30 AM Updated: 07 मई 2022, 05:30 AM
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‘दिल ले गई कुड़ी पंजाब दी’ जैसे सॉन्ग गाने वाले जसबीर जस्सी एक बेहद ही मशहूर पंजाबी सिंगर हैं। बीते दिनों से जसबीर जस्सी एक अलग वजह से सुर्खियों में आ गए। दरअसल, जसबीर जस्सी ने पंजाब पुलिस के पूर्व दिवंगत DGP केपीएस गिल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ‘सुपरकॉप’ के नाम से पहचाने जाने वाले केपीएस गिल पर जबरदस्ती गाने और गजल गाने के लिए मजबूर करने के आरोप लगाए। यही नहीं सिंगर ने तो ये तक दावा किया कि गिल ने उन्हें किडनैप कराया था। इस दौरान जसबीर जस्सी ने केपीएस गिल को बूचर तक कह दिया। 

जसबीर जस्सी ने क्या कहा?

लाइव वीडियो में जसबीर जस्सी ने कहा कि अपने करियर की शुरुआत में एक साल तक उन्होंने पंजाब पुलिस के साथ काम किया। तब पंजाब पुलिस के दिवंगत DGP केपीएस गिल उन्हें गाने और गजल के लिए मजबूर करते थे। जस्सी कहते हैं कि एक बार तो उनके ड्राइवर ने मुझे किडनैप तक कर लिया और गिल के घर ले गए, जहां से सिंगर भाग निकले और फिर कभी वापस नहीं लौटे। उन्होंने मुझे भगौड़ा करार दे दिया। जस्सी के मुताबिक सारी उम्र वो उनसे मिलने के लिए तरसते रहे। एक पार्टी में उनका आमना सामना भी हुआ, लेकिन ना तो मैं उनके पास गया और ना ही बुलाया। यही नहीं जस्सी ने तो ये तक कह दिया कि केपीएस गिल को मैं जुत्ती पर रखता हूं।

जानें कौन थे सुपरकॉप केपीएस गिल?

केपीएस गिल की बात करें तो उन्हें सुपरकॉप के नाम से भी बुलाया जाता था। 90 के दशक में पंजाब के DGP के तौर पर अपनी सेवाएं देते हुए गिल मशहूर हुए थे। शुरुआत से ही केपीएस गिल खुद को एक सख्त अधिकारी के रूप में स्थापित कर चुके थे। अलगाववादी आंदोलन को कुचलने हो या फिर पंजाब में आतंकियों का खात्मा करना…इन सब में केपीएम गिल की भूमिका काफी अहम रहीं, जिसके चलते ही उन्होंने सुपरकॉप कहा जाने लगा था। 1989 में प्रशासनिक सेवा में बेहतर काम करने के चलते गिल को ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया था। 

गिल के नेतृत्व में पंजाब में कई ऑपरेशन चलाए गए, जिसमें 1988 में ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ भी शामिल था। अभियान के तहत स्वर्ण मंदिर में छुपे उग्रवादियों को बाहर निकाला गया था। ये अभियान काफी सफल हुआ। अभियान के दौरान 1984 के ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के मुकाबले गुरूद्वारे को बहुत कम नुकसान पहुंचा था। पंजाब में खालिस्तानी मूवमेंट खत्म करने का क्रिडेट गिल को ही मिलता है। हालांकि तब पुलिस के तौर-तरीके पर कई सवाल उठे और फेक एनकाउंटर के केस तक कोर्ट में चले थे। 2017 में केपीएस गिल का निधन हो गया था। 

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