वायुसेना को 161 एकड़ जमीन पर 70 साल बाद मिला हक, जानिए क्या है पूरा मामला?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 20 जनवरी 2021, 05:30 AM Updated: 20 जनवरी 2021, 05:30 AM
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नोएडा के नंगला नंगली और नंगली साकपुर गांवों में किए गए वायु सेना भूमि घोटाले में जबरदस्त तरीके से एक्शन लिया गया है। ऐसा एक्शन कि फिर कभी कोई किसी जमीन हथियाने या फिर कब्जा करने की सोचे भी ना। ये कार्रवाई सोमवार को अंजाम तक पहुंची। तो क्या फैसला रहा इस पूरे मामले को लेकर और क्यों बार बार ऐसी बातें कही जा रही हैं कि वायुसेना को 70 साल बाद मिला 161 एकड़ जमीन पर हक। चलिए जानते हैं।

जिला प्रशासन ने वायु सेना की 161 एकड़ भूमि को Defence Ministry के नाम दर्ज किया है। अगर इस भूमि की कीमत की बात करें तो 400 करोड़ रुपये की है ये पूरी जमीन। आरोप है कि भूमाफिया ने वायु सेना की जमीन पर कब्जा किया फिर फार्म हाउस बनाया। हद तो तब हुई जब फार्म हाउस को बेच दिया गया।

हरियाणा राज्य के फरीदाबाद जिले से साल 1971 में दीक्षित अवार्ड के तहत यह जमीन गौतमबुद्ध नगर को दी गयी। तो दूसरी तरफ इस जमीन पर मालिकाना हक पाने के लिए केस कर दिया गया। दूसरा केस वायु सेना का राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज करने को लेकर दाखिल किया गया। भारत सरकार ने साल 1951 में वायु सेना को यह जमीन दी पर शुरुआत से ही जमीन के राजस्व अभिलेखों पर नाम किसानों के ही रहे। इन अभिलेखों पर वायु सेना का नाम नहीं दर्ज किया गया।

बस इसी का फायदा उठाकर भूमाफिया ने वायु सेना की जमीन पर अपना कब्जा जमा लिया। हद तो तब हो गयी जब इस जमीन पर सैकड़ों फार्म हाउस बना दिए गए और लोगों को बेच भी दिए गए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए आदेश दिया कि वायु सेना की भूमि कब्जा मुक्त करवाने के साथ ही भू-माफिया और Administrative officers की मिलीभगत की जांच की जाए।

70 साल बाद मिला जमीन पर हक

साल 1950 में बुलंदशहर के मौजूदा Collector ने जमीन को अधिग्रहित किया और फिर इसे आगरा के रक्षा संपदा अधिकारी को दे दी। तब यह एरिया बुलंदशहर डिस्ट्रिक्ट में ही आता था। तब से अब तक पहले तो लोकल फार्मर्स और फिर भूमाफिया फिर इसके बाद फार्म हाउस खरीदारों के इस जमीन पर नाम दर्ज होते चले गए। अब रक्षा संपदा अधिकारी की दायर याचिका पर सुनवाई किए जाने के बाद सभी नाम खारिज किए गए और रक्षा मंत्रालय का नाम इस जमीन पर दर्ज किया गया है। मौजूदा वक्त में इस जमीन की कीमत जो आंकी गयी है वो लगभग 400 करोड रुपये है।

जिला अधिकारी सुहास एलवाई ने कहा है कि भू-माफियाओं और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ जनपद गौतमबुद्धनगर में सतत रूप से अभियान चलता रहेगा।

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