DUSU Election 2025: डूसू अध्यक्ष पद पर ABVP के आर्यन मान की जीत, जानिए डीयू अध्यक्ष को क्या मिलती हैं ताकत और सुविधाएं

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 19 सितम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 19 सितम्बर 2025, 05:30 AM
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DUSU Election 2025: दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2025 के नतीजे सामने आ चुके हैं और पूरे कैंपस में एक बार फिर चुनावी चर्चा जोरों पर है। ABVP के आर्यन मान ने शानदार जीत के साथ अध्यक्ष पद अपने नाम किया है। उन्होंने NSUI की उम्मीदवार जोसलीन नंदिता चौधरी को लगभग 16,196 वोटों के बड़े अंतर से मात दी है — कुल मिलाकर आर्यन मान को 28,841 वोट मिले, जबकि जोसलीन को 12,645 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा।

मतदान प्रक्रिया इस प्रकार रही: केंद्रीय पैनल के लिए EVM मशीनों का प्रयोग हुआ और कॉलेज स्तर पर बैलेट पेपर से वोट डाले गए। पिछली बार चुनाव NSUI ने जीता था, लेकिन इस बार मैदान बदल गया है।

अध्यक्ष पद की रेस में तीन उम्मीदवार मुख्य रूप से चर्चा में रहे एनएसयूआई की जोसलिन नंदिता चौधरी, वाम दलों की ओर से (SFI और AISA की संयुक्त उम्मीदवार) अंजलि, और एबीवीपी के आर्य मान। लंबी गिनती प्रक्रिया के बाद आखिरकार DUSU के नए केंद्रीय पैनल की तस्वीर साफ हो गई। आईए अब जानते हैं डूसू चुनाव जीतने वाले अध्यक्ष के पास क्या शक्तियां होती हैं और उसे क्या सुविधाएं दी जाती हैं?

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DUSU क्या है और क्यों है इतना खास? DUSU Election 2025

आईए पहले आपको बताते हैं दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ क्या है? डूसू यानी दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन सिर्फ एक छात्र संगठन नहीं, बल्कि यह डीयू के छात्रों की आवाज़ है। इसकी शुरुआत 1954 में हुई थी और तब से ये मंच छात्रों को उनकी समस्याओं को उठाने और उनका प्रतिनिधित्व करने का मौका देता आ रहा है।

दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े करीब 52 से ज्यादा कॉलेज और फैकल्टीज इस चुनाव में हिस्सा लेते हैं, इसलिए इसे दुनिया के सबसे बड़े छात्र संघ चुनावों में गिना जाता है। डूसू में चार मुख्य पद होते हैं अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव। इसके अलावा, कॉलेज स्तर से चुने गए सेंट्रल काउंसलर भी यूनियन का हिस्सा होते हैं।

DUSU अध्यक्ष के पास कितनी ताकत?

DUSU अध्यक्ष के पास कोई प्रशासनिक अथवा कानूनी अधिकार तो नहीं होते, लेकिन यह पद एक सशक्त प्रतिनिधि की भूमिका निभाता है। अध्यक्ष कैंपस में छात्रों से जुड़े मुद्दों को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने उठाता है। इनमें हॉस्टल की सुविधाएं, लाइब्रेरी की स्थिति, परीक्षा के नियम, या फिर कैंपस में सुरक्षा जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, यूनियन की नीतियां और फैसले केंद्रीय परिषद (Central Council) के माध्यम से लिए जाते हैं, जिसमें अन्य पदाधिकारी और कॉलेज काउंसलर भी शामिल होते हैं। अध्यक्ष उन्हीं नीतियों को आगे बढ़ाने का काम करता है।

अध्यक्ष को मिलती हैं क्या सुविधाएं?

यह सवाल भी छात्रों के बीच अक्सर चर्चा में रहता है कि DUSU अध्यक्ष को आखिर मिलता क्या है? तो आइए जानते हैं:

  • DUSU अध्यक्ष को कोई वेतन या स्टाइपेंड नहीं दिया जाता।
  • उन्हें एक आधिकारिक ऑफिस कैंपस में उपलब्ध कराया जाता है।
  • यूनियन संचालन और छात्र कल्याण से जुड़ी गतिविधियों के लिए विश्वविद्यालय की तरफ से फंड दिया जाता है।
  • अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों को काम में सहयोग के लिए सपोर्ट स्टाफ दिया जाता है।
  • उन्हें यूनिवर्सिटी के अलग-अलग सेमिनार, वर्कशॉप और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है।

राजनीति का पहला स्टेज

दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्र संघ राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले युवाओं के लिए एक बड़ा लॉन्चपैड माना जाता है। कई पूर्व DUSU अध्यक्ष बाद में देश की मुख्यधारा की राजनीति में आए हैं। इसलिए यह चुनाव न सिर्फ छात्रों के मुद्दों के लिए अहम है, बल्कि इससे देश के भविष्य के नेता भी निकलते हैं।

अब जब DUSU 2025 के नतीजे सामने हैं, तो सभी की नजर इस बात पर है कि नया पैनल विश्वविद्यालय के छात्रों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।

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