Sikhism in Rameshwaram: जब आप सिख धर्म और हिंदू धर्म के कनेक्शन के बारे में बात करते है तो पाएंगे कि दोनों धर्मों के रीति रिवाजों में कई समानता है। हर एक सिख अनुयायी जानता है कि सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव जी खुद एक हिंदू खत्री परिवार से थे, लेकिन हिंदू धर्म फैसले भेदभाव और अंधविश्वास को देख कर उन्हें लोगों को उस धर्म के प्रति जागरूक किया था जिसमें समानता और सम्मान है। यानी कि सिख धर्म, लेकिन कभी भी किसी को भी हिंदू धर्म छोड़ने के लिए नहीं कहा। अगर आप ये कहेंगे कि गुरूसाहिब की पूरी तरह से हिंदू धर्म से आसक्ति हो गई थी तो शायद ये गलत होगा।
क्योंकि गुरु साहिब ने अपनी उदासीयों के दौरान भगवान विष्णु और महादेव से जुड़े कई ऐसे धार्मिक स्थलों की यात्रा की जो आज भी हिंदुओं के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। जिनमें से एक है रामेश्वरम (Sikhism in Rameshwaram)। जी हां, रामेश्वरम जिसे भगवान राम के नाम से जाना जाता है लेकिन वहां मौजूद है देवों के देव महादेव का एक ज्योतिर्लिंग। जहां खुद गुरु साहिब न केवल उदासी के दौरान यात्रा पर गए थे बल्कि वहां उन्हें करीब 19 दिन रहकर आराम किया था, और लोगों को सिख धर्म की विचारों से अवगत कराया था। अपने इस वीडियो में हम रामेश्वरम में मौजूद सिख धर्म के बारे में जानेंगे, कैसे वहां सिख धर्म ने अपनी छाप छोड़ी और आज वहां सिख किस स्थिति में है।
रामेश्वरम के बारे में जानकारी – Sikhism in Rameshwaram
रामेश्वरम, भारत के राज्य तमिलनाडु में रामनाथपुरम जिले में स्थित है.. हिंदू धर्म के चार प्रमुख धामों में से एक रामेश्वरम (Sikhism in Rameshwaram) को रामसेतु के लिए भी जाना जाता है,..रामेश्वरम हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुंदर शंख के आकार का द्वीप है, जिसके बारे में कहा जाता है कि ये पहले भारत से जुड़ा हुआ था। ये मन्नार की खाड़ी में मौजूद है। इसी के तट पर श्रीलंका जाने के लिए श्रीराम ने शिवजी की पूजा की थी औऱ फिर रामसेतु का निर्माण करवाया था।
विश्व का सबसे लंबा गलियारा – Sikhism in Rameshwaram
समय के साथ समुद्री लहरो के कारण रामेश्वरम मुख्य धरती से अलग होकर एक टापू के रूप में बदल गया। बंगाल की खाड़ी का किनारा जिसे रत्नाकर कहा जाता है रामेश्वरम में ही हिंद महासागर से मिलती है। हालांकि रामनाथ का मंदिर का जो स्वरूप आप अभी देख रहे है उसे बने अभी मात्र 800 साल हुए है, लेकिन ये भी सच है कि रामेश्वरम का गलियारा विश्व का सबसे लंबा गलियारा है। और यहां पर मौजूद गर्भ-गृह के निकट ही नौ ज्योतिर्लिंग की स्थापना रावण वध के बाद लंकापति विभिषण ने कराया था।
रामेश्वर में सबसे ज्यादा हिन्दू धर्म – Sikhism in Rameshwaram
रामेश्वरम (Sikhism in Rameshwaram) को बिल्कुल उत्तर भारत के काशी के समान माना जाता है, और राम जी को पूजा करने के कारण ही इस स्थान पर विराजमान शिवलिंग को रामेश्वर शिवलिंग कहा जाता है। रामेश्वर के क्षेत्रफल की बात की जायें तो ये मात्र 55 वर्ग किलोमीटर में फैला हुई है, तो वहीं इसी आबादी 2011 के जनगणना के अनुसार 44,856 के आसपास थी। हालांकि रामेश्वर एक पवित्र धार्मिक स्थल है इसलिए पर्यटन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्थान है। यहां के लोगो का प्रमुख कार्य मछली पालन है। यहां सबसे ज्यादा हिंदू आबादी रहा करती है.. जिनके बाद ईसाई और फिर मुस्लिम आबादी की बारी आती है। लेकिन बावजूद इसके यहां सिखों का एक बड़ा और महान इतिहास है.. जिसकी निशानियां आज भी मौजूद है।
रामेश्वरम में सिख धर्म – Sikhism in Rameshwaram
जब बात करते है रामेश्वरम में सिख धर्म के फलने फूलने और यहां की पवित्रता के साथ सिखों के लगाव की तो ये इतिहास सिखो के पहले आदि गुरु गुरु नानक देव जी से ही जुड़ा है। गुरु साहिब ने अपनी दूसरी उदासी के दौरान जब वो 1511 में श्रीलंका की यात्रा पर जा रहे थे, तब वो रामेश्वरम के रास्ते से ही भारत से गए थे, रामेश्वरम की पवित्रता और अध्यात्मिकता को देखकर वो इतने मोहित हो गए कि उन्होंने रामेश्वरम में करीब 19 दिनो तक रह कर आराम किया था.. इस दौरान उन्होंने रामेश्वरम में सामाजिक भेदभाव को दूर करके समानता का संदेश दिया था, उन्होंने लोगो को आध्यात्नमिक रूप से एक होने का सही अर्थ समझाया था। उन्होंने समझाया था कि एक ओमकार क्या है.. और कैसे सभी प्राणी उन्ही इक ओमकार यानि की एक ही इश्वर से जुड़े है।
रामेश्वरम में गुरुद्वारा गुरु नानक धाम – Sikhism in Rameshwaram
कहा जाता है कि इस दौरान गुरु साहिब की महिमा सुनकर वहां का राजा भी गुरु साहिब के पास आया था, और महल चलने का आग्रह किया था, लेकिन गुरु साहिब ने अपनी संगत के बीच ही रहने का फैसला किया था। गुरु साहिब से प्रभावित होकर बहुत से लोगो ने उनके विचारों को फॉलो करना शुरु कर दिया था। गुरु साहिब के रामेश्वरम आगवन की निशानी के तौर पर यहां पर मौजूद है ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु नानक धाम’ इस गुरु द्वारे की स्थापना गुरु साहिब के सम्मान में पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से ताल्लुक रखने वाले श्री चंदू लाल बेदी ने करवाया था।
लेकिन 2005 में जब एस.एस. बरनाला तमिलनाडु के राज्यपाल बने तो उन्होंने गुरुद्वारा का फिर ले पुनर्निमाण करावाया। ये गुरुद्वारा रामेश्वरम बस स्टैंड के पास मौजूद है, गुरुद्वारे के अलावा यहां सिख आगंतुको के लिए रहने के लिए धर्मशाला भी बनाये गए है.. जो पंजाब से रामेश्वरम आने वाले सिखो के लिए एक बेहद शांति देने वाला स्थान है। ये स्थान महसूस कराता है गुरु साहिब के यहां होने का। हालांकि दक्षिण भारत में सिखों की संख्या कम होती जा रही है लेकिन फिर भी रामेश्वर में यहां कि कुल आबादी का करीब 0.3 प्रतिशत आबादी सिख धर्म को मानती है। जिन्होंने गुरु साहिब की धरोहर को बनाये रखा है।




























