मेक इन इंडिया के तहत CDSCO में काम करने वाली भारतीय दवाई कम्पनियां हुई त्रस्त, भ्रष्ट साबले हुआ मस्त

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 15 सितम्बर 2020, 12:00 AM 🔄 Updated: 15 सितम्बर 2020, 12:00 AM
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सूत्रों से पता चला है की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोमवार को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (उत्तरीय खंड) के शीर्ष अधिकारी धनन्जय साबले को एक मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दरअसल नोटिस में साबले ने कोरोना वायरस से लड़ने में मददगार जांच करने वाली चिकित्सा उपकरण (medical device/diagnostic kit ) बनाने वाली कंपनियों के आवेदन प्राथना का समय से निस्तारण ना करने को लेकर जवाब तलब किया गया है।

नोटिस में कहा गया है कि इस covid -19 महामारी में मेडिकल डिवाइस जो कि बहुत जरूरी है और इसकी समय पर उपलब्ध्ता होनी चाहिए। ऐसे में इन भारतीय कंपनियों के आवेदनों को रोककर, अधिकारी साबले मेक इन इंडिया पर पानी फेर रहे है और कोरोना जैसी महामारी के शुरुआती दौर में देश को इन उपकरणों(medical device/diagnostic kits) की सबसे ज्यादा जरूरत थी। तब ऐसे में इन कंपनियों के द्वारा दाखिल किए गए आवेदनों पर समय रहते कार्यवाही क्यों नहीं की गई?

केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन के ऑनलाइन पोर्टल की जांच में पाया गया कि चिकित्सा उपकरण (medical device/diagnostic kit ) से जुड़ी करीब 13 भारतीय कंपनियों के ऑनलाइन आवेदन पर हुई कार्यवाही में कोताही बरती गई है। ये है वो 13 भारतीय कंपनी:

TULIP DIAGNOTICS PRIVATE LIMITED
Axiva sichem biotech
Nulife
Sidak Life Care Pvt Ltd
Lotus Surgicals Pvt Ltd
Harsoria Healthcare Pvt Ltd
Genes 2me Pvt Ltd
M/s. Prymax Healthcare LLP
Apothecaries sundries Mfg. Co.
Medtech Devices
Cardiomac India Pvt. Ltd.
Kosdrug Pvt. Ltd.
Poly Medicure Limited

जिसके चलते भारत को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। आपको बता दें कि महामारी के दौरान भारत ने PM CARES फण्ड का पैसा इस्तेमाल करके अमेरिका से वेंटिलेटर्स आयात किये थे। वही चीन से भी सर्जिकल मास्क की बड़ी खेप मंगवाई गयी थी। भारत के कई इलाकों में तो कोरोना टेस्टिंग किट्स की भी कमी सामने आई थी, जिसके बाद से उनकी कमी को विदेश ने आयात करके ही पूरा किया गया था।

अब अधिकारी साबले से इस मामले को लेकर जवाब मांगा गया है। फिलहाल इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की गलियों में चर्चाएं गर्म हो गयी है। साबले पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लग रहे है। काफ़ी शिकायतों के भंडार को ये अपने साथ लिए घूम रहे है। जांच का विषय ये भी बनता है की इतने सालो से आखिर किसकी मेहरबानी से में ये टेक लगाए इतनी मुख्य कुर्सी से चिपके हुए बैठे है?

गौरतलब है कि केंद्र सरकार शुरुआत से ही मेक इन इंडिया योजना के तहत घरेलू कंपनियों को प्राथमिकता दे रही है। प्रधानमंत्री ने खुद भारत बायोटेक द्वारा बनाई जा रही वैक्सीन को लेकर कई बार ज़िक्र किया था। गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ हुई झड़प के बाद से boycottChina कैंपेन ने भी जोर पकड़ लिया लिया है। अब भारत सरकार चीनी उत्पादों पर अपनी निर्भरता को कम करने का प्रयास कर रही है। लेकिन ऐसे में अगर सरकारी संस्थाओं के अधिकारी ही भारतीय कंपनियों के साथ इस तरह का व्यवहार करेंगे भारत के आत्मनिर्भर बनने की राह आसान नहीं होगी । आखिर ऐसे भ्रष्ट अफसरों की वजह से ही PM मोदी जी के मेक इन इंडिया को लागू करने में दिक्क़तें आ जाती है । ये सावले जैसे भ्रष्ट अफसर देश को दीमक की तरह खोखला कर रहे है इनके जैसे अफसरों की जगह जेल में ही होनी चाहिए।

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