मायावती के बाद कांशीराम के सबसे करीब था ये परिवार, पंजाब की राजनीति को देखते हुए इस महिला को बनाना चाहते थे CM

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 30 सितम्बर 2024, 12:00 AM 🔄 Updated: 30 सितम्बर 2024, 12:00 AM
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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम का पूरा जीवन दलितों के हितों और उनके कल्याण की लड़ाई को समर्पित रहा। इसके लिए उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का गठन किया और इस पार्टी की बागडोर बहनजी उर्फ ​​मायावती को सौंपी। मायावती के राजनीतिक करियर और दलित आंदोलन में कांशीराम का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। लेकिन मायावती अकेली ऐसी शख्सियत नहीं हैं, जो कांशीराम की करीबी थीं। इसी कड़ी में एक परिवार ऐसा भी था, जिसे कांशीराम बेहद करीबी मानते थे और खास तौर पर उस परिवार की किसी महिला को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। दरअसल, हम बात कर रहे हैं पीडी शांत और उनके परिवार की, जिसका कांशीराम के जीवन में अहम स्थान रहा।

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पी. डी. शांत और उनका परिवार

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब भी कांशीराम जी पंजाब के जालंधर शहर में आते थे, तो वे हमेशा पी.डी. शांत के घर पर रुकते थे। पी.डी. शांत एक सम्मानित व्यक्ति थे, जिन्होंने दलितों के लिए संघर्ष और काम में कांशीराम का हमेशा साथ दिया। चाहे कांशीराम के राजनीतिक सफर की शुरुआत हो या उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने के बाद, जब भी वे जालंधर आए, उन्होंने शांत परिवार का आतिथ्य स्वीकार किया। खास तौर पर पी.डी. शांत की पत्नी हरदेव कौर शांत के हाथ का बना खाना कांशीराम के लिए खास महत्व रखता था।

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हरदेव कौर शांत पंजाब के लिए कांशीराम की पसंद

कांशीराम हरदेव कौर शांत को बहुत खास मानते थे और उनकी लगन और कार्यकुशलता को देखते हुए उन्होंने उन्हें पंजाब की राजनीति में अहम भूमिका देने का फैसला किया। कांशीराम ने हरदेव कौर शांत को दो बार विधायक का चुनाव लड़वाया और उनकी इच्छा थी कि हरदेव कौर को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया जाए। कांशीराम का मानना ​​था कि समाज सेवा और दलितों के अधिकारों के लिए लड़ने में हमेशा आगे रहने वाली हरदेव कौर शांत पंजाब के दलित और पिछड़े वर्ग के लिए एक मजबूत नेता साबित हो सकती हैं।

कांशीराम और शांत परिवार का गहरा संबंध

इस किस्से से पता चलता है कि कांशीराम न केवल दलित समुदाय के राजनीतिक हितों के लिए समर्पित थे, बल्कि व्यक्तिगत और सामाजिक रिश्तों को भी महत्व देते थे। उनके और शांत परिवार के बीच का रिश्ता सिर्फ़ राजनीतिक नहीं था, बल्कि पारिवारिक भी था। शांत परिवार के घर में रहने के दौरान कांशीराम जी ने एक करीबी रिश्ता स्थापित किया और इस परिवार के समर्थन और सहयोग ने कांशीराम की राजनीति और उनके आंदोलन को मज़बूती दी।

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कांशीराम की दृष्टि

कांशीराम का दृष्टिकोण हमेशा दलितों के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष पर केंद्रित रहा और उन्होंने हमेशा योग्य और समर्पित व्यक्तियों को बढ़ावा देने की कोशिश की। हरदेव कौर शांत को मुख्यमंत्री बनाने की उनकी इच्छा दर्शाती है कि वे महिला सशक्तिकरण और दलित समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को कितना महत्व देते थे।

कांशीराम और पी. डी. शांत के परिवार के बीच का यह किस्सा एक महत्वपूर्ण और अनसुना पहलू है, जो कांशीराम के संघर्ष और उनके रिश्तों को एक नया आयाम देता है। यह दर्शाता है कि कैसे कांशीराम ने न केवल राजनीति में बल्कि व्यक्तिगत रिश्तों में भी ईमानदारी और पारदर्शिता बनाए रखी। हरदेव कौर शांत को मुख्यमंत्री बनाने की उनकी इच्छा उनके सपनों और विचारधारा का हिस्सा थी, जिसे उन्होंने हमेशा आगे बढ़ाने की कोशिश की।

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