मॉनसून सत्र के लिए किसानों का प्लान तैयार, संसद के अंदर और बाहर यूं सरकार को घेरने की बनाई रणनीति

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 05 जुलाई 2021, 05:30 AM Updated: 05 जुलाई 2021, 05:30 AM
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पिछले 7 महीनों से किसानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। नए कृषि कानून को वापस लेने की मांग पर अड़े किसान अभी भी दिल्ली के बॉर्डर पर जमे हुए हैं और उनका आंदोलन जारी है। अब किसानों ने संसद के मॉनसून सत्र के दौरान एक बार फिर सरकार को घेरने का प्लान तैयार कर लिया है। 

संसद के बाहर रोज होगा प्रदर्शन

19 जुलाई से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में सरकार किसानों को अंदर और बाहर घेरेगी। इसके लिए 22 जुलाई से मॉनसून सत्र खत्म होने तक रोजाना करीब 200 किसानों का एक समूह संसद के सामने प्रदर्शन करेगा। जिसमें हर किसान संगठन के 5 सदस्य शामिल होंगे।  

विपक्ष को भेजेंगे चेतावनी पत्र

यही नहीं किसानों का प्लान विपक्ष को एक “चेतावनी पत्र” जारी करने का भी है। जिसके जरिए वो विपक्षी सांसदों में कहेंगे कि संसद के अंदर सरकार पर किसानों के समर्थन में आवाज उठाएं और सरकार को जवाब देने पर मजबूर करें। हम  उनसे ये निवेदन करेंगे कि या तो वो अपनी चुप्पी तोड़ें या फिर अपनी सीट छोड़ें। सरकार पर दबाव बनाने की ये रणनीति संयुक्त किसान मोर्चा ने तैयार की है। 

महंगाई को लेकर होगा प्रदर्शन

इसके अलावा मॉनसून सत्र से पहले संयुक्त किसान मोर्चा ने पेट्रोल, डीजल और LPG के बढ़ते दामों को लेकर भी देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया। मोर्चा ने लोगों से अपील की कि वो 8 जुलाई को विरोध प्रदर्शन के लिए राज्य के और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुबह 10 से 12 बजे तक बाहर आए और अपनी गाड़ी वहां पर लगाए। जो भी वाहन हो, ट्रैक्टर, ट्रॉली, बस, कार, स्कूटर उसको निकटम राज्य या राष्ट्रीय राजमार्ग पर लाकर पार्क कर दें। इस दौरान ट्रैफिक जाम ना लगने दें। उन्होंने इस दौरान LPG सिलेंडर भी लाने को कहा।

वहीं किसान मोर्चा ने 7 जुलाई को रात 12 बजे 8 मिनटों के लिए वाहनों का हॉर्न बजाने की अपील भी लोगों से की है। 

हंगामेदार होगा संसद का मॉनसून सत्र

गौरतलब है कि नए कृषि कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन पिछले साल नवंबर महीने से जारी है। शुरूआत में मसले को सुलझाने के लिए सरकार और किसानों के बीच कई दौरों की बातचीत भी हुई। लेकिन 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान जो कुछ भी हुआ, उसके बाद से ही बातचीत बंद है। सरकार लगातार यही कहती नजर आ रही है कि वो किसानों से बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन कानून वापस नहीं, इसमें किसानों की मांग के मुताबिक संशोधन वो करेगी। वहीं किसान कानून वापसी की मांग पर ही अड़े हैं। 

बीते 7 महीनों में किसानों का ये आंदोलन काफी उतार चढ़ाव से भरा रहा। कभी गणतंत्र दिवस के दौरान हुई हिंसा के बाद ये आंदोलन धीमा पड़ा, तो कभी कोरोना का असर इस पर पड़ा। लेकिन अब एक बार फिर किसान अपने इस आंदोलन को तेज करने की तैयारी में हैं। जिस तरह से किसानों से प्लानिंग की है, उससे तो यही लग रहा है कि आगामी मॉनसून सत्र काफी हंगामेदार होने वाला है। देखना होगा कि इस दौरान इस मसले का कुछ हल निकल पाता है या नहीं।

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