Awami League History: तख्तापलट के बाद चुनौतियों में घिरी अवामी लीग, बांग्लादेश की सबसे पुरानी पार्टी के संघर्ष की कहानी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 26 जनवरी 2025, 05:30 AM Updated: 26 जनवरी 2025, 05:30 AM
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Awami League History: पड़ोसी देश बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। दशकों तक बांग्लादेश पर राज करने वाली आवामी लीग पार्टी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। पार्टी के दफ्तर जलाए जा रहे हैं, नेताओं को देश छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है और पार्टी को चुनाव लड़ने से भी रोका जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब आवामी लीग को ऐसी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अपने 76 साल के इतिहास में इस पार्टी ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और एक बार फिर यह अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।

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पाकिस्तान में हुआ अवामी लीग का जन्म- Awami League History

अवामी लीग पार्टी की स्थापना 23 जून 1949 को हुई थी, जब पाकिस्तान का निर्माण हुए दो साल ही बीते थे। इसे “पूर्वी पाकिस्तान अवामी मुस्लिम लीग” के नाम से स्थापित किया गया। मौलाना अब्दुल हामिद खान भासानी को पार्टी का पहला अध्यक्ष और शमसुल हक को महासचिव बनाया गया, जबकि शेख मुजीबुर रहमान को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। पार्टी का गठन मुख्य रूप से पाकिस्तान की मुस्लिम लीग के वर्चस्व का विरोध करने के उद्देश्य से हुआ था।

Awami League History Bangladesh Sheikh Hasina
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पार्टी को सबसे अधिक समर्थन पूर्वी बंगाल (बाद में पूर्वी पाकिस्तान) से मिला। हालांकि, यह पार्टी शुरुआत से ही धर्मनिरपेक्षता और गैर-सांप्रदायिकता के पक्ष में थी। इसीलिए चार साल बाद, 1953 में, पार्टी ने अपने नाम से “मुस्लिम” शब्द हटा दिया। इसका मकसद पाकिस्तान में धर्मनिरपेक्षता का संदेश देना और राजनीतिक विविधता को बढ़ावा देना था।

मुक्ति संग्राम का नेतृत्व और बांग्लादेश का निर्माण

अवामी लीग ने पाकिस्तान के कई चुनावों में हिस्सा लिया, लेकिन 1970 के चुनाव में बहुमत हासिल करने के बावजूद इसे सत्ता से वंचित रखा गया। इसके बाद, पूर्वी पाकिस्तान में अलग देश की मांग उठी और मुक्ति संग्राम छिड़ गया। पार्टी ने मुक्ति युद्ध का नेतृत्व किया, और 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश के स्वतंत्र होने के बाद राष्ट्रीय सरकार का गठन किया।

शेख मुजीबुर रहमान की अगुवाई में 1972 में पार्टी का नाम बदलकर “अवामी लीग” कर दिया गया। हालांकि, देश की आर्थिक समस्याओं, अकाल और भुखमरी जैसी स्थितियों ने पार्टी की लोकप्रियता को झटका दिया। 1975 में शेख मुजीब की हत्या के बाद पार्टी के हाथ से सत्ता फिसल गई, और अवामी लीग ने एक लंबे समय तक विपक्ष में रहने का दौर देखा।

21 वर्षों तक विपक्ष में रहने के बाद सत्ता में वापसी

शेख मुजीब की हत्या के बाद अवामी लीग 21 साल तक सत्ता से दूर रही। 1996 में, पार्टी ने चुनाव में जीत दर्ज की और सत्ता में वापसी की। इसके बाद से शेख हसीना बांग्लादेश की राजनीति में प्रमुख चेहरा बनकर उभरीं। लेकिन, 2023 में छात्रों के आंदोलन और राजनीतिक अस्थिरता के कारण उन्हें देश छोड़ना पड़ा। आज, एक बार फिर, अवामी लीग अपने वजूद को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है।

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अवामी लीग पर मंडरा रहा अस्तित्व संकट

आज बांग्लादेश में अवामी लीग के खिलाफ व्यापक हिंसा और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पार्टी कार्यालयों को जलाने से लेकर शेख मुजीबुर रहमान की प्रतिमाओं को तोड़ने तक, पार्टी से जुड़ी हर चीज को निशाना बनाया जा रहा है। इसके बावजूद, शेख हसीना ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इन चुनौतियों का डटकर सामना करेंगी।

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