गुजरात और हिमाचल तो सिर्फ झांकी है, अभी तो पूरी पिक्चर बाकी है

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 19 Dec 2022, 12:00 AM | Updated: 19 Dec 2022, 12:00 AM

किसी भी लोकतंत्र का सबसे बड़ा त्योहार ‘चुनाव’ 

भारत (India) जिसे दुनिया भर में कई कारणों से जाना जाता है, वो विश्व भर में त्योहारों के देश के रूप में भी जाना जाता है और दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतंत्र (Democracy) में एक ऐसा भी त्योहार है, जो देश की जनता से ज्यादा यहां के राजनेताओं के लिए उत्सुकता का विषय होता है। जी हाँ, आप सही समझ रहे है, हम बात कर रहे किसी भी लोकतंत्र के सबसे बड़े त्योहार ‘चुनाव’ के बारे में। चुनाव से जुड़ी हमारे देश में एक बहुत ही लोकप्रिय कविता है… 

त्योहारों के इस देश में,

फिर आया है लोकतंत्र का त्योहार |

सेवक, जो प्रकट हुए है,

वर्षों बाद।

सेवा से इनके है, अवगत सभी,

युवा, किसान और बेरोजगार |

हमारी बातें सुन कर आपको लग रहा होगा की आज हम फिर जनता के मुद्दों को सरकार के सामने उठाएंगे, लेकिन नहीं ।आज हम 2023 के उन राज्यों के विधानसभा चुनाव (2023 Assembly election) के बारे में जानेगें, जिससे होकर 2024 के लोकसभा चुनाव का रास्ता निकलता है। 

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2024 से पहले होने वाले हैं नौ राज्यों में चुनाव 

हाल ही में हुए आपको गुजरात (Gujarat)और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के विधानसभा चुनाव तो याद ही होंगे। एक तरफ गुजरात की जनता ने जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) को प्रचंड बहुमत दिया था, वहीं दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश की जनता ने कांग्रेस (Congress) को इस घिरते हुए अँधेरे में प्रकाश दिखाया था। ये दोनों विधानसभा चुनाव देश के नेताओं के लिए तो सिखने का विषय हैं ही, साथ ही यह देश की जनता के लिए भी आँख खोलने वाली बात है। 2024 में देश भर में लोकसभा चुनाव (2024 Loksabha Election) होना है, लेकिन इससे पहले प्रधानमंत्री पद के रास्ते में नौ राज्यों में अगले साल यानी की 2023 में होना वाला विधानसभा चुनाव रोड़ा बनकर खड़ा है। इन नौ राज्यों में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम शामिल है। इन विधानसभा चुनावों को आप लोकसभा के फाइनल से पहले का सेमीफइनल समझ सकते हैं। 

  • मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)- 230 विधानसभा सीट

बात शुरू करते हैं मध्य प्रदेश से। फिलहाल तो राज्य में भाजपा की सरकार है और शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) मौजूदा मुख्यमंत्री हैं। मध्य प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं, जबकि 2018 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को सत्ता से बाहर कर दिया था, लेकिन सवा साल बाद ही राज्य में कांग्रेस की  कमलनाथ सरकार (Kamalnath Government) गिर गई, जिसके बाद मध्य प्रदेश में एक बार फिर से शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के रूप में वापस सत्ता में आये। अब देखना दिलचस्प होगा की इस बार मध्य प्रदेश की जनता किस पार्टी पर अपना विश्वास दिखाती है। 

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  • राजस्थान (Rajasthan)- 200 विधानसभा सीट, छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) – 90 विधानसभा सीट

इन नौ राज्यों में राजस्थान और छत्तीसगढ़ भी शामिल हैं, जहां वर्तमान में कांग्रेस की सरकार है। राजस्थान में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री (CM Ashok Gahlot) हैं तो वहीं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस आलाकमान के करीबी भूपेश बघेल सीएम (CM Bhupesh Baghel)हैं। कांग्रेस के लिए लोकसभा चुनाव में अपनी दावेदारी साबित करने के लिए इन दोनों राज्यों में अपनी सरकार को बचा कर रखना, ‘करो या मरो’ की स्थिति जैसी होगी। राजस्थान में यह विधानसभा की लड़ाई जहां 200 सीटों के लिए होगी, वहीं छत्तीसगढ़ में 90 सीटों के लिए राजनीतिक पार्टियां आपस में भिड़ंत करेंगी। 

