जानिए आखिर कैसे अरुण जेटली एक वकील से बने देश के बड़े राजनीतिज्ञ…

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 24 अगस्त 2019, 12:00 AM 🔄 Updated: 24 दिसम्बर 2025, 07:59 AM
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अरुण जेटली, जो कभी एक साधारण वकील हुआ करते थे वो एक दिन बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाने का दृढ़ सिपाही बनकर उभरें. साल 2014 में बीजेपी सत्ता में आई और अरुण जेटली को केंद्रीय वित्तमंत्री बनाया गया लेकिन इससे पहले भी जेटली ने एक विपक्षी पार्टी के तौर पर बीजेपी के नेता के रूप में सत्ताधारी कांग्रेस की खूब बखिया उधेड़ी. आज हम उसी दमदार नेता और देश के दमदार पूर्व मंत्रियों में से एक अरुण जेटली के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं.

पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली का जन्म 28 दिसम्बर,1952 को नई दिल्ली में हुआ था. इनके पिता महाराज किशन जेटली एक वकील थे. इनकी माता का नाम रतन प्रभा जेटली हैं. तो आइए आपको बताते हैं कि कैसे एक वकील बने देश के बड़े राजनीतिज्ञ…

छात्र के तौर पर प्राप्त किए कई सम्मान

अरुण जेटली ने अपनी स्कूली पढ़ाई साल 1957 से 1969 तक सेंट जेवियर्स स्कूल से पूर्ण की. उसके बाद साल 1973 में उन्होंने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से कॉमर्स की डिग्री प्राप्त की. इसके अलावा दिल्ली विश्‍वविद्यालय के विधि संकाय से साल 1977 में उन्होंने विधि की डिग्री प्राप्त की. आपको बता दें कि जेटली ने छात्र के तौर पर अपने कैरियर के दौरान अकादमिक और पाठ्यक्रम के समय गतिविधियों दोनों में कई तरह के सम्मानों को हासिल किया. इतना ही नहीं ये साल 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संगठन के अध्यक्ष भी रहे चुके हैं.

जेटली ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध साल 1973 से जय प्रकाश नारायण के ‘संपूर्ण क्रांति आंदोलन’ के दौरान छात्र और युवा संगठनों की जेपी द्वारा खुद गठित की गई ‘राष्ट्रीय समिति’ के जेटली आप संयोजक थे. आपको बता दें कि साल 1975 से 1977 में 19 महीनों तक आपातकाल के समय जेटली मीसा में बंदी रहने के बाद आप जनसंघ से जुड़े थे. एक वरिष्ट वकील होने के चलते साल 1977 से सुप्रीम कोर्ट और देश के कई उच्च न्यायालयों में जेटली ने वकालत की. वहीं साल 24 मई,1982 को अरुण जेटली ने संगीता जेटली से शादी की. जिसके बाद उनके दो बच्चे हुए, जिनमें बेटे का नाम रोहन है और दूसरी बेटी का नाम सोनाली है. बता दें कि ‘राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन’ के शासन में अरुण जेटली ने केंद्रीय न्यायमंत्री समेत कई बड़े पदों की कुर्सी भी संभाली.

कानूनी कैरियर

साल 1977 से जेटली ने भारत के सुप्रीम कोर्ट और देश में कई उच्च न्यायालयों के सामने कानूनी अभ्यास किया. जिसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने साल 1990 में उन्हें वरिष्ठ वकील के तौर पर नामित किया. बता दें कि वी.पी. सिंह सरकार ने साल 1989 में जेटली को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया था, साथ ही बोफोर्स घोटाले में जांच को लेकर कागजी कार्रवाई की थी. उन्होंने कानूनी और कई मामलों पर प्रकाशनों की रचना की.

इतना ही नहीं इन्होंने भारत-ब्रिटिश कानूनी फोरम से पहले भ्रष्टाचार और अपराध से जुड़े कानून पर एक पत्र भी प्रस्तुत किया, जोकि भारतीय सरकार की तरफ से जून 1998 में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र को लेकर एक प्रतिनिधि था. उस दौरान ड्रग्स एंड मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कानूनों की घोषणा को मंजूरी मिली थी. साल 2002 में पेप्सी का प्रतिनिधित्व किया था, जहां सुप्रीम कोर्ट ने मनाली-रोहतांग रोड पर पारिस्थितिक तौर पर नाजुक चट्टानों पर विज्ञापनों की पेंटिंग के लिए आठ कंपनियों पर अच्छा-खासा जुर्माना लगाया था. जिसके चलते साल 2004 में राजस्थान उच्च न्यायालय के मामले में जेटली कोका कोला की तरफ दिखाई दिए थे.

राजनीतिक कैरियर

साल 1991 से अरुण जेटली बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहें और फिर साल 1999 में होने वाले आम चुनाव से पहले वो बीजेपी के प्रवक्ता बने. उस दौरान जेटली बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार वाजपेयी सरकार में आए और 13 अक्टूबर 1999 को उन्हें सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री नियुक्त किया गया. राम जेठमलानी ने जब कानून, न्याय और कंपनी मामलों के केंद्रीय मंत्री के तौर पर इस्तीफा दिया, तब 23 जुलाई 2000 को जेटली ने इसी मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला.

आपको बता दें कि अरुण जेटली वाजपेयी सरकार के समय पहले कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. उन्होंने अतिरिक्त कार्यभार के तौर पर बीजेपी सरकार में रक्षा मंत्री के तौर पर काम किया. यूपीए शासन के समय उन्होंने 2009 से 2014 तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर भी काम किया है. बता दें कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में अरुण जेटली ने वित्त मंत्रालय की कुर्सी को बाखूबी संभाला. वहीं अपनी स्वास्थ्य कारणों की वजह से ये मोदी-2 सरकार में शामिल नहीं हुए.

इस वजह से हुआ निधन

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में 66 वर्षीय अरुण जेटली का 24 अगस्त को निधन हुआ. वो काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे, जिस वजह से वो अस्पताल में भर्ती थे. दरअसल, वो सॉफ्ट टिशू सरकोमा नामक कैंसर से पीड़ित थे और वो डायबिटीज के भी मरीज थे. इतना ही नहीं उनका किडनी ट्रांसप्लांट भी हो चुका था.

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