Catch the Rain campaign: मानसून के दौरान हर साल आसमान से लाखों लीटर पानी बरसता है, लेकिन सही इंतजाम न होने के कारण इसका एक बड़ा हिस्सा नालों और नदियों से बहकर बर्बाद हो जाता है। अगर इसी अनमोल पानी को सही समय पर रोककर जमीन के भीतर उतार दिया जाए, तो गिरते भूजल स्तर और गर्मियों में होने वाले गंभीर जल संकट से देश को बड़ी राहत मिल सकती है। इसी सोच को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र सरकार पूरे देश में ‘कैच द रेन’ (Catch the Rain) अभियान चला रही है। इस अभियान का मूल मंत्र है “बारिश जहां भी हो और जब भी हो, उसे वहीं सहेजा जाए।”
2.43 अरब घन मीटर भूजल हुआ रिचार्ज, 1.55 करोड़ ढांचे बने| Catch the Rain campaign
अभियान के तहत सरकारी प्रयासों के साथ-साथ आम जनता की भागीदारी को जोड़ने के लिए ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) जैसी प्रभावी पहल शुरू की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस मुहिम के तहत अब तक 1.55 करोड़ से ज्यादा आर्टिफिशियल ग्राउंडवॉटर रिचार्ज और वॉटर स्टोरेज स्ट्रक्चर्स बनाए जा चुके हैं।
इसके पहले चरण के असर को देखने के लिए करीब 23 लाख संरचनाओं पर एक विस्तृत अध्ययन किया गया। अध्ययन में 1 जून से 31 दिसंबर 2025 के बीच के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिससे यह बात सामने आई कि इन ढांचों के जरिए लगभग 2.43 अरब घन मीटर भूजल रिचार्ज होने का अनुमान है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि सिर्फ ढांचे बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि इनका लंबे समय तक फायदा तभी मिलेगा जब इन संरचनाओं की नियमित देखभाल, गाद की सफाई और सही रखरखाव किया जाए।
JSJB 1.0 से 2.0 और 2026 में संयुक्त अभियान का सफर
जल संरक्षण को जनांदोलन का रूप देने के लिए JSJB 1.0 को 1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2025 तक चलाया गया था। यह मॉडल 3 ‘C’ यानी कम्युनिटी (समुदाय), CSR (कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी) और कॉस्ट (कम लागत) पर आधारित था। इसमें सरकारी योजनाओं के संसाधनों को मिलाकर बेकार पड़े बोरवेलों को सुधारने और रिचार्ज पिट बनाने का काम किया गया। इसके बाद 1 जून 2025 को शुरू हुए JSJB 2.0 में उन जिलों पर विशेष ध्यान दिया गया, जहां भूजल का अत्यधिक दोहन हो चुका है और स्थिति ‘डार्क जोन’ जैसी हो गई है। वहीं, 1 जून 2026 से ‘JSJB: Catch the Rain’ पहल के तहत दोनों अभियानों को एक साथ जोड़ दिया गया है, ताकि शहरों और गांवों में वर्षा जल संचयन को और ज्यादा गति दी जा सके।
पुरानी बावड़ियों की सफाई से लेकर पौधारोपण तक पर जोर
मूल रूप से 22 मार्च 2021 को विश्व जल दिवस पर शुरू हुए ‘कैच द रेन’ अभियान में स्कूलों, दफ्तरों, सोसायटियों और घरों की छतों पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने पर जोर दिया जाता है। इसके अलावा पुराने कुओं, तालाबों की गाद निकालने, रिचार्ज पिट बनाने और सूखे बोरवेल को दोबारा जीवित करने का काम चल रहा है। जलभराव वाले क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ भी लगाए जा रहे हैं।
इस अभियान को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’, कैम्पा (CAMPA) फंड और वित्त आयोग के अनुदानों से भी मजबूती मिल रही है। जिला स्तर पर खुले ‘जल शक्ति केंद्र’ लोगों को तकनीकी मदद दे रहे हैं कि उनकी स्थानीय जमीन और बारिश के हिसाब से कौन सा मॉडल सबसे बेहतर रहेगा। मोबाइल ऐप और पोर्टल के जरिए आम लोग भी इस पूरी कवायद पर नजर रख रहे हैं।













