  • तेलंगाना (Telangana)- 119 विधानसभा सीट

बात करे तेलंगाना की तो राज्य में कुल 119 विधानसभा सीटें है। राज्य भर में वहां की स्थानीय पार्टी Telangana Rashtra Samithi का दबदबा है। के. चंद्रशेखर राव (K. Chandrashekar Rao)यानी की KCR वर्तमान में राज्य के मुख्यमंत्री है और उन्होंने हाल ही में पार्टी को Bharat Rashtra Samithi का नया नाम भी दिया है। आपको नए नाम से ही लग गया होगा की KCR अपने क्षेत्रीय पार्टी को राष्ट्रीय मंच पर लाने की तैयारी में हैं। 

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  • मिजोरम (Mizoram)- 40 विधानसभा सीट

अब ध्यान देते हैं विधानसभा के नजरिए से सबसे छोटे राज्य मिजोरम पर जहां केवल 40 विधानसभा सीटें हैं। मिजो नेशनल फ्रंट (Mizo National Front) के नेता ज़ोरमथांगा (Zoramthanga) दिसंबर 2018 में राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। उनकी पार्टी ने राज्य में विधानसभा सीटों पर बहुमत हासिल की और कांग्रेस के दो कार्यकाल से सत्ता में रहे लाल थानावाला को हराया था।

  • कर्नाटक (Karnataka)- 224 विधानसभा सीट

ये बातें थी विधानसभा के नजरिये से सबसे छोटे राज्य के बार में, अब बात करते है 224 विधानसभा सीटों वाली कर्नाटक के बारे में। यहां भी आपको मध्य प्रदेश से मिलती जुलती कहानी नजर आएगी। राज्य में पिछली बार भाजपा ने कांग्रेस और JD (S) के गठबंधन द्वारा यहाँ की सत्ता गँवा दी थी, लेकिन महज 14 महीने बाद ही भाजपा के पुराने योद्धा बी एस येदियुरप्पा (Bookanakere Siddalingappa Yediyurappa) ने दलबदल कर के कांग्रेस की इस गठबंधन वाले सरकार को गिरा दिया था। हाँ, लेकिन यहां पर गौर करने वाली बात एक और है की बाद में भाजपा ने येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटाकर बसवराज बोम्मई (Basavaraj Somappa Bommai) को राज्य का नेता घोषित कर दिया था। यहाँ भी देखना दिलचस्प होगा की इस बार कर्नाटक की जनता बिना येदियुरप्पा  के भाजपा को अपना समर्थन देती है या फिर कांग्रेस इस बार फिर से कोई तिकड़म करने में सफल हो पाती है।

  • त्रिपुरा (Tripura)- 60,  मेघालय (Meghalaya)- 60, और नागालैंड (Nagaland)- 60 विधानसभा सीट 

मिजोरम को मिलाकर 2023 में 4 पूर्वोत्तर राज्यों में चुनाव होने है। जिनमे त्रिपुरा, मेघालय, और नागालैंड शामिल हैं। इन तीनों राज्यों में 60-60 विधानसभा सीटें हैं। त्रिपुरा में जहां अभी भाजपा की सरकार है और माणिक शाह मुख्यमंत्री (CM Manik Shah), वहीँ कांग्रेस इस बार CPI(M) के साथ गठबंधन करने की तैयारी में लग रही है। मेघालय को देखे तो राज्य में क्षेत्रीय पार्टी National People’s Party (NPP) की जबरदस्त पकड़ है। कॉनराड संगमा (Conrad Kongkal Sangma) फ़िलहाल मुख्यमंत्री पद पर विराजमान हैं। मुख्यमंत्री संगमा ने राज्य में विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा से पहले ही ये ऐलान कर दिया है की इस बार उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी और 60 में से 58 सीटों पर अपना कब्जा करेगी। पिछली बार भी राज्य की जनता ने NPP को 53 सीटें दी थी। अब जरा नागालैंड के आंकडों पर नजर डाले तो आपको पता चलेगा की इस 60 विधानसभा सीटों वाली राज्य में पिछली बार Nationalist Democratic People’s Party (NDPP) और भाजपा की गठबंधन ने जीत हासिल की थी। जिसके बाद NDPP के  Neiphiu Rio राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। इनका कार्यकाल मार्च 2023 में समाप्त होने वाला है। 

गुजरात और हिमाचल तो सिर्फ झांकी है, अभी तो पूरी पिक्चर बाकी है — Nedrick News

ये तो सिर्फ झांकी है, पूरी पिक्चर अभी बाकी है। 

इन सारी बातों और आंकड़ों को सुनने के बाद आपको ये तो साफ़ हो गया होगा की 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए इन राज्यों का चुनाव किस तरह से मिल का पत्थर साबित हो सकता है। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों को भी समझ लेना चाहिए की गुजरात और हिमाचल तो सिर्फ झांकी है, अभी तो पूरी पिक्चर बाकी है। 

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