Bareilly News: एक आईएएस का फर्ज होता है अन्याय के खिलाफ लड़ना और व्यवस्था को सही करना। जो इस परीक्षा की तैयारी भी करता है, वह देश हित के सपने देखने लगता है। सच्चा सिविल सेवक समाज की बुराइयों को खत्म करने का संकल्प लेता है, लेकिन जब तैयारी करने वाली ही खुद ‘बड़ी बुराई’ बन जाए, तो सवाल उठना लाजमी है। बरेली की इस खबर ने सबको हैरान कर दिया, जहाँ 8 साल तक तैयारी करने के बाद भी एक युवती ने देश सेवा के बजाय ‘धोखाधड़ी’ के रास्ते को चुन लिया।
क्या है मामला
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि बरेली (Bareilly) के बारादरी इलाके की रहने वाली इस युवती ने करीब 8 साल तक सिविल सर्विस की तैयारी की। कड़ी मेहनत के बावजूद जब परीक्षा पास नहीं हुई, तो उसने गलत रास्ता चुन लिया। उसने अपनी गाड़ी पर ‘ADM FR’ लिखवाया और खुद को बड़ा अधिकारी बताकर लोगों पर रौब जमाना और ठगी करना शुरू कर दिया। आखिरकार पुलिस ने उसे और उसकी बहनों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।
आखिर क्यों रखा धोखाधड़ी की दुनिया में कदम?
मास्टरमाइंड डॉ. विप्रा शर्मा ने प्रयागराज में करीब 8 साल तक UPSC की तैयारी की थी। जब चयन नहीं हुआ और साथ तैयारी करने वाले कई दोस्त बड़े पदों (IAS/PCS) पर तैनात हो गए। उनकी पावर और रुतबा देखकर विप्रा के मन में ईर्ष्या पैदा होने लगी। सफल न होने पर उसने उसी ‘भौकाल’ का इस्तेमाल पैसे कमाने के लिए किया। उसने अपनी बहनों के साथ मिलकर बेरोजगार युवाओं को ठगने का ‘बिजनेस’ बना लिया। विप्रा के ऊंचे शौक, सफेद XUV700 पर लिखा ‘ADM FR’, महंगे आईफोन और पीड़ितों को ‘फर्जी सैलरी’ देने का झांसा यह सब उस शातिर दिमाग की उपज थी, जिसने कभी देश सेवा का सपना देखा था।
कैसे शुरू किया ठगी का खेल?
विप्रा ने धीरे-धीरे लोगों से मेलजोल बढ़ाया और उन्हें सरकारी नौकरी का झांसा देना शुरू किया। इस काम में उसकी सगी बहन और ममेरी बहन भी पूरी तरह शामिल थीं। ठगी के इस खेल को असली दिखाने के लिए उन्होंने एक शातिर सिस्टम बनाया था। फर्जी नियुक्ति पत्र (Appointment Letters) जानबूझकर लखनऊ के सचिवालय (बापू भवन) के पास से पोस्ट किए जाते थे, ताकि डाक की मोहर देखकर लोगों को शक न हो। इतना ही नहीं, शिकार को पूरी तरह जाल में फंसाने के लिए उन्होंने एक पीड़ित के खाते में 17,000 की ‘सैलरी’ भी भेजी, जिससे उनका भरोसा अटूट हो गया।
पीड़ित ने बताई आपबीती
एक पीड़ित ने बताया कि उसे कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 5 लाख 21 हजार रुपये ठग लिए गए। ठगों ने उसे पूरा भरोसा दिलाया था, लेकिन जब लंबे समय तक जॉइनिंग नहीं हुई, तब उसे शक हुआ। मामला तब खुला जब पीड़ित खुद फर्जी जॉइनिंग लेटर लेकर लखनऊ पहुंचा और वहां उसे पता चला कि उसके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
तीनों महिलाएं गिरफ्तार
पुख्ता सबूत मिलने के बाद पुलिस ने तीनों महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से ‘ADM FR’ लिखी सफेद लग्जरी कार, 10 से ज्यादा चेकबुक, लैपटॉप और कई मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। पुलिस ने इनके अलग-अलग बैंक खातों में जमा करीब 55 लाख रुपये फ्रीज कर दिए हैं और उनके पास से 4.5 लाख रुपये नकद भी बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इन्होंने अब तक कुल कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा खुद को कभी एसडीएम तो कभी एडीएम बताकर लोगों को ठगती थी। उसने रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी और खुद को ‘डॉक्टर’ (Ph.D. होल्डर) भी बताती थी, लेकिन पुलिस के सामने वह अपनी डिग्री का कोई सबूत पेश नहीं कर पाई। अब पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है, क्योंकि शक है कि इस गिरोह ने प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी युवाओं को अपना शिकार बनाया होगा।




























