2 घंटे की बैठक, BLO की मौतें और SIR का विवाद… जानें TMC-EC की टकराव की क्या है वजह

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 28 नवम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 28 नवम्बर 2025, 05:30 AM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

BLO SIR workload: पश्चिम बंगाल में चल रही वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है, लेकिन देशभर से लगातार बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की मौत की खबरें आने के बाद इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी स्थिति को लेकर शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की, जिसमें लगभग दो घंटे तक चली बैठक के बाद सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने बेहद सख्त आरोप लगाए।

और पढ़ें: Mayawati vs Chandrashekhar: मुजफ्फरनगर से शुरू हुई सियासी जंग! मायावती बनाम चंद्रशेखर, किसके हाथ लगेगा पश्चिम यूपी का ताज?

बैठक के बाद बाहर आते ही डेरेक ओ’ब्रायन ने मीडिया के सामने कहा, “हमने चुनाव आयोग के सामने पांच बड़े मुद्दे रखे, लेकिन हमारे किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया गया। SIR प्रक्रिया के कारण जिन लोगों की मौत हुई है, उनके हाथ खून से रंगे हुए हैं। ” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में “बिहार मॉडल” लागू करना चाहता है और किसी भी हाल में तृणमूल को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन “यह हम होने नहीं देंगे।”

TMC का आरोप: बिना प्लानिंग, बेरहम तरीके से SIR लागू किया गया (BLO SIR workload)

TMC का प्रतिनिधिमंडल कुल 10 सांसदों का था, जिसमें डेरेक ओ’ब्रायन, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी, शताब्दी रॉय, डोला सेन, सजदा अहमद, प्रतिमा मंडल, ममता ठाकुर, साकेत गोखले और प्रकाश चिक बारीक शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लगभग 40 मृत लोगों की सूची सौंपी, जिनमें 18 BLO शामिल थे।

डेरेक ने कहा कि पार्टी SIR प्रक्रिया के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसके संचालन के तरीके पर सवाल उठा रही है। उन्होंने कहा, “हमने आयोग को बताया कि यह प्रक्रिया बिना किसी ठोस प्लानिंग और बेहद सख्ती के साथ लागू की जा रही है, जिससे BLO पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है।”

महुआ मोइत्रा ने भी उठाए सवाल

TMC की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी चुनाव आयोग से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि आयोग की तरफ से बताया गया कि मतदाता सूची से नाम हटाने के सिर्फ चार ही आधार हैं मृत मतदाता, स्थायी रूप से पलायन कर चुके लोग, डुप्लीकेट वोटर्स और गैर-नागरिक।

महुआ ने सवाल उठाया कि मृत मतदाताओं का नाम हटाने के लिए पहले से ही फॉर्म-7 मौजूद है। स्थायी रूप से पलायन कर चुके लोगों के लिए भी फॉर्म-8 लागू है। डुप्लीकेट वोटर्स की पहचान के लिए आयोग के पास डी-डुप्लीकेसी सॉफ्टवेयर तक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पहले से ही व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो फिर SIR को इतने बड़े स्तर पर लागू करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

BLOs की लगातार मौतें, तनाव और दबाव चरम पर

SIR प्रक्रिया सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही नहीं बल्कि देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही है। अचानक बढ़े काम के बोझ और टारगेट को समय पर पूरा करने के दबाव के कारण कई BLO गंभीर तनाव में हैं।

बीते 19 दिनों में 6 राज्यों में 16 BLOs की मौत हो चुकी है। इनमें:

  • गुजरात और दमन में 4–4
  • पश्चिम बंगाल में 3
  • राजस्थान में 2
  • केरल और तमिलनाडु में 1–1

इन मौतों के पीछे आत्महत्या, हार्ट अटैक और सड़क हादसे जैसी वजहें सामने आई हैं।

मध्य प्रदेश में भी स्थिति गंभीर: 50 से अधिक BLO बीमार

एमपी में SIR का काम तेज़ी से चल रहा है और इसका सबसे बड़ा असर BLOs पर दिख रहा है।

  • भोपाल में 50 से ज्यादा BLO बीमार पड़े हैं।
  • दो को हार्ट अटैक आया।
  • एक का ब्रेन हैमरेज हुआ।

रायसेन के BLO रमाकांत पांडेय की बीते गुरुवार को मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि वह चार दिनों से सोए तक नहीं थे और ऑनलाइन मीटिंग के दौरान बेहोश होकर गिर पड़े। उसी जिले के BLO नारायण सोनी छह दिनों से लापता हैं। परिवार का कहना है कि वह टारगेट और निलंबन की चेतावनी से मानसिक दबाव में थे।

गुजरात में आत्महत्याओं का मामला भी सामने आया

सौराष्ट्र के अरविंद वाढेर ने आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में लिखा था, “अब काम नहीं हो सकता।” वडोदरा में BLO ऊषाबेन की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। तापी और खेडा में भी BLO के हार्ट अटैक से मौत हुई है।

पश्चिम बंगाल में दो आत्महत्याएं, नादिया में BLO रिंकू का शव मिला

पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया से जुड़ी मौतों में दूसरी आत्महत्या BLO रिंकू की थी, जो नादिया जिले में छत से लटके हुए मिले। उनके पास से सुसाइड नोट बरामद हुआ था।

बीजेपी भी पहुंच चुकी है चुनाव आयोग के दरवाज़े

TMC के बाद यह पहला विरोध नहीं है। इससे पहले बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई ने भी आयोग से मुलाकात कर SIR पर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं।

TMC का साफ संदेश: “बंगाल में बिहार मॉडल नहीं चलने देंगे”

बैठक के बाद TMC नेताओं ने यह आरोप दोहराया कि आयोग पश्चिम बंगाल में भी वैसा ही राजनीतिक माहौल बनाना चाहता है जैसा बिहार में देखा गया। पार्टी ने स्पष्ट कहा कि वह BLOs की मौत और अनुचित दबाव की कीमत पर किसी भी तरह की SIR प्रक्रिया को स्वीकार नहीं करेगी।

और पढ़ें: SIR पर सियासी तूफान! Mamata Banerjee ने दी धमकी, बोली-‘छेड़ोगे तो पूरे भारत की नींव हिला दूंगी!’

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds