Air Chief Marshal AP Singh: एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने तेजस प्रोजेक्ट की देरी पर जताई गहरी नाराजगी, कहा—समय पर डिलीवरी क्यों नहीं होती?

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 30 मई 2025, 12:00 AM 🔄 Updated: 30 मई 2025, 12:00 AM
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Air Chief Marshal AP Singh: दिल्ली में आयोजित CII बिजनेस समिट के दौरान भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने एक बार फिर तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) मार्क 1A की डिलिवरी में हो रही देरी पर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब कोई कॉन्ट्रैक्ट साइन किया जाता है तो तय की गई टाइमलाइन का पालन होना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है। एयर चीफ ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि उन्हें ऐसा कोई प्रोजेक्ट याद नहीं जो समय पर पूरा हुआ हो। उन्होंने यह बात बिना किसी का नाम लिए कही, लेकिन साफ इशारा तेजस प्रोजेक्ट की देरी की ओर था। इससे पहले भी एयर चीफ ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं।

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वायुसेना के फाइटर स्क्वाड्रन की कमी- Air Chief Marshal AP Singh

भारतीय वायुसेना के सामने सबसे बड़ी चिंता फाइटर स्क्वाड्रन की कमी है। मौजूदा सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए वायुसेना को 42 फाइटर स्क्वाड्रन की आवश्यकता है, जबकि फिलहाल सिर्फ 31 स्क्वाड्रन उपलब्ध हैं। नई फाइटर जेट्स की डिलीवरी की रफ्तार इतनी धीमी है कि 31 से 42 स्क्वाड्रन तक पहुंचने में करीब 15 साल लग सकते हैं।

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तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को देश की इस कमी को पूरा करने का अहम हिस्सा माना जाता है। भारतीय वायुसेना के पास पहले से 40 तेजस विमान लेने का करार हो चुका है, जिनमें से दो स्क्वाड्रन स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 83 तेजस मार्क 1A के लिए रक्षा मंत्रालय ने 2021 में ऑर्डर दिया था, जिसकी डिलीवरी मार्च 2024 से शुरू होनी थी। लेकिन अब तक इस डिलीवरी की शुरुआत नहीं हुई है। यह प्रोजेक्ट करीब 48 हजार करोड़ रुपये का है। इसके अलावा 97 और तेजस मार्क 1A के लिए खरीद की मंजूरी भी मिल चुकी है, जिससे कुल 11 स्क्वाड्रन बनाए जाएंगे, जिनमें से 2 ही डिलीवर हो पाए हैं।

फाइटर फ्लीट की वर्तमान स्थिति

2035 तक मिग 21, मिग 29 और जैगुआर जैसे पुराने लड़ाकू विमान पूरी तरह से फेज आउट हो जाएंगे। वर्तमान में मिग 21 बाइसन के 4 में से 3 स्क्वाड्रन पहले ही फेज आउट हो चुके हैं, और बचा हुआ एक भी जल्द ही सेवा से बाहर होगा।

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वायुसेना के पास मिग 29 अपग्रेड के 3 स्क्वाड्रन, मिराज 2000 के 3 स्क्वाड्रन और जैगुआर के 6 स्क्वाड्रन अपग्रेड किए गए हैं। इसके अलावा सुखोई 30 विमानों की संख्या 250 से ऊपर है और 36 राफेल विमानों का बेड़ा भी उपलब्ध है। भविष्य की योजना में 114 मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की खरीद भी शामिल है, जिससे बेड़े की कमी को पूरा करने की कोशिश की जा रही है।

HAL की तरफ से इंजन डिलीवरी में देरी और अब उम्मीद

फरवरी में HAL के CMD ने तेजस डिलिवरी में देरी को लेकर कहा था कि इस साल मार्च में पहला इंजन अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) की तरफ से मिलेगा और इसी कैलेंडर वर्ष में 12 और इंजन भी डिलीवर किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया था कि साल 2031 तक 83 तेजस मार्क 1A विमान मिल जाएंगे।

दो साल से इंजन की कमी की वजह से तेजस प्रोग्राम प्रभावित हुआ था, लेकिन 26 मार्च 2024 को GE ने पहला इंजन डिलीवर कर दिया है। यह इंजन F404 मॉडल का है और भारत में तेजस मार्क 1A के लिए 99 इंजन की सप्लाई की डील 2021 में हुई थी। इंजन की डिलीवरी शुरू न हो पाने की वजह से पूरा प्रोजेक्ट पिछड़ रहा था।

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